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राहुल गांधी से बात हो गई, फिर भी भूपेन बोरा के इस्तीफे पर फुल कंफ्यूजन, CM सरमा की भी नजर

Assam Congress के अंदर झगड़े की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी, जब प्रदेश की कमान Bhupen Kumar Borah से लेकर Rahul Gandhi के भरोसेमंद Gaurav Gogoiको सौंपी गई थी.

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भूपेन बोरा (बीच में) पर आमने-सामने कांग्रेस और बीजेपी. (तस्वीरें- PTI/ITG)

असम के पूर्व कांग्रेस चीफ भूपेन कुमार बोरा के इस्तीफे पर सियासी घमासान मचा हुआ है. खबरें आईं कि भूपेन ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है और वे पार्टी में ही बने रहेंगे. हालांकि, भूपेन ने कहा कि वे 17 फरवरी को अपने इस्तीफे पर आखिरी फैसला लेंगे. इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी कांग्रेस के अंदरूनी घमासान पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि वे 17 फरवरी को भूपेन से मिलने उनके घर जाएंगे.

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असम में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं. कांग्रेस और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी-अपनी सियासी गोटियां फिट करने में लगी हैं. कांग्रेसी खेमे में उस वक्त भूचाल आया जब असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पार्टी प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा सौंपा.

भूपेन का इस्तीफा आते ही असम कांग्रेस यूनिट एक्टिव हुई. इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि कांग्रेस असम प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, भंवर जितेंद्र सिंह और प्रद्युत बोरदोलोई जैसे सीनियर कांग्रेस नेता रायजोर दल के चीफ अखिल गोगोई के साथ भूपेन के घर पहुंचे. कुल मिलाकर इस्तीफे वापस लेने को लेकर काफी मान-मनौव्वल हुआ.

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इंडिया टुडे से जुड़े हृजॉय दास कानूनगो की रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भूपेन बोरा से बात की है. गोगोई ने दावा किया कि पार्टी ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है. इसके बाद खबर आई कि भूपेन ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है.

पूरे मामले में नया मोड़ तब आया, जब भूपेन बोरा ने कहा कि इस्तीफे पर आखिरी फैसला लेने के लिए उन्हें थोड़ा और समय चाहिए. उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार से सलाह-मशिवरा करेंगे और 17 फरवरी को अपने फैसले के बारे में बताएंगे.

भूपेन कुमार बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के मुखिया रहे हैं. उनके बाद गौरव गोगोई को यह जिम्मेदारी दी गई. दो बार के विधायक रह चुके भूपेन ने कहा था कि उन्होंने किसी खास इंसान या खास वजह के कारण इस्तीफा नहीं दिया है. उन्होंने कहा,

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"मैंने 32 साल तक कांग्रेस की सेवा की है और मैं पार्टी के भविष्य को लेकर चिंतित हूं. मैंने पार्टी हाईकमान को भेजे इस्तीफे में अपने कारणों के बारे में विस्तार से बताया है."

असम में कांग्रेस के अंदर झगड़े की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी, जब प्रदेश की कमान राहुल गांधी के भरोसेमंद गौरव गोगोई को सौंपी गई थी. ऐसी अटकलें थीं कि कांग्रेस हाईकमान ने मान लिया था कि भूपेन कुमार बोरा का स्टेट प्रेसिडेंट के तौर पर रोल पूरा हो गया है. पार्टी सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का मुकाबला करने के लिए गौरव गोगोई जैसे बड़े कद के नेता की तलाश में थी. इसके बाद पार्टी ने राज्य की जिम्मेदारी भूपेन से लेकर गोगोई को दे दी.

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