अनुपम मिश्र गांधीवादी विचारक और पर्यावरणविद थे. एक शख्स चिलचिलाती गर्मी में उनसे मिलने उनके घर पहुंचा. उन्होंने पूछा, पानी पियोगे? उसने कहा, हां. उन्होंने पूछा, कितना? सामने वाला चौंक गया. बोला, क्या मतलब? अतिथि के चेहरे पर आश्चर्य का भाव उन्होंने पढ़ लिया. फिर कहा, अक्सर लोग पानी से भरा पूरा ग्लास उठाते हैं और एक दो घूंट पीकर रख देते हैं. बचा हुआ सारा पानी बेकार चला जाता है. लोग यह भूल जाते हैं कि पीने का पानी बहुमूल्य है. उसकी उपलब्धता सीमित है. पृथ्वी का जल आपकी विरासत है, बपौती नहीं!
क्या है '5% मॉडल' जिसने छत्तीसगढ़ के इस जिले में भूजल का संकट दूर कर दिया?
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने जल संरक्षण के लिए एक मॉडल शुरू किया है. 5% जल संरक्षण मॉडल. इसके तहत गांव के लोग अपनी खेती की जमीन के 5% हिस्से पर सोख्ता गड्ढे बनवाते हैं, ताकि बारिश का पानी रिस कर जमीन के अंदर जा सके.


छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने इस बहुमूल्य विरासत को सहेजने की पहल की है. यहां चल रहा ‘5% जल संरक्षण मॉडल’ पूरे देश में मिसाल के तौर पर उभरा है. लोक भागीदारी वाले इस मॉडल से इलाके के ग्राउंड वॉटर लेवल में सुधार हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ में भी इसका जिक्र कर चुके हैं. वहीं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल पूरे देश में इस मॉडल को अपनाने की वकालत कर रहे हैं.
खेती की जमीन पर बन रहे सोख्ते
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के कई जिलों की तरह कोरिया में भी ग्राउंड वॉटर लेवल नीचे गया है. पिछले साल गर्मियों के सीजन में तब के जिला कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने 5% मॉडल शुरू किया था. इसके तहत गांव के लोग अपनी खेती की जमीन के 5% हिस्से पर सोख्ता गड्ढे बनवाते हैं, ताकि बारिश का पानी रिस कर जमीन के अंदर जा सके.
सरकारी अधिकारियों ने गांव वालों को गड्ढे बनाने की ट्रेनिंग दी. इसका रिजल्ट भी दिखा. पिछले साल मार्च और मई के बीच लगभग 2,000 सोख्ते खोदे गए. इनमें से 1,000 से ज्यादा सोख्ते खेतों में खोदे गए. इस साल तो इस अभियान को पंख लग गए. फरवरी से मई के बीच लगभग 30,000 सोख्ता गड्ढे खोदे गए. यह पिछले साल के मुकाबले 15 गुना ज्यादा है. ये गड्ढे खेतों, घर के पिछवाड़े और किचन गार्डेन में खोदे गए हैं.
5 प्रतिशत मॉडल बना जन आंदोलन
कोरिया जिले के 5% मॉडल ने जल संरक्षण को एक आंदोलन में बदल दिया है. इससे ग्राउंड लेवल वॉटर भी रिचार्ज हुआ है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल का सुझाव है कि इस मॉडल को पूरे देश में पॉलिसी के तौर पर अपनाया जा सकता है. कोरिया जिला पंचायत के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर आशुतोष चतुर्वेदी बताते हैं,
किसी भी आंदोलन की सफलता लोगों की भागेदारी से तय होती है. हमने गांव वालों को जागरूक करने से शुरुआत की. उन्हें समझाया कि सोख्ते गड्ढे न केवल ग्राउंड वॉटर रिचार्ज करेंगे, बल्कि मिट्टी को भी नम बनाए रखेंगे. इससे खेतों की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी.
कोरिया जिले के अधिकारियों की मानें तो 5% मॉडल से रिजल्ट मिले हैं. सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में जिले में मानसून के बाद ग्राउंड वॉटर लेवल जमीन से 6.6 मीटर नीचे था. साल 2025 में ये जमीन से 3.89 मीटर नीचे तक आ गया है.
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