छत्तीसगढ़ का एक गांव इन दिनों डर के साये में जी रहा है. बीते तीन महीनों में आठ लोगों की मौत हो चुकी है. शुरू में यह मामला सामान्य मौतों जैसा ही लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर इसमें कई चौंकाने वाले मोड़ सामने आए. अब इस घटना के तार जहरीली शराब के कारोबार, छिपे हुए खजाने की तलाश, काला जादू और एक सोची-समझी आपराधिक साजिश से जुड़ते नजर आ रहे हैं.
'काला जादू, जहरीली शराब और छिपा हुआ खजाना...', छत्तीसगढ़ में आठ लोगों की मौत कैसे हो गई?
Chhattisgarh के एक गांव में तीन महीने में आठ मौतें हुईं. पहले यह सामान्य लगा, लेकिन जांच में जहरीली शराब, छिपा खजाना, 'काला जादू' और मर्डर की साजिश सामने आई. क्या है पूरा मामला?


इंडिया टुडे से जुड़ी सुमी राजाप्पन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला बलौदा बाजार जिले के खारवे गांव का है. गांव वालों का कहना है कि 6 फरवरी से 14 मई के बीच आठ लोगों की मौत हुई. सभी मौतें लगभग एक ही तरह से हुईं. मरने वालों में बद्री प्रसाद पटेल, बुतालू साहू, छत्तूराम साहू, बुधराम जायसवाल, विनोद साहू, गजानंद मांझी, चैतूराम साहू और महेत्रू साहू शामिल हैं. सातों को महानदी के पास दफनाया गया था, जबकि एक का अंतिम संस्कार किया गया.
गांव वालों के बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने 13 जून को महेत्रु साहू का शव जमीन से निकाला और बाद में 16 जून को छह और शव निकाले. इन्हें पोस्टमॉर्टम और जांच के लिए रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल भेजा गया है. पुलिस का कहना है कि जब तक फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता.
गांव वालों का सबसे बड़ा आरोप है कि स्थानीय निवासी रामसे जयसवाल ने शराब में ‘सुहागा’ (बोरेक्स) नाम का जहरीला केमिकल मिलाया था. इसी मिलावटी शराब को पीने की वजह से कथित तौर पर लोगों की जान गई. ग्रामीणों के मुताबिक, बीमार पड़ने या मरने से कुछ समय पहले ही उन्होंने शराब पी थी. पंचायत प्रतिनिधि मायाराम नवरंगे ने कहा कि मौतों में समानता देखते हुए गांव वालों को शक हुआ कि यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि कोई साजिश हो सकती है.
गांव के रहने वाले कार्तिक ने दावा किया कि वह शराब पीने के बाद बच गया. उसने बताया कि शराब पीने के बाद उसे बहुत ज्यादा उल्टी हुई और इलाज से पहले वह बेहोश हो गया. ये दावे अभी वेरिफाई नहीं हुए हैं और पुलिस ने मौत की वजह जहर होने की पुष्टि नहीं की है.
खजाने की खोज और 'काला जादू’जैसे-जैसे जांच बढ़ी, गांव में अटकलें जहर देने से आगे बढ़ गईं. कई लोगों का आरोप है कि रामसे जायसवाल अक्सर जमीन के नीचे दबे खजाने और उसे खोजने में मदद करने वाले अनुष्ठानों के बारे में बात करते थे. जल्द ही अफवाहों ने ‘काले जादू’ और ‘बलि देने’ जैसी बातों का रूप ले लिया. कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि हो सकता है कि और भी गांव वाले निशाने पर रहे हों. यह भी दावा किया कि इस कथित साजिश में कुल 21 लोग शामिल थे.
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, एक बचे हुए व्यक्ति के गंभीर रूप से बीमार पड़ने के बाद यह शक और बढ़ गया. पुलिस ने सबके सामने कहा है कि अभी तक इन मौतों का जादू-टोने, खजाने की खोज या रीति-रिवाजों से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है. पुलिस ने किसी भी कथित टारगेट लिस्ट के होने की भी पुष्टि नहीं की है.
इस विवाद में एक और बात सामने आई है. दो ऑडियो क्लिप्स मिली हैं जिनमें कथित तौर पर रामसे ग्रामीणों को पुलिस के पास न जाने के लिए मनाते हुए सुने जा सकते हैं. इन रिकॉर्डिंग्स की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अधिकारियों ने इनकी सच्चाई पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
गांव वालों को रिपोर्ट का इंतजारशुरुआत में ग्रामीणों का मानना था कि ये मौतें दैवीय प्रकोप का नतीजा हैं. उन्होंने प्रार्थनाएं व पारंपरिक अनुष्ठान किए. जब मौतें होती रहीं, तो लोगों ने सरकारी दखल की मांग की. तब से पीड़ितों के परिवार वालों ने सख्त कार्रवाई और कुछ मामलों में CBI जांच की मांग की है.
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पुलिस नक्या बताया?बलौदा बाजार के पुलिस अधीक्षक (SP) ओपी शर्मा ने कहा कि बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि मौत की वजह अभी भी साफ नहीं है. फिलहाल खारवे गांव डर, अफवाहों और कई सवालों के बीच फंसा हुआ है.
पोस्टमॉर्टम और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट से यह पता चलने की उम्मीद है कि मौतें जहर देने, आपराधिक साजिश, प्राकृतिक कारणों या किसी और वजह से हुईं. जब तक वैज्ञानिक नतीजे सामने नहीं आते, गांव का सबसे परेशान करने वाला रहस्य अनसुलझा ही रहेगा.
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