बदहज़मी हो. खूब गैस बने. गैस पास हो. या फिर हो एसिडिटी. पेट से जुड़ी चाहे कोई भी दिक्कत हो, हमारा काम करना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि तब ध्यान काम पर कम और पेट पर ज़्यादा होता है.
सुबह-सुबह गुनगुने पानी में ये डालकर पिया तो सुधर जाएगी गट हेल्थ!
जब गट हेल्थ खराब होती है, तब दिमाग टेंशन में आ जाता है. कुछ खाने-पीने का मन नहीं करता. ठीक से नींद नहीं आती. इम्यूनिटी भी कमज़ोर हो जाती है.


पेट की सेहत बिगड़ने पर दिमाग टेंशन में आ जाता है. स्ट्रेस होने लगता है. कुछ खाने-पीने का मन नहीं करता. एक्सरसाइज़ नहीं हो पाती. ठीक से नींद नहीं आती. इम्यूनिटी भी कमज़ोर हो जाती है. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि पेट यानी गट की हेल्थ ठीक रहे. कैसा होगा ये, यही बताएंगे आज. डॉक्टर से जानेंगे कि गट हेल्थ इतनी ज़रूरी क्यों है. गट हेल्थ ख़राब होने के लक्षण क्या हैं. और गट हेल्थ सुधारने के लिए क्या खाएं-पिएं.
गट हेल्थ क्या है?ये हमें बताया डॉक्टर रॉय पाटणकर ने.

हमारी आंतों में लाखों-करोड़ों बैक्टीरिया और फंगस रहते हैं. ये बैक्टीरिया पैदा होने से लेकर बड़े होने तक बढ़ते रहते हैं. आंत में कुछ बैक्टीरिया अच्छे होते हैं और कुछ बुरे. ज़रूरी है कि अच्छे बैक्टीरिया की संख्या ज़्यादा बनी रहे, ताकि बुरे बैक्टीरिया बढ़कर नुकसान न पहुंचाएं. जब अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है, तो इस कंडीशन को डिस्बायोसिस कहते हैं.
ख़राब गट हेल्थ के लक्षण- सबसे आम लक्षण है बदहजमी
- पेट में ज़्यादा गैस बनना और पास होना
- एसिडिटी होना
- वज़न बढ़ना
- डायबिटीज़ कंट्रोल न होना
- पीरियड्स इर्रेगुलर होना

- सिर्फ पेट के लक्षण नहीं, इम्यूनिटी भी गट हेल्थ से जुड़ी होती है
- कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां, जैसे एक्ज़िमा, भी गट हेल्थ से जुड़ी पाई गई हैं
- इसलिए गट बैक्टीरिया को संतुलित रखना बहुत ज़रूरी है
गट हेल्थ सुधारने के लिए क्या खाएं-पिएं?सुबह गुनगुने पानी में नींबू, अदरक और थोड़ा गुड़ मिलाकर ले सकते हैं. अपने खाने में सलाद ज़रूर शामिल करें. फाइबर से भरपूर चीज़ें जैसे गाजर, ककड़ी, केला, पपीता, अदरक और हल्दी अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देती हैं. एंटीबायोटिक दवा या कीमोथेरेपी के बाद गट में गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं. इसलिए उस समय प्रोबायोटिक्स लेना फायदेमंद होता है. दही और छाछ जैसे प्रोबायोटिक फूड्स गट हेल्थ सुधारने में मदद करते हैं.
रोज़ समय पर खाना और 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेना भी बहुत ज़रूरी है. खाने के बाद हल्की वॉक करने की आदत डालें. लेकिन सबसे ज़रूरी है फाइबर युक्त खाना. ये गुड बैक्टीरिया को बनाए रखने और गट हेल्थ सुधारने में मदद करता है. इससे इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी सुधरती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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