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जस्टिस हेमा कमेटी से जुड़े यौन शोषण के सभी मामले वापस लिए गए, किसी पीड़ित ने बयान नहीं दिया

जस्टिस नांबियार ने स्पष्ट किया कि किसी को भी बयान देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

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जस्टिस हेमा कमेटी का गठन केरल सरकार ने 2017 में 'वुमन इन सिनेमा कलेक्टिव' की याचिका के बाद किया था. (फोटो- PTI)

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न की घटनाओं की जांच से जुड़े मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. राज्य सरकार ने 25 जून को केरल हाई कोर्ट को सूचित किया कि इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न की घटनाओं की जांच के लिए गठित SIT ने जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट (Hema Committee report) से जुड़े सभी 35 मामलों को वापस ले लिया है. बताया गया कि इन मामलों में शामिल पीड़ितों में से कोई भी बयान देने के लिए आगे नहीं आया.

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पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान की गई थी

बार एंड बेंच में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केरल हाई कोर्ट में जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस सीएस सुधा की स्पेशल बेंच को राज्य सरकार ने बताया कि पीड़ितों ने बयान देने में सहयोग नहीं किया. जिसके कारण इन मामलों में आगे की कार्रवाई संभव नहीं हो सकी. केरल के महाधिवक्ता गोपालकृष्ण कुरूप ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान की गई थी. लेकिन जस्टिस नांबियार ने स्पष्ट किया कि किसी को भी बयान देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

इसके साथ ही, कोर्ट ने ये भी उल्लेख किया कि केरल सरकार ने अगस्त 2025 के पहले सप्ताह में एक फिल्म कॉन्क्लेव आयोजित करने का निर्णय लिया है. इसमें फिल्म नीति और उद्योग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी. कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की है. उसने ये भी निर्देश दिया कि यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के लिए गठित SIT की नोडल एजेंसी का संचालन जारी रहेगा. और मौजूदा दिशा-निर्देश तब तक लागू रहेंगे जब तक कि नया कानून लागू नहीं हो जाता.

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2017 में बनी थी कमेटी

बता दें कि जस्टिस हेमा कमेटी का गठन केरल सरकार ने 2017 में 'वुमन इन सिनेमा कलेक्टिव' की याचिका के बाद किया था. जिसका उद्देश्य मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के सामने आने वाली समस्याओं का अध्ययन करना था. इस समिति ने अगस्त 2024 में अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की. जिसमें इंडस्ट्री में व्यापक यौन उत्पीड़न और लैंगिक असमानता के गंभीर मुद्दों का खुलासा हुआ.

इस रिपोर्ट के आधार पर 35 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे. जिनमें कई प्रसिद्ध हस्तियों, जैसे अभिनेता मुकेश, सिद्धिक, जयसूर्या, एडवेला बाबू, नितिन पॉली, मणियन पिल्लई राजू, निर्देशक रंजीत, वीके प्रकाश और प्रोडक्शन कार्यकारी विचु और नोबल के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी.

रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद मलयालम फिल्म उद्योग में कई महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे. जिसके परिणामस्वरूप मलयालम फिल्म आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (AMMA) के अध्यक्ष मोहनलाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, कई मामलों में सबूतों की कमी और पीड़ितों के सहयोग न करने के कारण जांच को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया.

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