ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के नुआगांव में एक आंगनवाड़ी सेंटर में 3 महीनों से बच्चे नहीं आ रहे थे. बच्चों की अटेंडेंस जीरो चल रही थी. वजह थी दलित लड़की का हेल्पर-कम-कुक के रूप में काम करना. अभिभावक इसके खिलाफ थे और अपने बच्चों को आंगनवाड़ी में पढ़ने के लिए नहीं भेज रहे थे. गांव वालों के इस रवैये को देखते हुए कई मीटिंग्स रखी गईं. उन्हें समझाने की कोशिश की गई. प्रशासन को बीच में आकर दखल देना पड़ा, तब जाकर लोगों ने अपने बच्चों को सेंटर पर भेजना शुरू किया.
दलित कुक के हाथ का खाना खाने आंगनवाड़ी पहुंचे बच्चे, पेरेंट्स को समझाने में प्रशासन के पसीने छूटे
Odisha anganwadi Dalit cook boycott: ओडिशा के एक गांव की आंगनवाड़ी सेंटर में 3 महीनों से बच्चों की अटेंडेंस बिल्कुल जीरो चल रही थी. वजह थी यहां दलित लड़की का हेल्पर-कम-कुक के रूप में काम करना. अभिभावकों के इस रवैये के बाद प्रशासन को बीच में आना पड़ा.
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 साल की शर्मिष्ठा सेठी को सेंटर पर 5 हजार रुपये की सैलरी पर हेल्पर-कम-कुक के तौर पर रखा गया था. 20 नवंबर को उनकी जॉइनिंग के बाद ही गांववालों ने उनका बॉयकॉट करना शुरू कर दिया. सेंटर में कोई विजिटर नहीं आ रहा था. तीन साल से कम उम्र के बच्चों के माता-पिता, जो सेंटर से राशन घर ले जा सकते हैं, उन्होंने भी आना बंद कर दिया था.
इस बॉयकॉट को खत्म करने के लिए कई राउंड्स की मीटिंग हुईं. सबसे लेटेस्ट मीटिंग शनिवार, 14 फरवरी की गई. जिला प्रशासन के चलाए गए अभियान के बाद गांव वाले आखिरकार मान गए. सोमवार, 16 फरवरी को सेंटर में तीन से छह साल उम्र के 20 में से 15 बच्चे आए और उन्होंने शर्मिष्ठा का बना खाना खाया. बॉयकॉट का सामने करने वाली शर्मिष्ठा ने कहा,
“मुझे खुशी है कि माता-पिता अपने बच्चों को आंगनवाड़ी सेंटर लाए हैं और भरोसा दिलाया है कि वे उन्हें हर दिन भेजेंगे. मैं चाहती हूं कि वे सरकार की दी जा रही सुविधाओं का फायदा उठाएं. अच्छी पढ़ाई करें, क्योंकि वे इस गांव और देश का भविष्य हैं.”
बच्चों के आंगनवाड़ी केंद्र जाने पर केंद्रपाड़ा चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर दीपाली मिश्रा ने कहा कि इससे लोगों के बीच एक पॉजिटिव मैसेज जाएगा. इसके लिए सीनियर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन अधिकारियों ने गांव वालों की मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया है, जैसे आंगनवाड़ी सेंटर के लिए एक पक्की जगह.
केंद्रपाड़ा से BJP सांसद बैजयंत पांडा ने भी 15 फरवरी को आंगनवाड़ी का दौरा किया. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा,
“आज नुआगांव आंगनवाड़ी में बच्चों को पौष्टिक खाना मिलते देखकर बहुत खुशी हुई. इसका मैंने कल रिव्यू किया था और लोकल लीडर्स और गांव वालों के साथ बहुत बढ़िया लंच किया था. कम्युनिटी को अपने बच्चों के लिए अच्छी शुरुआत पक्का करने के लिए एक साथ आते देखना बहुत अच्छा लगा.”

रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मिष्ठा सेठी अपनी कम्युनिटी की पहली ग्रेजुएट हैं. वह अपने गांव से इस नौकरी के लिए अप्लाई करने वाली अकेली थी. वह टीचर बनने के लिए पढ़ाई कर रही हैं.
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