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देश में बनी 157 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल, 44 अकेले इस राज्य में बनी थीं

ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कई ड्रग्स की क्वालिटी को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है.

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रिपोर्ट में चार सिरप और एक एंटीबायोटिक को नकली (spurious) भी बताया गया है. फोटो- Adobe stock

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  • केंद्रीय दवा नियामक की रिपोर्ट में देशभर की 157 दवाएं और मेडिकल उत्पाद गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए, जिनमें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएं शामिल हैं।
  • केंद्रीय व राज्य दवा नियामक समय-समय पर दवाओं के सैंपल लेकर जांच करते हैं क्योंकि कई औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियों से बनी दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
  • जांच में असफल पाए गए दवाओं के प्रभावित बैच बाजार से वापस मंगाए जाएंगे और दवा कंपनियों को नोटिस भेजकर समस्या की गहराई जांचने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कई ड्रग्स की क्वालिटी को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है. देशभर में बनी 157 दवाएं और मेडिकल प्रोडक्ट क्वालिटी टेस्टिंग में फेल पाए गए हैं. यानी ये प्रोडक्ट तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे. इनमें 44 दवाएं हिमाचल प्रदेश की 37 दवा कंपनियों में बनी थीं.

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केंद्रीय दवा नियामक (central drug regulator) की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. मंगलवार, 23 जून की शाम आई इस रिपोर्ट में चार सिरप, चार गलत लेबल वाले उत्पाद और एक एंटीबायोटिक को नकली (spurious) भी बताया गया है. गुणवत्ता जांच में फेल होने वाली दवाओं में कई इंजेक्शन, एंटीबायोटिक, कफ सिरप, विटामिन सप्लीमेंट और डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंजेक्शन और सिरप जैसी दवाओं में क्वालिटी की कमी ज्यादा गंभीर मानी जाती है, क्योंकि इससे मरीजों की सेहत पर सीधा असर पड़ सकता है.

सबसे जरूरी दवाएं भी फेल

देश में सबसे ज्यादा खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के सैंपल हिमाचल प्रदेश से सामने आए हैं. ये दवा कंपनियां बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, काला अंब, पांवटा साहिब, परवाणू और ऊना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं. जांच में फेल होने वाली दवाओं में आयरन सुक्रोज, रैबेप्राजोल, डाइक्लोफेनाक, ओन्डैनसेट्रॉन, ऑक्सीटोसिन, टेल्मिसार्टन, रोसुवास्टेटिन, एटोरवास्टेटिन, गैबापेंटिन और प्रेगाबालिन जैसी दवाएं भी शामिल हैं.

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सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली बात ये है कि लिस्ट में जो नाम हैं उनमें कई तरह के इंजेक्शन, एंटीबायोटिक, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएं, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं, कफ सिरप, विटामिन सप्लीमेंट और पेट की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के हैं.

दवाओं, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइस की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए केंद्रीय और राज्य दवा नियामक समय-समय पर बाजार से इनके सैंपल लेकर जांच करते हैं. जो सैंपल तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें मासिक अलर्ट सूची में शामिल किया जाता है. हाई ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मिसार्टन, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाली रोसुवास्टेटिन और एटोरवास्टेटिन, पेट की बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली रैबेप्राजोल और ओमेप्राजोल, डायबिटीज की कुछ दवाएं और एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलैनिक एसिड, सेफिक्सिम व सेफपोडॉक्सिम जैसी एंटीबायोटिक दवाएं भी इस अलर्ट में शामिल हैं. इससे इन दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों के बीच चिंता बढ़ गई है.

सिरमौर में बनी एक एंटीबायोटिक को ‘स्प्यूरियस’ (नकली) घोषित किया गया है, जिसे दवा गुणवत्ता से जुड़ी बेहद गंभीर खामी माना जाता है. हालांकि ये समस्या सिर्फ एक खास बैच में पाई गई है, लेकिन फिर भी दवा निर्माता कंपनी के गुणवत्ता मानकों पर सवाल तो खड़े होते ही हैं.

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मार्केट से वापस मंगाए जाएंगे बैच

स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि जिन कंपनियों की दवाएं जांच में फेल हुई हैं, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं. साथ ही, इन दवाओं के प्रभावित बैचों को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. उन्होंने बताया कि दवाओं के सैंपल फेल होने की वजह जानने के लिए जांच की जाएगी. उनका कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

वीडियो: गाजियाबाद में नकली दवाओं की फैक्ट्री में छापा, ब्रांडेड दवाओं के नाम पर ऐसे बनाई जा रही थीं नकली दवाएं

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