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शरीर में इस मिनरल की कमी से हाथ-पैर सुन्न, अचानक लकवा मार जाता है, ये लक्षण इग्नोर न करें

डॉक्टर से जानेंगे कि हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस क्या है. ये क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. और हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस का इलाज कैसे किया जाता है. इसमें कुछ समय के लिए मांसपेशियां अचानक काम करना बंद कर देती हैं. इससे व्यक्ति को पैरालिसिस जैसा महसूस होता है.

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हाथ-पैरों में सुन्नपन को हल्के में न लें

रवि 23 साल के हैं. यूपी में रहते हैं. कुछ दिनों पहले वो अपने कॉलेज में थे. कैंटीन में दोस्तों संग बैठे थे. तभी अचानक उनके हाथ-पैर कमज़ोर पड़ने लगे. वो कुर्सी से खड़े नहीं हो पा रहे थे. न ही अपने हाथ हिला पा रहे थे. ऐसा लग रहा था, जैसे उन्हें लकवा मार गया हो. घबराए दोस्त रवि को तुरंत हॉस्पिटल ले गए. वहां पता चला कि रवि के शरीर में पोटैशियम बहुत कम है. डॉक्टर ने कुछ और जांचें की, तो पता चला कि रवि को एक रेयर जेनेटिक कंडीशन है, जिसका नाम है ‘हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस’. इसमें कुछ समय के लिए मांसपेशियां अचानक काम करना बंद कर देती हैं. इससे व्यक्ति को पैरालिसिस जैसा महसूस होता है.

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आज हम इसी रेयर कंडीशन पर बात करेंगे. डॉक्टर से जानेंगे कि हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस क्या है. ये क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. और हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस का इलाज कैसे किया जाता है. 

हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस क्या है?

ये हमें बताया डॉक्टर साइमन थॉमस ने. 

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डॉ. साइमन थॉमस, सीनियर डायरेक्टर, रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट्स एंड ऑर्थोपेडिक्स, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमारबाग

इसके बारे में जानने से पहले पोटैशियम के बारे में समझना ज़रूरी है. पोटैशियम एक ज़रूरी मिनरल है, जो फलों और खाने की कई चीज़ों में मिलता है. ये मांसपेशियों के लचीलेपन और मूवमेंट के लिए बहुत ज़रूरी है. अगर शरीर में पोटैशियम कम हो जाए, तो मांसपेशियां अचानक कमज़ोर पड़ जाती हैं और ठीक से काम नहीं कर पातीं. ऐसे में मरीज़ को लगता है, जैसे उसे पैरालिसिस (लकवा) हो गया हो. यानी मरीज़ के हाथ-पैर ढीले पड़ जाते हैं और मूवमेंट रुक जाती है. ये दिक्कत कभी-कभार होती है, हमेशा नहीं होती.

हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस के कारण और लक्षण

कुछ लोगों में ये समस्या जन्म से ही होती है. उनका शरीर पोटैशियम को सही तरीके से इस्तेमाल या कंट्रोल नहीं कर पाता. इस वजह से उनके शरीर से पोटैशियम एकदम कम हो जाता है. जिन लोगों को हाइपरथायरॉयडिज़्म होता है. यानी जिनके शरीर में थायरॉइड से जुड़े हॉर्मोन ज़्यादा बनते हैं. उनमें भी हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस हो सकता है. वहीं, डायबिटीज़ के जो मरीज़ इंसुलिन लेते हैं. अगर उन्हें शुगर कंट्रोल करने के लिए हाई डोज़ में इंसुलिन दी जाए. तब उनके शरीर का पोटैशियम खून से निकलकर सेल्स के अंदर चला जाता है. इससे खून में पोटैशियम की मात्रा कम हो जाती है. फिर मरीज को अचानक पैरालिसिस जैसा महसूस होता है. 

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बहुत हेवी एक्सरसाइज़ करने के बाद  भीशरीर में पोटैशियम कम हो सकता है 

बहुत ज़्यादा हेवी एक्सरसाइज़ करने के बाद भी शरीर में पोटैशियम कम हो सकता है. एल्कोहल लेने के बाद भी शरीर में पोटैशियम अचानक कम हो सकता है. जिससे हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस ट्रिगर हो सकता है. ऐसे में अच्छा-खासा चलता हुए एक व्यक्ति एकदम से बिस्तर पर आ जाता है. उसके हाथ-पैर काम करना बंद कर देते हैं. इससे आसपास के लोग घबरा जाते हैं कि अचानक क्या हुआ. अगर ऐसे लक्षण बार-बार दिखें, तो हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस हो सकता है.

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लेकिन ये सबको होने वाली आम बीमारी नहीं है. अगर आपके आसपास या आपका शरीर कभी अचानक से काम करना बंद करने लगे. हाथ-पैर चलना बंद होने लगें, तब आपको हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस हो सकता है. ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से मिलना चाहिए. सही समय पर जांच और इलाज से ये बीमारी पूरी तरह ठीक की जा सकती है.

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हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस का शक होने पर डॉक्टर सबसे पहले ECG करते हैं 

हाइपोकैलेमिक पीरियॉडिक पैरालिसिस का इलाज

अगर आपको इस बीमारी का शक है, तो सबसे पहले डॉक्टर से मिलें. ये ऐसी कंडीशन है, जिसमें मेडिकल हेल्प ज़रूरी होती है. डॉक्टर सबसे पहले ECG करते हैं. ये देखने के लिए कि पोटैशियम कम होने से दिल पर कोई असर तो नहीं पड़ा. इसके बाद खून में पोटैशियम की मात्रा चेक की जाती है. अगर पोटैशियम कम होता है तो इसे खाने या IV (इंजेक्शन) के ज़रिए दिया जाता है. ऐसा करने से पैरालिसिस की समस्या ठीक हो जाती है और मरीज़ तुरंत ठीक हो जाता है.

इस जेनेटिक कंडीशन में कमज़ोरी हमेशा के लिए नहीं होती. बल्कि अचानक आती है और इलाज के बाद मरीज़ फिर से पूरी तरह ठीक हो जाता है. इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन लक्षणों को इग्नोर न करें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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