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ASI के कंट्रोल में है औरंगजेब की कब्र, चाहकर भी हटा नहीं सकते देवेंद्र फडणवीस, क्या कहता है कानून

महाराष्ट्र में औरंगजेब (Aurangzeb) की कब्र को हटाने की मांग करते हुए हिंदुत्ववादी संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. सूबे के सीएम Devendra Fadnavis ने इसे लेकर कहा है कि कानून कब्र हटाने की इजाजत नहीं देता.

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औरंगजेब की कब्र

महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb Tomb) को लेकर माहौल गरमाया हुआ है. विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और भाजपा (BJP) के कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र को हटा दिया जाए. इसके लिए प्रदर्शन भी हुए और बीते दिनों नागपुर में भड़की हिंसा में कई लोग घायल हो गए.

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औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग करने वालों में सिर्फ सामान्य कार्यकर्ता ही नहीं हैं, बल्कि भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना के कई विधायकों ने भी यह मांग की है कि 'अत्याचारी' औरंगजेब की कब्र को तोड़ दिया जाए. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या महाराष्ट्र सरकार ऐसा कर सकती है? सीएम फडणवीस ने साफ कहा है कि चाहकर भी वह औरंगजेब की कब्र को हटा नहीं सकते.

औरंगजेब की कब्र क्यों नहीं हट सकती?

महाराष्ट्र के खुल्दाबाद में स्थित छठे मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र भारत की ऐतिहासिक विरासत है. इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संरक्षण प्राप्त है. ASI के कानून के अनुसार, कोई भी प्राचीन स्मारक या संरचना जो कम से कम 100 वर्षों से मौजूद हो, उसे पुरातत्वीय स्थल या संरक्षित स्मारक माना जाता है. औरंगजेब की कब्र 1707 से खुल्दाबाद में मौजूद है. इस आधार पर केंद्र सरकार ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया है.

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संरक्षित स्मारक कानून क्या कहता है?

प्राचीन स्मारक, पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम (AMASR एक्ट), 1958 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण को नियंत्रित करता है. इन स्थलों में प्रागैतिहासिक काल (यह मानव इतिहास का वह भाग है जो लिखित इतिहास से पहले का है.) के स्थल, चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, जटिल मूर्तियां-शिलालेख, बौद्ध स्मारक आदि शामिल हैं.

इसके अलावा, दुर्लभ स्थापत्य शैलियों वाले कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे मंदिर, 100 साल से भी पुराने मस्जिद और मकबरे, राजसी किले-महल भी संरक्षित विरासत की सूची में आते हैं. औरंगजेब के मकबरे को ASI द्वारा संरक्षित स्मारक के रूप में कब मान्यता दी गई, इसकी कोई सटीक तारीख ज्ञात नहीं है. हालांकि, यह 300 साल से अधिक पुराना है, इसलिए यह ASI द्वारा संरक्षित विरासत के दायरे में आता है.

यह भी पढ़ेंः नागपुर हिंसा के सबसे अहम किरदार ‘औरंगजेब की कब्र’ की कहानी

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महाराष्ट्र सरकार हटा सकती है कब्र?

हाल ही में हिंदुत्ववादी नेताओं ने खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र को हटाने की पुरजोर मांग की थी. लेकिन महाराष्ट्र सरकार के पास ASI संरक्षित स्मारकों को हटाने का अधिकार नहीं है.

AMASR एक्ट के तहत, किसी भी स्मारक को सूची से हटाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होता है. केवल केंद्र सरकार ही इसे हटाने या बनाए रखने का निर्णय ले सकती है. वहीं, राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि वह केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय धरोहर घोषित स्मारकों की देखभाल करे.

अगर कोई इन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है या हटाने/बदलाव का प्रयास करता है, तो राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह स्मारक का संरक्षण करे. यही कारण है कि देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी सरकार को औरंगजेब की कब्र की देखभाल करनी पड़ रही है.
 

क्यों उठा विवाद

हाल ही में रिलीज हुई विकी कौशल की फिल्म 'छावा' के बाद छत्रपति शिवाजी और उनके बेटे संभाजी के समर्थकों में औरंगजेब-विरोधी भावना बढ़ी. इस बीच, समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने औरंगजेब की तारीफ में बयान दिया, जो कई लोगों को नागवार गुजरा.

हालांकि, अबू आजमी ने बाद में माफी मांग ली, लेकिन खुल्दाबाद में औरंगजेब की कब्र को हटाने का मुद्दा तूल पकड़ गया.

ASI क्या है?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना 1861 में ब्रिटिश सेना के इंजीनियर अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी. उन्हें ‘फादर ऑफ इंडियन आर्कियोलॉजी’ भी कहा जाता है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत में राष्ट्रीय धरोहरों के संरक्षण की देखरेख करता है. वर्तमान में ASI के पास राष्ट्रीय महत्व के 3,693 से अधिक संरक्षित स्मारक और पुरातात्विक स्थल हैं.

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