ट्रेन लेट हो गई. भारत में ये नई बात थोड़ी है. लेकिन उत्तर प्रदेश के बस्ती में ट्रेन का देरी से आना रेलवे को हमेशा याद रहेगा. ट्रेन की लेटलतीफी से परेशान करोड़ों लोगों में से एक बस्ती की स्टूडेंट रेलवे को लाखों रुपये का ‘फटका’ लगवाकर मानी. इस छात्रा का ट्रेन लेट होने की वजह से एंट्रेंस एग्जाम छूट गया था, जिसके बाद उसने रेलवे को कड़ा सबक सिखाने की ठानी और उसे कोर्ट में घसीट लाई. यहां छात्रा ने ट्रेन की देरी की वजह से परीक्षा छूटने पर रेलवे से 20 लाख रुपये के मुआवजे का दावा कर दिया.
ट्रेन की लेटलतीफी का भाव पता चल गया! छात्रा की परीक्षा छूटी थी, अब रेलवे देगा 9.10 लाख रुपये
छात्रा के पिता एडवोकेट रवि प्रताप सिंह ने कहा कि ट्रेन के लेट होने पर अगर किसी का नुकसान होता है, तो उन्हें कोर्ट का रुख करना चाहिए. आदेश के मुताबिक, अगर रेलवे ने छात्रा को समय पर 9.10 लाख रुपये नहीं दिए, तो पूरी रकम पर 12 फीसदी ब्याज अलग से देना होगा.


इंडिया टुडे से जुड़े संतोष सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, बस्ती के ‘जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग’ ने छात्रा के आरोपों को सही पाया. इसके बाद आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि वह छात्रा को 9.10 लाख रुपये का मुआवजा दे. ये मामला 2018 का है. बस्ती कोतवाली थाना क्षेत्र के पिकौरा बक्स मोहल्ले की रहने वाली छात्रा समृद्धि B.Sc बायोटेक के एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी कर रही थी. परीक्षा का सेंटर लखनऊ का जयनारायण पीजी कॉलेज अलॉट हुआ.
परीक्षा देने के लिए छात्रा ने बस्ती से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट लिया, जिसमें लखनऊ पहुंचने का समय 11:00 बजे निर्धारित था. लेकिन लेटलतीफी की चलते ट्रेन निर्धारित समय से ढाई घंटे लेट पहुंची जबकि छात्रा को परीक्षा केंद्र पर 12:30 बजे ही पहुंचना था. इसकी वजह से उसका पेपर छूट गया. आहत छात्रा ने मामले को उपभोक्ता आयोग में उठाया और उनके वकील ने रेलवे पर कुल 20 लाख रुपये का दावा दाखिल किया. जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने दोनों पक्षों को सुना.

सुनने के बाद आयोग ने रेलवे पर कुल 9.10 लाख रुपये का जुर्माना ठोका. इसके साथ ही आयोग ने यह भी आदेश दिया कि अगर हर्जाना राशि देने में भी रेलवे विभाग देरी करता है तो उसे भुगतान राशि का 12 फीसदी ब्याज तौर पर अलग से उपभोक्ता (समृद्धि) को देना होगा. समृद्धि के पिता एडवोकेट रवि प्रताप सिंह ने भी कहा कि ट्रेन के लेट होने पर अगर किसी का नुकसान होता है तो उन्हें कोर्ट का रुख करना चाहिए. उन्होंने कहा,
हिंदुस्तान में किसी भी बेटा-बेटी या अन्य के साथ ऐसा कुछ होता है तो न्यायालय की शरण में जाएं. निश्चित ही उन्हें न्याय मिलेगा."
समृद्धि के वकील प्रभाकर मिश्रा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया,
समृद्धि 7 मई 2018 को B.Sc बायोटेक की प्रवेश परीक्षा देने लखनऊ गई थी लेकिन ट्रेन की लेटलतीफी के चलते वह परीक्षा देने से वंचित हो गईं और उनका पूरा साल बर्बाद हो गया. इस पर जिला उपभोक्ता आयोग में मैंने एक वाद दायर किया था. मामले में रेलवे मंत्रालय, महाप्रबंधक रेलवे और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस भेजा गया, लेकिन कोई उत्तर न मिलने पर 11 सितंबर 2018 को अदालत में मुकदमा दायर किया.
उन्होंने आगे बताया,
7 साल से ज्यादा समय तक मामला चला. आयोग ने दोनों पक्षों को सुना और रेलवे ने ट्रेन के लेट होने को स्वीकार किया, लेकिन लेट होने का कारण स्पष्ट नहीं किया. इस पर कोर्ट ने जुर्माना लगाते हुए रेलवे को 45 दिन के भीतर 9.10 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है.
उन्होंने बताया कि आयोग के आदेश के मुताबिक, रेलवे विभाग ने समय पूरा पैसा नहीं दिया तो 12 फीसदी ब्याज भी देना होगा. यह आदेश 17 जनवरी को दिया गया था, जिसकी जानकारी अब सामने आई है.
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