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'सर तन से जुदा' और 'जय श्री राम' बराबर नहीं... HC ने तौकीर रजा की जमानत क्यों खारिज की?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दर्ज किया कि मौलाना तौकीर रजा खान बरेली में हुई घटना की जगह पर मौजूद नहीं थे. उन्हें सह-आरोपी फरहत अली के घर में रखा गया था. तौकीर रजा के खिलाफ आरोपों पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने खास तौर पर 'सर तन से जुदा' नारे के नेचर पर ध्यान दिया.

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तौकरी रजा खान (बाएं) बरेली हिंसा मामले में मुख्य आरोपी है. (PTI)

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  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि 'सर तन से जुदा' नारा कानून के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला है।
  • यह आदेश 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा के संदर्भ में जारी किया गया, जहां पुलिस ने BNSS की धारा 163 लागू की थी लेकिन भीड़ ने नियमों का उल्लंघन करते हुए हिंसा की।
  • कोर्ट के फैसले के बाद तौकीर रजा खान की जमानत नहीं मिली, जिससे उनके खिलाफ मामले की आगामी सुनवाई और जांच जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है।
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पंकज श्रीवास्तव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बरेली हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने 7 सितंबर के आदेश में कहा, 'गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा' जैसे नारे की तुलना 'नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु-अकबर', 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल', 'जय श्री राम' या 'हर-हर महादेव' जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती.

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इंडिया टुडे से जुड़े पंकज श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने कहा कि ऊपर बताए धार्मिक नारे ईश्वर या गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हैं, जबकि 'सर तन से जुदा' जैसा नारा कानून के शासन, भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाला है. अदालत ने कहा कि ऐसा नारा लोगों को हिंसक विद्रोह और हथियार उठाने के लिए उकसाता है, जो कानून के तहत दंडनीय अपराध है.

क्या है पूरा मामला?

मामला 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है. लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों से, उनके खिलाफ कथित अत्याचारों और फर्जी केस के खिलाफ बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में इकट्ठा होने की अपील की गई.

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जब बरेली में भड़की हिंसा

ये देख पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी. माने, पांच या उससे ज्यादा लोग सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा नहीं हो सकते. इसके बावजूद आरोप है कि 200-250 लोग इस्लामिया कॉलेज के मैदान की तरफ बढ़ने लगे. पुलिस ने रोका तो भीड़ ने कथित तौर पर 'सर तन से जुदा' का नारा लगाया, पत्थरबाजी की, पेट्रोल बम यूज किया, और पुलिस पर हमला किया.

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2025 में बरेली में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया. (PTI)
तौकीर रजा की सफाई

इससे कई पुलिसवालों को चोटें आईं, और पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा. इस हिंसा के लिए मौलाना तौकीर रजा खान को मुख्य आरोपी बनाया गया. तौकीर रजा ने हाई कोर्ट को बताया कि वो तो भीड़ में शामिल ही नहीं थे. ना ही उन्होंने लोगों को इकट्ठा किया.

तौकीर रजा खान ने कहा कि उन्हें तो खुद 26 सितंबर 2025 को सुबह 10 बजे हाउस अरेस्ट कर लिया गया था. दलील दी कि उन्होंने ना तो कोई भाषण दिया, और ना ही हिंसा भड़काने या शहर की शांति में खलल डालने की अपील की. हाई कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि तौकीर रजा घटना की जगह पर मौजूद नहीं थे. उन्हें सह-आरोपी फरहत अली के घर में रखा गया था.

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हालांकि, कोर्ट ने नोट किया कि तौकीर रजा खान ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से शुक्रवार यानी जुमे की नमाज के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज में इकट्ठा होकर सरकारी कार्रवाई का विरोध करने और बरेली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के जरिए भारत के राष्ट्रपति को एक ज्ञापन देने के लिए कहा था.

तौकीर रजा के खिलाफ आरोपों पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने खास तौर पर 'सर तन से जुदा' नारे के नेचर पर ध्यान दिया. कोर्ट ने कहा कि इसकी तुलना धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती. कोर्ट ने इस नारे को भारत की संप्रभुता, एकता और अंडता के खिलाफ पाया.

तौकीर रजा का दावा था कि इजाजत ना मिलने और BNSS की धारा 163 लागू होने के बाद बुलावा रद्द कर दिया गया था. लेकिन, कोर्ट ने पाया कि फिर भी मुस्लिम समुदाय के लोग इस्लामिया ग्राउंड की ओर मार्च करते हुए गए.

जमानत याचिका खारिज

कोर्ट ने यह भी देखा कि घटना के बाद तौकीर रजा खान के रवैये को सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने अपने बुलावे पर रिएक्ट करने के लिए लोगों का शुक्रिया अदा किया और उनके काम की तारीफ की थी. नतीजतन, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसे नारों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, जो कानून-व्यवस्था को चुनौती दें या हिंसा के लिए उकसाने का जरिया बनें. इसी आधार पर अदालत ने मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी.

वीडियो: 'वहां हमारी कोई गलती नहीं'... खुद पर लगे आरोपों पर क्या-क्या बोले मौलाना तौकीर रजा?

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