क्रिकेट प्रेमी

जावेद मियांदाद के साथ ठाकरे, फोटो- गेटी
बाल ठाकरे की पहचान एक नेता के तौर पर है. नेता होने के नाते आदमी के बहुत सारे शौक हो जाते हैं. जैसे बाल ठाकरे को क्रिकेट का शौक था. एक बार तो ऐसा हुआ कि उन्होंने एक प्रिय क्रिकेटर को दावत पर घर बुला लिया. बिना ये सोचे कि लोग क्या कहेंगे. वेल, दैट वॉज द स्पिरिट ऑफ बाला साहब. हां तो 30 जुलाई 2004 को बाल ठाकरे ने पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद को अपने घर इनवाइट किया. कैमरे के सामने खूब हंसी मजाक किया. पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का कैप्टन बनने की इच्छा जताई. इसके एक साल बाद दुबई में जावेद मियांदाद के बेटे का दाऊद इब्राहिम की बेटी से निकाह हो गया. वही दाऊद जिस पर 1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोप हैं. वही मुंबई जिसको 1995 में बाल ठाकरे ने बंबई से मुंबई कर दिया. वही मुंबई जो बाल ठाकरे की एक आवाज पर थम जाती थी. बाल ठाकरे जावेद मियांदाद के चाहे जितने करीब रहे हों, लेकिन उनकी पार्टी 2010 में शाहरुख खान से माफी मंगवाने पर अड़ गई थी. जब शाहरुख ने पाकिस्तानी क्रिकेटर्स का सपोर्ट कर दिया था. अब आप कहेंगे कि ट्रेलर में तो वो सीन है.

ये वाला सीन असल में ऐसा नहीं था.
तो साहब ट्रेलर में जो डायलॉग है, वो कभी बाल ठाकरे ने नहीं बोले थे. वो सेना के जवानों वाले डायलॉग. इंडिया टीवी के यूट्यूब चैनल से निकालकर हम वो वाली मीटिंग लाए हैं, देख लीजिए.
खैर इनके अलावा जो उपलब्धियां थी वो ये कि 1991 में वानखेड़े और 1999 में फिरोजशाह कोटला की पिच शिवसेना के लोगों ने खोद दी. क्योंकि भारत-पाकिस्तान का मैच होनेवाला था. 1999 में तो BCCI के ऑफिस में तोड़-फोड़ भी की गई और 1983 वाले वर्ल्ड कप को तोड़ दिया गया.
करेक्टर प्रेमी

'वो अश्लील ऐड'
1995 में महाराष्ट्र में शिव सेना सत्ता में आई थी. एक बवाली फोटो आया था. मधु सप्रे और मिलिंद सोमन ने एक ऐड के लिए सांप पहनकर फोटो शूट करवाया था. फोट अश्लील था क्योंकि उसमें नंगत्व था. शिव सेना सत्ता में थी उसको संस्कृति पर ये हमला मंजूर नहीं था. तो मधु सप्रे पर केस कर दिया गया और माफी मांगने को कहा गया. इस प्रकार एक प्वाइंट इस लिस्टिकल में और जुड़ जाता है कि शिव सेना माफी प्रेमी थी, लेकिन उसके लिए कोई और लिस्टिकल बनाएंगे.
सिनेमा प्रेमी

ठाकरे की शरण में संजू
सिनेमा से बाल ठाकरे को बड़ा प्रेम था. म्यूजिक से भी. तभी तो माइकल जैक्सन को भी बुला लिया था. फिल्मी कलाकार सारे उनके दोस्त हुआ करते थे एक जमाने में. दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार, सुनील दत्त से लेकर अमिताभ बच्चन और रजनीकांत तक. ट्रेलर में उसका बेहद छोटा हिस्सा दिखाया गया है. जिसमें ठाकरे के गेटप में नवाज कहते हैं- ये सब यहां नहीं चलेगा. पहला हक यहां के मराठी लोगों का है. उस सीन में जो पोस्टर उतारा जा रहा है वो फिल्म 'तेरे मेरे सपने' का है. और जो चढ़ा हुआ है वो 'सोंगाडया' का है. तेरे मेरे सपने देव आनंद की थी. सोंगाडया दादा कोंडके की. दोनों फिल्में 1971 में आई थीं. दादा कोंडके बाल ठाकरे के मित्र थे और पहुंचे हुए शिव सैनिक भी. उसकी स्क्रीनिंग के लिए बाल ठाकरे ने जान लड़ा दी थी. इस फिल्म में बहुत सारा सेक्शुअल कॉन्टेंट था जिसको कोई और बनाता तो शायद रिलीज ही न हो पाती. लेकिन इस मौके पर करेक्टर प्रेमी शिव सेना पर मराठी सिनेमा प्रेम ने विजय प्राप्त की और नंगत्व से भरपूर फिल्म चल गई. शिव सेना का एक मात्र तर्क ये था कि कोंडके मराठी मानूस हैं. वैसे कोंडके डबल मीनिंग डायलॉग्स के लिए भी फेमस हैं. सिनेमा प्रेम का हाल बाद के वर्षों में ये रहा कि छोटी छोटी बातों पर शिव सैनिक फिल्मों के पोस्टर फाड़ दिया करते थे. जैसे किसी फिल्म में मुंबई को बंबई बोल दिया गया हो तो भी.

पोस्टर उतराई की रस्म
ठेला उलट प्रेमी
ट्रेलर के एक सीन में इंदिरा गांधी के करेक्टर से ठाकरे के करेक्टर में नवाज कहते हैं कि वो पहले जय हिंद बोलते हैं, महाराष्ट्र बाद में. उनके लिए देश पहले है. लेकिन यूपी बिहार हिंद के बाहर आता है, ये बात शायद फिल्म मेकिंग में मिस हो गई. इसलिए उनके ठेले उलटने और मुंबई से खदेड़ने वाले सीन फिल्म में नहीं रखे गए हैं. गौरतलब है कि उत्तर भारतीयों को महाराष्ट्र से भगाने का कार्यक्रम शिव सेना ने ही शुरू किया था.
राम मंदिर प्रेमी

यूपी वाले भले महाराष्ट्र से भगाए गए हों लेकिन उनको भगाने वालों को यूपी में अयोध्या और अयोध्या में राम मंदिर में इंट्रेस्ट हमेशा बना रहा है. अभी रीसेंटली बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे चलो अयोध्या के नारे के साथ यहां से आकर गए हैं. 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद जहां कल्याण सिंह से लेकर अटल बिहारी, आडवाणी और हिंदूवादी संगठन नाम लेने में सकुचा रहे थे उस वक्त बाल ठाकरे ने कहा था "बाबरी मस्जिद की दीवारों और मीनारों को नापने वाले पहले कारसेवक शिव सैनिक थे." ये अलग बात है कि ठाकरे खुद कभी अयोध्या नहीं गए.
अभिव्यक्ति की आजादी के प्रेमी

बाल ठाकरे के कार्टून
बाल ठाकरे की पहचान एक कार्टूनिस्ट के तौर पर भी है. पॉलिटिकल कार्टून बनाते थे. नेताओं के ऊपर कार्टून बनाने से रोका गया तो नौकरी छोड़ दी थी. अभिव्यक्ति के आजादी के पक्षधर थे. फिर पावर और जनता का साथ मिला तो मराठी नाटककार विजय तेंदुलकर को नाको चने चबवा दिए थे. घासीराम कोतवाल नाम के एक नाटक में विजय तेंदुलकर ने दिखाया था कि सत्ता पाने के लिए कैसे मुद्दे तैयार किए जाते हैं. शिव सेना को खल गया. इसके अलावा फिल्मों के पोस्टर फाड़ने वाला फिर से बताएंगे तो बात रिपीट होगी.
होने को बहुत सी चीजें हैं लेकिन इन चीजों का मिस होना कतई ठीक नहीं है. अगर एक अच्छी बायोपिक बन रही है तो ये सब भी उसमें होना चाहिए. नहीं तो बायोपिक तो संजू भी थी. जाते जाते ट्रेलर देख जाओ.





















