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CJI सूर्यकांत बोले, 'मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे से 800 करोड़ लैपटॉप मिल जाएं, लेकिन सिर्फ भाषण होते हैं'

CJI सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया में हर साल मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इतनी बड़ी रकम सफेद की जाती है कि उससे दुनिया के 8 अरब लोगों के लिए एक-एक सामान्य लैपटॉप खरीदा जा सकता है. उन्होंने बताया कि अवैध दौलत का सिर्फ करीब 1% हिस्सा ही वापस हासिल हो पाता है, जबकि बाकी भाषणों और रिपोर्टों तक सीमित रह जाता है.

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जस्टिस सूर्यकांत ने मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर बड़ा दावा किया है. (फोटो- India today)

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  • मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग से धोए गए काले धन का केवल एक प्रतिशत ही वापस हासिल किया जा पाता है और शेष धन भाषणों और रिपोर्टों तक सीमित रहता है।
  • मनी लॉन्ड्रिंग के व्यापक स्तर पर होने के कारण इसका मूल्यांकन किया गया है कि दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक लैपटॉप खरीदने के बराबर काला धन सफेद किया जाता है, लेकिन लौटाव न के बराबर है।
  • जस्टिस सूर्यकांत ने आर्थिक अपराधों से लड़ने के लिए चोरी किए गए पैसों की पहचान, फ्रीजिंग और रीकवरी पर अधिक ध्यान देने और अर्थशास्त्र में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है।

काले धन को सफेद करने का काम ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ कहा जाता है. दुनिया में इसके कई तरीके हो सकते हैं. प्लेसमेंट, लेयरिंग, इंटीग्रेशन. लेकिन फिलहाल ये इंपॉर्टेंट मुद्दा नहीं है. इंपॉर्टेंट एक फैक्ट है जो भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बताई है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग से जितने काले पैसे धोए जाते हैं, वो इतना ज्यादा होता है कि उससे दुनिया के सभी 8 अरब लोगों के लिए एक-एक लैपटॉप खरीदा जा सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि इस अवैध दौलत का सिर्फ एक फीसदी हिस्सा ही रिकवर हो पाता है. बाकी के बारे में सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में बात होकर रह जाती है.

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CJI ने और क्या कहा?

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, CJI सूर्यकांत 29 अगस्त को कैंब्रिज में 43वें ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम’ नाम के प्रोग्राम में बोल रहे थे. यहां उन्होंने कहा कि पैसे से जुड़े (आर्थिक) अपराध से लड़ाई में सबसे ज्यादा ध्यान अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और उसे वापस हासिल करने पर होना चाहिए. अगर मनी लॉन्ड्रिंग का ग्लोबल एस्टिमेट मोटे तौर पर भी सही है तो दुनिया एक साल में इतना पैसा लॉन्डर (काले से सफेद) करती है कि आज धरती पर मौजूद 8 अरब लोगों में से हर एक के लिए एक नॉर्मल लैपटॉप खरीदा जा सकता है. इसके बाद भी काफी पैसा बच जाएगा.

भारत की राजनीति में ‘काला धन’ बहुत पॉपुलर टर्म है. इसके नाम पर सरकारें बनीं. वादा किया गया कि काला धन वापस लाया जाएगा. फिर भी काले धन की वापसी के रास्ते पर सन्नाटा ही है. CJI ने भी यही सच दोहराया. उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से कमाए गए और इधर-उधर किए गए पैसों में से बहुत कम हिस्सा वापस मिलता है. अगर बहुत मोटा-मोटी अनुमान भी लें तो उसके हिसाब से भी सिर्फ एक फीसदी हिस्सा ही वापस आ पाता है.  

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उन्होंने आगे कहा कि यानी उस गैर कानूनी संपत्ति के हर 100 हिस्सों में से 99 का जिक्र सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में होता है. जबकि असल में केवल 1 हिस्सा ही वापस हासिल किया जा पाता है.

दुनिया की पहली धोखाधड़ी

ये सब बताते हुए CJI सूर्यकांत ने दुनिया की पहली घोखाधड़ी का किस्सा भी सुनाया. चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में हेगेस्त्राटोस नाम का एक यूनानी व्यापारी हुआ करता था. उसने बीमा का पैसा वापस पाने के लिए अपने ही जहाज को जानबूझकर डुबो दिया. इसे दुनिया भर में फाइनेंशियल फ्रॉड के सबसे पहले मामलों में से एक माना जाता है. 

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CJI ने फिर चाणक्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी जिक्र किया. इसमें सरकारी अफसरों के राजस्व चोरी के 40 तरीकों की पहचान की गई है. ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई के बारे में भी जिक्र किया गया है. CJI ने कहा कि अर्थशास्त्र में अब बदलाव की जरूरत है और उसमें चोरी के 40 तरीकों के साथ उस पैसे का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और वापस लाने के 40 तरीकों के बारे में भी जानकारी जोड़नी चाहिए.

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