22 करोड़. ये उन लोगों की संख्या है, जो देश में हाइपरटेंशन जूझ रहे हैं. हाइपरटेंशन यानी हाई बीपी. इसे साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि ये चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है और इंसान को पता भी नहीं चलता. इसके बावजूद हमारा देश में 30% लोग ऐसे हैं. जिन्होंने कभी अपना बीपी चेक नहीं कराया है और जो कराते हैं, वो बीपी कंट्रोल में नहीं रखते.
हाई ब्लड प्रेशर किडनी को हमेशा के लिए खराब कर देगा, लक्षण और बचाव जानने में है भलाई
डॉक्टर साहब से समझेंगे कि बीपी हाई होने पर किडनी क्यों खराब होने लगती है. ऐसा होने पर कौन-से लक्षण दिखते हैं. और हाई बीपी की वजह से किडनी डैमेज होने से कैसे बचाएं.


वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO के मुताबिक, हाई बीपी से जूझ रहे 22 करोड़ लोगों में से सिर्फ 12% का ही बीपी कंट्रोल में है. अगर आप इन 12% में नहीं आते तो जान लीजिए, ये हाई बीपी आपकी किडनी हमेशा के लिए खराब कर सकता है. क्यों और कैसे, बताएंगे आज. डॉक्टर साहब से समझेंगे कि बीपी हाई होने पर किडनी क्यों खराब होने लगती है. ऐसा होने पर कौन-से लक्षण दिखते हैं. और हाई बीपी की वजह से किडनी डैमेज होने से कैसे बचाएं.
क्या हाई बीपी से किडनी डैमेज हो सकती है?ये हमें बताया डॉक्टर अनुपम रॉय ने.

जब ब्लड प्रेशर बढ़ता है, तो किडनी उसे कंट्रोल करने की कोशिश करती है. इसके लिए किडनी एक्स्ट्रा नमक और पानी को शरीर से बाहर निकालती है. इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद मिलती है. लेकिन अगर बीपी लंबे समय तक बढ़ा रहे. तब किडनी में छोटी-छोटी खून की नलियों को नुकसान पहुंचने लगता है. उनमें बदलाव आने शुरू हो जाते हैं. धीरे-धीरे किडनी के काम करने की क्षमता घटने लगती है. फिर किडनी हाई ब्लड प्रेशर को ठीक से कंट्रोल नहीं कर पाती. इससे एक ख़तरनाक साइकिल बन जाती है. पहले हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचाता है. फिर ख़राब किडनी की वजह से बीपी कंट्रोल करना और मुश्किल हो जाता है.
हाई बीपी की वजह से किडनी डैमेज होने के लक्षणहाई बीपी से किडनी डैमेज होने के लक्षण काफी देर से दिखते हैं. कई बार जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है. इसके लक्षणों में शामिल है-
- शरीर में थोड़ी सूजन आना.
- पेशाब में झाग आना.
- जो बीपी पहले 1-2 दवाइयों से कंट्रोल हो जाता था, अब उसका कंट्रोल होना मुश्किल होने लगता है.
ये संकेत हो सकते हैं कि किडनी की बीमारी शुरू हो रही है या बढ़ रही है. इसलिए समय-समय पर दो आसान-से टेस्ट कराना ज़रूरी है. जैसे यूरिन में प्रोटीन की मात्रा की जांच कराना और खून में क्रिएटिनिन की मात्रा चेक कराना. अगर इन टेस्ट्स में कोई गड़बड़ी दिखती है. तब डॉक्टर आगे की जांच करके पता लगा सकते हैं कि हाई बीपी की वजह से किडनी पर असर पड़ रहा है या नहीं.

अपना बीपी समय-समय पर चेक करें और उसकी रीडिंग नोट करते रहें. इससे पता चलता है कि ब्लड प्रेशर कितना कंट्रोल में है. बीपी सुबह ज़्यादा रहता है या शाम को, ये समझ आता है. ये तय करने में भी मदद मिलती है कि दवा या उसकी टाइमिंग बदलने की ज़रूरत है या नहीं.
अपनी डाइट में बदलाव करें. खाने में नमक जितना कम हो सके, कर दें. बीपी कंट्रोल करने में DASH डाइट भी काफ़ी फ़ायदेमंद है. इस डाइट में फाइबर ज़्यादा और नमक कम होता है. कई बार नमक की जगह पोटैशियम बेस्ड विकल्प दिए जाते हैं. लेकिन पोटैशियम आपके लिए सही है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए.
रोज़ एक्सरसाइज करें. तैराकी, साइकिलिंग, वॉकिंग या कोई भी फिज़िकल एक्टिविटी करें. रोज़ 15-20 मिनट एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. इससे बीपी कंट्रोल करने में मदद मिलती है. जितना बीपी कंट्रोल रहेगा, किडनी उतनी ही सेफ़ रहेगी.
स्मोकिंग किडनी को सीधे नुकसान पहुंचाती है. ये ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना भी मुश्किल बना देती है. इसलिए सिगरेट पीना पूरी तरह छोड़ दें.
देखिए, हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचता है. फिर जैसे-जैसे किडनी की बीमारी बढ़ती है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना उतना ही मुश्किल हो जाता है. इसलिए अपना बीपी रेगुलरली चेक कराएं. अगर ब्लड प्रेशर काफी वक्त से अनकंट्रोल्ड हो तो डॉक्टर से मिलें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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