मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच शुरू हो गई है. साथ ही सरकार ने FIR दर्ज करने की भी मंजूरी दे दी है. ये जांच 20 साल पुराने कथित रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ी हुई है. आरोप है कि साल 2006 में जब ज्ञानेश कुमार केरल में PWD में सचिव थे, तब उन्होंने बिल पास करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी. इस मामले में एक मलयेशियाई इंजीनियर के जान लेने का भी जिक्र आता है. 4 नवंबर को केरल सरकार ने ठेकेदार साजन की नई शिकायत पर विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो यानी VACB को कार्रवाई की अनुमति दी है. शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होगी. मलयालम मीडिया संस्थान मनोरमा ऑनलाइन के मुताबिक, सरकार ने FIR दर्ज करने की भी मंजूरी दे दी है. तो आखिर 20 साल पुराने इस मामले में अब क्या हुआ है? और इसका ज्ञानेश कुमार से क्या कनेक्शन है?
ज्ञानेश कुमार पर 2 करोड़ की रिश्वत मांगने का आरोप, 20 साल पुराने मामले की जांच शुरू
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 2006 में केरल PWD सचिव रहते हुए 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. करीब 20 साल पुराने इस मामले में केरल सरकार ने दोबारा जांच और FIR दर्ज करने की मंजूरी दी है. आइए जानते हैं पूरा मामला.

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी हैं. साल 2006 में वे केरल में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट यानी PWD के सचिव थे. उस वक्त केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट यानी KSTP के तहत सड़कों का निर्माण और मरम्मत हो रही थी. इस प्रोजेक्ट का काम भारत और मलेशिया की कंपनियों के ज्वाइंट वेंचर PATI-BEL को मिला था. कोल्लम के ठेकेदार वीओ साजन इस प्रोजेक्ट में निर्माण सामग्री सप्लाई कर रहे थे.
2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोपसाजन का आरोप है कि प्रोजेक्ट के इंजीनियर ली सी बीन ने उन्हें बताया था कि करीब 17 करोड़ रुपये के बिल मंजूर होने के बावजूद भुगतान के चेक नहीं दिए जा रहे थे. इसकी वजह कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार की ओर से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग थी. साजन के मुताबिक, कंपनी ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया. इसके बाद इंजीनियर ली सी बीन को ठेकेदारों और कर्मचारियों का बकाया चुकाने के लिए बेंगलुरु में कंपनी के दूसरे प्रोजेक्ट से पैसे जुटाने पड़े.
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मलेशियाई इंजीनियर की मौत और कथित नोटली सी बीन ने 2005-06 के दौरान मलयेशिया में अपनी जान ले ली थी. साजन का दावा है कि जान लेने से पहले ली ने एक नोट छोड़ा था. इसमें केरल के PWD अधिकारियों के साथ ज्ञानेश कुमार का नाम भी था. हालांकि, ये कथित नोट अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है. इसलिए इसमें ज्ञानेश कुमार का नाम होने की बात की पुष्टि भी नहीं हुई है.
ली सी बीन की मौत के बाद केरल विजिलेंस ने मामले की जांच शुरू की थी. यह जांच 2007 से 2012 के बीच चली. लेकिन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले. विजिलेंस ने मामला बंद करने की सिफारिश की थी. साल 2012 में अदालत ने भी कुछ मामलों को 'मिस्टेक ऑफ फैक्ट' मानते हुए रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी.
अब कांग्रेस नेता मलयंकिझु वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि पुरानी जांच बाहरी दबाव में प्रभावित हुई थी. उन्होंने केरलम के मौजूदा गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को शिकायत देकर दोबारा जांच की मांग की. इसके बाद ठेकेदार साजन ने भी 23 अक्टूबर को नई शिकायत दी. उनका कहना है कि पुरानी जांच में उनसे और दूसरे अहम गवाहों से पूछताछ नहीं की गई थी. उन्होंने ली के परिवार के सदस्यों और प्रोजेक्ट से जुड़े दूसरे लोगों को जांच एजेंसी के सामने पेश करने की पेशकश भी की है.
अब आगे क्या होगा?केरल सरकार ने शिकायतों के आधार पर विजिलेंस को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी है. एजेंसी पुराने रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और गवाहों के बयान खंगालेगी. कानूनी राय भी ली गई है कि इतने पुराने मामले में अब कार्रवाई की जा सकती है या नहीं. फिलहाल ज्ञानेश कुमार पर लगे रिश्वतखोरी के आरोप साबित नहीं हुए हैं. और ना ही उनकी ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया आई है. एक तरफ ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं. दूसरी तरफ अब उनके पुराने प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़ा यह मामला भी चर्चा में है.
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