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'हर जगह नमाज की इजाजत नहीं... ', बॉम्बे HC ने वजह गिनाते हुए एयरपोर्ट के पास जगह देने से मना किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई एयरपोर्ट पर रमजान के दौरान नमाज पढ़ने के लिए जगह देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. ये याचिका Taxi-Rickshaw Ola-Uber Association की तरफ से दायर की गई थी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की बेंच ने की.

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने नमाज पढ़ने को लेकर टिप्पणी की है (PHOTO-Wikipedia)

‘किसी भी जगह नमाज पढ़ना धार्मिक अधिकार नहीं माना जा सकता. जब सुरक्षा का जोखिम होता है, तो सुरक्षा सबसे पहले आती है, चाहे धर्म कोई भी हो. सुरक्षा के मामले में हम जरा भी समझौता नहीं करेंगे. इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता. आप नमाज की जगह तय नहीं कर सकते.’ 5 मार्च को ये ट‍िप्पणी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई एयरपोर्ट पर रमजान के दौरान नमाज पढ़ने के लिए जगह देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. ये याचिका Taxi-Rickshaw Ola-Uber Association की तरफ से दायर की गई थी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की बेंच ने की.  

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क्या था मामला?

बार एंड बेंच की र‍िपोर्ट के मुताबि‍क Taxi-Rickshaw Ola-Uber Association ने कोर्ट से मांग की थी कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के पास पहले जो नमाज पढ़ने के लिए एक छोटा शेड था, उसे फिर से बनाया जाए. अगर ऐसा संभव नहीं है तो रमजान के महीने के लिए करीब 1500 स्क्वायर फीट की कोई दूसरी जगह दे दी जाए, ताकि ड्राइवर नमाज पढ़ सकें. संगठन का कहना था कि ये अस्थायी शेड करीब 30 साल से वहां मौजूद था. लेकिन अप्रैल 2025 में Mumbai Metropolitan Region Development Authority यानी MMRDA ने उसे तोड़ दिया. इसके बाद ड्राइवरों को नमाज पढ़ने में परेशानी हो रही है, खासकर रमजान के दौरान. इसी वजह से उन्होंने फरवरी 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की.

याचिकाकर्ता की दलील

ड्राइवरों की तरफ से वकील शहज़ाद नकवी और एस बी तालेकर ने कहा कि ये जगह पहले खुद अधिकारियों ने तय की थी. इतने सालों में वहां कभी कोई सुरक्षा से जुड़ी घटना नहीं हुई. उन्होंने ये भी कहा कि आसपास हाल ही में एक मंदिर बना है, लेकिन सुरक्षा की बात तब उठाई गई जब किसी तीसरे व्यक्ति ने शिकायत की.

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सरकार और एयरपोर्ट का जवाब

राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि एयरपोर्ट का डोमेस्ट‍िक टर्मिनल बहुत हाई सिक्योरिटी वाला और भीड़भाड़ वाला इलाका है. यहां अक्सर VVIP लोगों की आवाजाही होती रहती है. इसलिए वहां किसी भी तरह का अनधिकृत ढांचा नहीं बनाया जा सकता. सरकार की तरफ से सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने बताया कि ड्राइवरों के पार्किंग एरिया से पैदल दूरी पर कम से कम तीन मस्जिदें मौजूद हैं, जहां वे नमाज पढ़ सकते हैं. वहीं मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) की तरफ से पेश सीन‍ियर एडवोकेट विक्रम ननकानी ने कहा कि जो शेड तोड़ा गया था वो वीआईपी एंट्री गेट के पास था. वो सुरक्षा के लिहाज से खतरा बन सकता था.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि अगर आसपास मंदिर होने की बात मान भी ली जाए, तब भी ये तर्क सही नहीं है कि उसी आधार पर वहां नमाज की जगह दी जाए. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दूसरा ढांचा भी गैरकानूनी है तो उसे भी हटाया जा सकता है. दो गलत चीजें मिलकर सही नहीं बन जातीं. इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से आसपास कोई दूसरी जगह तलाशने को कहा था. इसके बाद सात संभावित जगहों का सुरक्षा सर्वे कराया गया. 

लेकिन सरकार ने रिपोर्ट में बताया कि विकास कार्यों और सुरक्षा कारणों की वजह से सातों जगहें ठीक नहीं पाई गईं. कोर्ट ने ये भी कहा कि भले ही ड्राइवरों को परेशानी हो रही हो, लेकिन सुरक्षा रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसलिए कोर्ट एयरपोर्ट परिसर में रमजान के लिए भी अस्थायी नमाज की जगह देने का आदेश नहीं दे सकता.

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आगे क्या रास्ता है?

कोर्ट ने इस मामले में एक रास्ता खुला रखा है. कोर्ट ने ड्राइवर संगठन को यह अनुमति दी है कि वे AAI (Airports Authority of India) और MIAL से बात करके एयरपोर्ट की रीडेवलपमेंट फैस‍िल‍िटी में जगह देने की मांग कर सकते हैं. उस पर अंतिम फैसला एयरपोर्ट अथॉरिटी, स‍िक्योर‍िटी और डेवलेपमेंट की स्थिति को देखकर करेगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि एयरपोर्ट पर काम करने वाले ड्राइवर यात्रियों की सेवा करते हैं. प्रार्थना करना उनके धर्म का एक अभिन्न हिस्सा है.

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