एयर इंडिया की एक स्कीम है 'महाराजा स्कॉलर स्कीम'. इसके तहत, विदेश जाने या वहां से आने वाले छात्रों को फ्लाइट में आम यात्रियों से ज्यादा सामान ले जाने की सुविधा दी जाती थी. कुछ साल पहले एयरलाइन ने जयपुर की एक स्टूडेंट को ये सुविधा देने से इनकार कर दिया. छात्रा को लगा कि ये गलत है, उसने आपत्ति दर्ज कराई. अब एयर इंडिया को उसे मुआवजा देना है. जितने पैसे एक्स्ट्रा लिए थे उसके लगभग दोगुना. लेकिन, छात्रा के लिए ये इतना आसान नहीं था. इसके लिए उसे कई सालों की लड़ाई लड़नी पड़ी.
एयर इंडिया ने छूट के बावजूद एक्स्ट्रा बैगेज के ₹34,000 वसूले, छात्रा ने 78,000 वसूले
लंदन से घर लौट रही जयपुर की छात्रा से एयर इंडिया ने एक्स्ट्रा बैगेज के लिए ₹34,131 चार्ज किए. अब करीब 5 साल मुआवजा देने का आदेश मिला है.


स्टूडेंट का नाम लावण्या मैगन है. वो यूनाइटेड किंगडम में पढ़ाई कर रही थीं. साल 21 जुलाई 2021 को लंदन से भारत वापस आ रही थीं. उन्होंने एयर इंडिया की फ्लाइट AI-162 में टिकट बुक कराई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जब उन्होंने फ्लाइट के लिए चेक-इन किया तो एयर इंडिया ने उन्हें स्टूडेंट बैगेज स्कीम के तहत छूट नहीं दी और एक्स्ट्रा बैगेज के लिए उनसे 350 ब्रिटिश पाउंड वसूल किए. जो भारत में लगभग 34,131 रुपयों के बराबर है.
लावण्या को लगा कि उनसे गलत तरीके से पैसे लिए गए हैं, इसलिए उन्होंने तुरंत एयर इंडिया से रिफंड की मांग की. पहले तो एयरलाइन ने किसी भी तरह के रिफंड से इनकार कर दिया. तर्क दिया कि ये केस 'महाराजा स्कॉलर स्कीम' की शर्तों पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि उनके कोर्स की अवधि और कोर्स पूरा करने की तारीख स्कीम के नियमों के मुताबिक नहीं है.
हालांकि, लावण्या ने इस दावे का विरोध किया. उनका कहना था कि उन्होंने एक विशेष शैक्षणिक व्यवस्था (special academic arrangement) के तहत पढ़ाई की थी, जिसमें चार साल का कोर्स तीन साल में पूरा करने की अनुमति थी. लावण्या ने ये भी साफ किया कि वो पढ़ाई पूरी करके घर जा रही हैं, ये टेंपरेरी यात्रा नहीं है. इसके बावजूद एयरलाइन ने उन्हें रिफंड नहीं दिया. हालांकि, कई दौर की बातचीत के बाद में एयर इंडिया ने मान लिया कि लावण्या बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के ही एक्स्ट्रा बैगेज ले जा सकती थीं.
26 सितंबर 2021, को इस बात पर एयर इंडिया ने सहमति बनाई और दो दिन बाद लावण्या से उनके क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स के साथ कई जानकारिया मांगीं, ताकि पेमेंट किया जा सके. लेकिन रिफंड की रकम लावण्या को नहीं मिली.
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रिफंड न मिलने पर लावण्या को उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा. फरवरी 2024 में जिला उपभोक्ता आयोग ने एयर इंडिया को 34,131 रुपये लौटाने का आदेश दिया. साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 4,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 3,000 रुपये देने का आदेश दिया.
हालांकि, लावण्या को ये मुआवजा वाजिब नहीं लगा. उन्होंने इस राशि को कम बताते हुए राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की. 29 मई 2026 को न्यायिक सदस्य मुकेश और दिनेश कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई की. आयोग ने माना कि एयर इंडिया ने खुद भी स्वीकार किया था कि छात्रा स्कीम का लाभ पाने की हकदार थी, फिर भी रिफंड नहीं दिया गया. इससे उसे बेवजह मानसिक तनाव झेलना पड़ा और कई साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.
इस आधार पर राज्य आयोग ने मानसिक पीड़ा का मुआवजा 4,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये और कानूनी खर्च 3,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया. इसके अलावा, ₹34,131 के रिफंड का आदेश बरकरार रखा.
तो इस तरह अब एयर इंडिया को ₹34,131 एक्स्ट्रा लेने के बदले ₹74,131 देने होंगे.
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