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यूपी के इस शख्स ने कराई खुद की तेरहवीं, 1900 लोगों को न्योता दिया, वजह दुखी कर देगी!

UP के औरेया के रहने वाले राकेश यादव अपनी तेरहवीं करा रहे हैं. गांव देहात के करीब 1900 लोगों को न्योता भेजा है. बाकायदा कार्ड छपवाए हैं.

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सोशल मीडिया पर अब यह निमंत्रण पत्र वायरल हो रहा है. (फोटो: ITG)
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सूर्य प्रकाश शर्मा

अकेले मर जाने का डर जानते हैं? एक ऐसी परिस्थिति जिसमें मरते वक्त आपके पास अपना कोई न हो. आप मृत्युशय्या पर लेटे हैं. एक तन्हाई आपके सिरहाने बैठी है. एक मलाल है कि पूरे जीवन में एक रिश्ता ऐसा नहीं बना पाया कि आखिरी दिनों में कोई पूछने वाला भी हो. साइंस की भाषा में इस डर को ‘मोनैटोफोबिया’ कहते हैं. उत्तर प्रदेश के रहने वाले राकेश यादव (65) साइंस की भाषा तो नहीं जानते, लेकिन डर जानते हैं. और इसी डर की वजह से उन्होंने जीते-जी अपनी तेरहवीं का आयोजन किया है.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, औरेया के लक्ष्मणपुर गांव के रहने वाले राकेश यादव अपनी तेरहवीं करा रहे हैं. गांव देहात के करीब 1900 लोगों को न्योता भेजा है. उन्होंने अपनी तेरहवीं के लिए बाकायदा कार्ड छपवाए हैं. कार्ड पर लिखा है,

“हमें जिंदा भंडारा कराने का सौभाग्य मिला है. हम अकेले हैं. हमारा कोई नहीं है.”

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सोशल मीडिया पर अब यह निमंत्रण पत्र वायरल हो रहा है. (फोटो: ITG)

राकेश के जीवन में कोई नहीं है. दो छोटे भाई थे. एक की मौत बीमारी से हो गई और एक की हत्या कर दी गई. शादी कभी की नहीं. परिवार में आई इन त्रासदियों के बाद राकेश बिल्कुल अकेले रह गए. उनके निधन के बाद कोई रीति-रिवाज निभाने वाला नहीं बचेगा, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया. पूरे गांव में इस भंडारे की खूब चर्चा हो रही है.

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उनका कहना है कि मरने के बाद पता नहीं कोई भंडारा करे या न करे, इसलिए वह अपने हाथों से सबको भोज कराना चाहते हैं. सोशल मीडिया पर अब यह निमंत्रण पत्र वायरल हो रहा है. राकेश यादव ने अपना पैतृक मकान एक रिश्तेदार को दान कर दिया है और खुद एक साधारण झोपड़ी में रहते हैं. 30 मार्च को आयोजित हो रहे इस भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है. गांव के लोग इसे राकेश के अकेलेपन और उनके जीवन के संघर्ष से जोड़कर देख रहे हैं.

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