बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 14 महीने के बच्चे की हत्या के मामले में आरोपी मां को जमानत दे दी. महिला छह साल से अधिक समय से हिरास्त में थी. आरोप है कि महिला एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में थी, इस वजह से उसने बच्चे की हत्या कर दी थी. हत्या के बाद उसने बच्चे के शव को दफनाकर ठिकाने लगाने का भी प्रयास किया था.
प्रेमी के साथ मिल एक साल के बेटे की हत्या की आरोपी मां को मिली जमानत, लेकिन क्यों?
इस मामले में तीन आरोपी शामिल थे. इनमें से एक घटना के वक्त जुवेनाइल था. उस पर आरोप था कि उसने बच्चे के शव को दफनाने में मदद की थी. उसे पहले ही रिहा कर दिया गया था. दूसरा आरोपी राकेश पटेल नाम का शख्स है. उसे ही महिला का प्रेमी बताया गया था.
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बीती 14 दिसंबर को जस्टिस मनीष पितले की बेंच ने मामले में जमानत का आदेश सुनाया. उन्होंने संविधान के आर्टिकल 21 का हवाला देते हुए कहा कि त्वरित सुनवाई का अधिकार मौलिक अधिकार है. इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में तीन आरोपी शामिल थे. इनमें से एक घटना के वक्त जुवेनाइल था. उस पर आरोप था कि उसने बच्चे के शव को दफनाने में मदद की थी. उसे पहले ही रिहा कर दिया गया था. दूसरा आरोपी राकेश पटेल नाम का शख्स है. उसे ही महिला का प्रेमी बताया गया था. लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे में ट्रायल की धीमी गति के कारण उसे 19 सितंबर, 2022 को जमानत दे दी गई थी.
2019 में गिरफ्तार हुई थी महिलारिपोर्ट के मुताबिक आरोपी मां ममता यादव को ठाणे के नारपोली पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के सिलसिले में 1 फरवरी, 2019 को गिरफ्तार किया गया था. ये मामला उसके पति वीरेंद्र कुमार ने दर्ज कराया था. महिला पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्यों को गायब करना) के तहत आरोप लगाए गए थे. उस पर ये भी आरोप थे कि वो एक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में शामिल थी, इसलिए उसने अपने 14 महीने के बच्चे की हत्या कर दी थी. महिला के पति ने दावा किया था कि ममता ने न केवल अपने बच्चे का गला घोटा, बल्कि शव को दफनाकर ठिकाने लगाने का भी प्रयास किया.
रिपोर्ट के मुताबिक कपल बच्चे से छुटकारा पाना चाहता था, इसलिए बच्चे की हत्या कर दी. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर भिवंडी के मनकोली में एक औद्योगिक संपत्ति के कंपाउंड में शव को दफनाने के लिए एक नाबालिक की मदद ली.
2016 में हुई थी शादीरिपोर्ट के अनुसार ममता यादव ने मार्च 2016 में वीरेंद्र कुमार से शादी की थी. बाद में दोनों को बेटा हुआ था. तीनों भिवंडी के दापोड़ा गांव में रह रहे थे. वीरेंद्र एक गोदाम में काम करता था. उसका आरोप था कि ममता का उनके पड़ोस में रहने वाले राकेश पटेल के साथ विवाहेत्तर संबंध था. महिला पर आरोप था कि वो पटेल के साथ उत्तर प्रदेश के एक गांव चली गई थी. जब वो दोनों वापस भिवंडी लौटे तो महिला राकेश और अपने एक साल के बेटे आर्यन के साथ रहने लगी.
वीरेंद्र ने जब ये देखा कि उनका बच्चा ममता के पास नहीं है तो उसके बारे में पूछताछ की. लेकिन उन्हें साफ जवाब नहीं मिला. उन्हें संदेह हुआ जिसके बाद वीरेंद्र ने मामला दर्ज कराया. जांच में सामने आया कि बच्चे की हत्या की जा चुकी है.
इस मामले की सुनवाई के दौरान महिला के वकील अमित इचाम और चैतन्य पुरनकर ने तर्क दिया कि केस पूरी तरह से साक्ष्यों पर निर्भर करता है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिला पहले ही छह साल से भी अधिक समय तक जेल मेें रह चुकी है. साथ ही, जनवरी 2019 में आरोप तय होने के बावजूद, आज तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है. वकीलों ने कोर्ट से कहा कि अभियोजन पक्ष 36 गवाहों से पूछताछ करने की योजना बना रहा है, जिससे इस प्रक्रिया की निकट भविष्य में समाप्त होने की संभावना नहीं है.
अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील मयूर सोनावने ने अपराध की गंभीरता और इसके पीछे के कथित मकसद पर जोर देते हुए महिला की जमानत का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि गवाहों को समन जारी किया गया था और ये भी कहा कि मुकदमा तेजी से आगे बढ़ सकता है.
हालांकि, जस्टिस पितले ने कहा कि बिना मुकदमे के लंबे समय तक जेल में रहना आरोपी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. कोर्ट ने कहा कि आरोप तय होने के पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है. केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर मुकदमे की कार्यवाही के बिना अनिश्चित काल तक जेल की कैद को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
वीडियो: बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला 'रुम बुक करने का मतलबये नहीं कि...'






















