पश्चिम बंगाल में जब से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC यानी TMC) की हार हुई है, तब से सबसे ज्यादा गुस्सा इस पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ देखा जा रहा है. उन पर अंडे और पत्थर फेंके गए. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने कहा कि यह पब्लिक का गुस्सा है. यही गुस्सा TMC की सबसे बड़ी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ नजर नहीं आ रहा है. क्या वजह है कि चुनावी हार के बाद गुस्से और नाराजगी का दंश ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को ही झेलना पड़ रहा है?
बंगाल में अभिषेक पर फूट रहा गुस्सा, ममता बनर्जी पर नहीं! वजह जान लीजिए
अभिषेक बनर्जी हिंसा प्रभावित TMC कार्यकर्ताओं के घर जा रहे थे. रास्ते में उन पर अंडे और पत्थर फेंके गए. TMC ने BJP पर अभिषेक पर हमला करने का आरोप लगाया. BJP ने इसे आम जनता का गुस्सा करार दिया.


2026 के विधानसभा चुनाव में TMC को BJP के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा. 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता की पार्टी को केवल 80 सीटें मिलीं. 208 सीटें जीतकर BJP के शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन गए. चुनावी नतीजों के तुरंत बाद बंगाल में हिंसा भड़की. जगह-जगह TMC के कार्यकर्ताओं और कार्यालयों पर हमले की खबरें आईं.
अभिषेक बनर्जी पर हमलाशनिवार, 30 मई को अभिषेक बनर्जी भी हिंसा प्रभावित TMC कार्यकर्ताओं के घर जा रहे थे. रास्ते में उन पर अंडे और पत्थर फेंके गए. इसके फोटो-वीडियो भी सामने आए. TMC ने BJP पर अभिषेक पर हमला करने का आरोप लगाया. BJP ने इसे आम जनता का गुस्सा करार दिया, जैसा TMC के राज में BJP नेताओं के खिलाफ हमला होने पर TMC का रुख रहता था.
भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी के हाथों हारने के बावजूद ममता बनर्जी को ऐसे भयावह हालात का सामना नहीं करना पड़ रहा है. लोग उन्हें अभी भी एक संघर्ष करने वाली नेता मानते हैं. उन्होंने अपने दमखम पर तीन दशक से ज्यादा समय तक सत्ता पर काबिज करने वाले वाम मोर्चा की सरकार को उखाड़े फेंका था. ममता ने लड़-लड़कर अपनी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया.
ममता का खुद्दारी भरा अंदाज और सादगी से भरपूर रहन-सहन खुले तौर पर पूरी राजनीतिक जिंदगी को दिखाता है. कोई बात छिपी नहीं है. दूसरी तरफ, अभिषेक बनर्जी का अंदाज एकदम जुदा माना जाता है. ममता के सादे घर के उलट हरीश मुखर्जी रोड पर अभिषेक का चार मंजिला घर लोगों की नजरों में अमीरी छोड़ता है. अभिषेक के बड़े-बड़े काफिले कोलकाता की सड़कों पर पावर का एपिसेंटर दिखाते थे.
अभिषेक को बढ़ावा, सीनियर नेता किनारे लगेअभिषेक बनर्जी TMC के संघर्ष के दिनों में पार्टी में नहीं थे. 2011 में जब TMC की सरकार बनी, तब अभिषेक की पार्टी में एंट्री हुई. अब नए और पुराने नेताओं के दरमियान रस्साकशी शुरू हो गई. TMC के यूथ मार्चा के अध्यक्ष शुभेंदु अधिकारी और अभिषेक बनर्जी के बीच तकरार बढ़ी.
बुआ ममता भतीजे अभिषेक के पक्ष में झुकीं. उन्होंने शुभेंदु को हटाकर अभिषेक को यूथ मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया. पार्टी के सीनियर नेताओं को पार्टी में किनारे करने की शुरुआत हो गई. इंडिया टुडे से जुड़े शौनक सान्याल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक टीएमसी विधायक ने कहा कि अभिषेक की सत्ता का घमंड और खुला परिवारवाद पार्टी को बर्बाद कर गया.
ममता अपने तक तो संघर्षशील ममता ही रहीं, लेकिन उन पर भतीजे को लेकर और पार्टी में चल रही गड़बड़ियों पर आंख मूंदने के आरोप जरूर लगे. मुकुल रॉय और शुभेंदु अधिकारी जैसे दिग्गज TMC नेता पार्टी छोड़कर BJP में शामिल हो गए. TMC का संगठनात्मक ढांचा कमजोर हुआ. मुकुल रॉय बाद में TMC में वापस आ गए, लेकिन पार्टी को अंदरूनी तौर पर नुकसान होता रहा.
I-PAC और भ्रष्टाचारTMC के सीनियर लीडर्स अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाते हैं कि विधानसभा चुनाव के दौरान अभिषेक ने एक तरह से TMC को चुनावी रणनीतिकार एजेंसी I-PAC को सौंप दिया. इसने पार्टी का जनता से जमीनी जुड़ाव खत्म कर दिया. टिकट बंटवारे में I-PAC का दखल बढ़ा. टिकट के लिए घूस के आरोप भी लगे. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि I-PAC ने संगठन पर कब्जा कर लिया और पार्टी को नुकसान पहुंचाया.
भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी अभिषेक बनर्जी को खूब घेरा. इनमें शिक्षक भर्ती घोटाला और कोयला तस्करी से जुड़े मामले शामिल हैं. अभिषेक और उनके नजदीकी लोगों पर कटमनी वसूलने के भी आरोप लगते हैं. माने, कोई भी काम हो, उसमें TMC नेताओं का कथित कमीशन. जैसे कोई सामान खरीदना है, तो कथित तौर पर TMC नेता के कहे सेलर से ही खरीदना है.
हालांकि, अभिषेक बनर्जी इन आरोपों से इनकार करते हैं. उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है. लेकिन, इन सभी हालातों की वजह से उनके सबसे मजबूत गढ़ डायमंड हार्बर में भी कमल खिल गया. डायमंड हार्बर की फलता सीट पर कथित चुनावी धांधली के बाद रीपोल हुआ.
अभिषेक के बेहद करीबी जहांगीर खान यहां से TMC उम्मीदवार थे. जहांगीर बिना लड़े ही चुनावी रेस से पीछे हट गए. फलता से BJP के देबांग्शु पांडा ने बंपर जीत हासिल की. इसे अपने ही गढ़ में अभिषेक की बड़ी कमजोरी माना गया.
आखिर गुस्सा अभिषेक पर ही क्यों?ममता बनर्जी को लोग TMC की संस्थापक और संघर्ष करने वाली नेता मानते हैं. वहीं अभिषेक बनर्जी को सत्ता, परिवारवाद, संगठन की कमजोरियों और भ्रष्टाचार के आरोपों का सिंबल माना जा रहा है. यही वजह है कि चुनावी हार के बाद सबसे ज्यादा सवाल और गुस्सा अभिषेक बनर्जी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. ममता बनर्जी इससे परे नजर आ रही हैं.
वीडियो: ममता बनर्जी ने बुलाई बैठक, 60 TMC विधायक नहीं पहुंचे






















