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गर्भाशय कैंसर के मरीजों के लिए नया विकल्प, डुर्वालुमैब को CDSCO की मंजूरी

डुर्वालुमैब भारत में साल 2023 से उपलब्ध है. लेकिन तब इसे दूसरे तरह के कैंसर के इलाज के लिए मंज़ूरी मिली हुई थी. जैसे फूड पाइप (खाने की नली), पेट, फेफड़े और लिवर के कैंसर में.

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शुरुआत में डुर्वालुमैब को कीमोथेरेपी के साथ दिया जाता है

भारत में कैंसर की एक दवा को नए इलाज के इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिली है. दवा का नाम है डुर्वालुमैब. इसे एस्ट्राज़ेनेका फ़ार्मा इंडिया लिमिटेड बनाती है. कंपनी ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि CDSCO ने डुर्वालुमैब को एक नए इस्तेमाल के लिए अप्रूवल दे दिया है. CDSCO यानी Central Drugs Standard Control Organisation. ये भारत में दवाओं को जांचने और मंज़ूरी देने वाली संस्था है.

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डुर्वालुमैब के इस नए इस्तेमाल से देश में कैंसर के इलाज को मज़बूती मिलेगी. अब इस दवा का इस्तेमाल गर्भाशय के कैंसर वाले मरीज़ों के इलाज में भी किया जा सकेगा. इसलिए डॉक्टर से जानेंगे कि डुर्वालुमैब दवा कैंसर के इलाज में कैसे काम आती है. भारत में नई मंजू़री मिलने से कैंसर के मरीज़ों को क्या फ़ायदा होगा. ये दवा किस कैंसर पर सबसे ज़्यादा असरदार है. और सबसे ज़रूरी, दवा की कीमत क्या है. 

डुर्वालुमैब दवा कैंसर के इलाज में कैसे काम आती है?

ये हमें बताया डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने. 

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डॉ. पुनीत गुप्ता, चेयरमैन, ऑन्कोलॉजी सर्विसेज़, एशियन हॉस्पिटल

भारत में एंटी-कैंसर दवा डुर्वालुमैब को नए इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिली है. इसे CDSCO और डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज़ (DGCI) ने अप्रूव किया है. ये महिलाओं की कैंसर केयर में एक अहम कदम माना जा रहा है. ये दवा भारत में पहले से यानी साल 2023 से उपलब्ध है. लेकिन तब इसे दूसरे तरह के कैंसर के इलाज के लिए मंज़ूरी मिली हुई थी. जैसे फूड पाइप (खाने की नली), पेट, फेफड़े और लिवर के कैंसर में इसका इस्तेमाल होता था. अब जो नई मंज़ूरी मिली है, वो महिलाओं में होने वाले गर्भाशय के कैंसर के इलाज के लिए है.

भारत में मंज़ूरी मिलने से कैंसर के मरीज़ों को क्या फ़ायदा होगा?

गर्भाशय का कैंसर दो तरह का होता है. गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स के कैंसर के लिए इस दवा को मंज़ूरी नहीं मिली है. लेकिन, गर्भाशय के ऊपरी हिस्से के एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा के लिए इसे अप्रूवल मिला है. गर्भाशय में होने वाले दूसरे कैंसर, जैसे लिम्फोमा या लियोमायोसारकोमा के लिए भी ये मंज़ूर नहीं है. यानी फिलहाल ये दवा सिर्फ एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा टाइप में इस्तेमाल होगी. 

कुल मिलाकर, कैंसर करीब 200 तरह का होता है. उनमें से ये मंज़ूरी खास गर्भाशय के ऊपरी हिस्से के एंडोमेट्रियल कैंसर के लिए है. भारत में एडवांस स्टेज पर इस बीमारी का इलाज ज़्यादा असरदार नहीं था. जिनकी सर्जरी मुमकिन नहीं थी या जिनमें कैंसर लौट आता था, उनके पास इलाज के विकल्प कम थे. लेकिन अब डुर्वालुमैब दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें एक और अच्छी बात है.

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 गर्भाशय के ऊपरी हिस्से के एंडोमेट्रियल कार्सिनोमा के लिए डुर्वालुमैब को अप्रूवल मिला है

एंडोमेट्रियल कैंसर के मरीजों में एक खास जांच की जाती है, जिसे MMR टेस्ट कहा जाता है. अगर इस टेस्ट में कमी पाई जाती है, तो उसे dMMR कहा जाता है. dMMR वाले मरीजों में ये दवा ज़्यादा असरदार पाई गई है. लेकिन सिर्फ इस दवा से कैंसर पूरी तरह ठीक नहीं होता. 

शुरुआत में डुर्वालुमैब को कीमोथेरेपी के साथ दिया जाता है. जिन मरीजों में बीमारी कंट्रोल में आ जाती है और आगे नहीं बढ़ती, उन्हें बाद में मेंटेनेंस थेरेपी दी जाती है. इस मेंटेनेंस फेज में मरीज़ को डुर्वालुमैब इम्यूनोथेरेपी दी जाती है. साथ में एक और दवा दी जाती है, जिसे PARP इनहिबिटर कहा जाता है, जैसे ओलापैरिब. ये कैप्सूल के रूप में होती है और मरीज़ इसे घर पर ले सकता है. डुर्वालुमैब और ओलापैरिब को साथ मिलाकर आगे इलाज जारी रखा जाता है.

डुर्वालुमैब की क्या कीमत है?

दवा दो अलग-अलग स्ट्रेंथ की छोटी शीशियों में भारत में उपलब्ध है. एक शीशी की मात्रा दूसरी के मुकाबले लगभग चार गुना ज़्यादा है. जैसे इसकी एक शीशी 120 mg की है, जबकि दूसरी करीब 500 mg की. कीमत में भी लगभग चार गुना का अंतर है. 120 mg वाली शीशी की कीमत करीब 40 हज़ार रुपए है. वहीं, 500 mg वाली शीशी की कीमत 1 लाख 60 हजार रुपये तक जाती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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