Sunny Deol की पीरियड-ड्रामा फिल्म Batwara 1947 का ऑफिशियल ट्रेलर रिलीज़ हो गया है. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर बनी इस मूवी को Aamir Khan ने प्रोड्यूस किया है. ट्रेलर में सनी एक बार फिर उसी रौद्र रूप में दिखे, जिसमें आप उन्हें 90s से देखते आए हैं. मगर इस बार उन्हें टक्कर देने के लिए मेकर्स Abhimanyu Singh को ले आए. स्क्रीन पर सनी और उनकी बकझक ही इस ट्रेलर की सबसे बड़ी हाइलाइट है.
कैसा है सनी देओल स्टारर 'बंटवारा 1947' का ट्रेलर?
ट्रेलर का पूरा फोकस सनी देओल पर है. इसलिए राजकुमार संतोषी उनकी टिपिकल लाउड इमेज को कैटर करते दिखे हैं.

'बंटवारा 1947' प्रोफेसर असग़र वजाहत के नाटक 'जिस लाहौर नै वेख्या, ओ जाम्या ए नै' पर आधारित है. पहले फिल्म का नाम भी 'लाहौर 1947' ही था. मगर पहलगाम आतंकी हमले के बाद आमिर ने टाइटल बदल दिया. ट्रेलर की शुरुआत भारत की आजादी से होती है. मगर हाथ में तिरंगा लिए जनता जश्न मना ही रही होती है कि बंटवारे का ऐलान कर दिया जाता है. भारत और पाकिस्तान, दोनों जगह दंगे भड़क जाते हैं. लोग धर्म देखकर एक-दूसरे की जान लेने लगते हैं. फिल्म में सनी ने एक ऐसे मुस्लिम शख्स का किरदार निभाया है, जो हंसी-खुशी अपने परिवार के साथ लखनऊ में रह रहे थे. लेकिन दंगे की आग से वो भी नहीं बच पाते और अपनी पत्नी के कहने पर पाकिस्तान के लाहौर शहर पहुंच जाते हैं. फिल्म की असली कहानी यहीं से शुरू होती है.
लाहौर में सनी के परिवार को एक ऐसा मकान एलॉट किया जाता है, जो बंटवारे से पहले एक हिन्दू परिवार का था. वो परिवार तो पार्टीशन के बाद भारत चला गया, मगर घर की एक बूढ़ी अम्मा को पीछे छोड़ गया. उन अम्मा का रोल शबाना आज़मी ने किया है. अम्मा, सनी के परिवार को अपने घर में घुसने नहीं देना चाहतीं. उन्हें इस बात का डर है कि कहीं उनके हिन्दू होने की वजह से सनी उनकी जान न ले ले. लेकिन सनी और उनका परिवार न केवल उनका भरोसा जीतता है, बल्कि उनकी आस्था का सम्मान भी करता है. इसके बाद क्या कुछ होता है, इसके लिए आपको ट्रेलर देखना पड़ेगा.
यहां ट्रेलर देखने की बात इसलिए की जा रही क्योंकि मेकर्स ने फिल्म की पूरी कहानी ट्रेलर में ही दिखा दी है. वो भी इस तरह कि जिसने असगर वजाहत का नाटक नहीं पढ़ा, वो भी इसे समझ जाएगा. वैसे इस ट्रेलर में कई एक्टर्स दिखाए गए हैं. मगर आपका ध्यान केवल तीन लोगों पर जाता है. एक सनी देओल, दूसरे अभिमन्यु सिंह और तीसरी शबाना आज़मी. अली फज़ल और प्रीति ज़िंटा जैसे एक्टर्स को एकाध शॉट्स के लिए ही स्क्रीन पर लाया गया है. करन देओल बेहद फीके लगे हैं. हालांकि फिल्म में इन तीनों का काफी अहम रोल होगा, ये तय है.
‘बंटवारा 1947’ को राजकुमार संतोषी ने डायरेक्ट किया है. वो देश के कुछ सबसे बेहतरीन डायरेक्टर्स में से एक हैं. इस फिल्म का जिम्मा उन्हें मिलता देख आपका भरोसा जगता है. ट्रेलर में रेलवे स्टेशन की लड़ाई, बंटवारे के बाद की भगदड़ और दंगों के सीन्स में उनकी पुरानी छाप दिखाई देती है. लेकिन उनके इतर बाकी कहानी को सनी की 'गदर' वाली इमेज ओवरशैडो करने लगती है. ट्रेलर में कई मौकों पर वो बेवजह चिल्लाते नजर आते हैं. ऐसे में आप चाहकर भी उनकी 'बॉर्डर' और 'जाट' वाली इमेज से बाहर नहीं आ पाते.
'बंटवारा 1947' एक पीरियड-ड्रामा मूवी है. लेकिन मेकर्स ने ट्रेलर को एक्शन हैवी बना दिया है. यदि फिल्म में भी ऐसा होता है तो लोग इसके सब्जेक्ट से कनेक्ट नहीं कर पाएंगे. असगर वज़ाहत के नाटक में कहानी की लीड बूढ़ी अम्मा होती हैं. सब कुछ उनके इर्द-गिर्द घूमता है. दंगाई उनकी जान लेना चाहते हैं. सनी का परिवार उन्हें बचाने आगे आता है. एक बूढ़ी महिला को जब आप इन दिक्कतों का सामना करते देखते हैं, तो खुद ही उनसे इमोशनली कनेक्ट हो जाते हैं. लेकिन 'बंटवारा 1947' ट्रेलर में ऐसा बिल्कुल नहीं होता. यहां सब कुछ सनी देओल के इर्द-गिर्द घूम रहा है. आप उन्हें दर्जनों लोगों से एक साथ लड़ते हुए देखते हैं. मगर वो लड़ाई कर क्यों रहे, ये बात बैकग्राउंड में चली जाती है. यदि राजकुमार संतोषी, सनी की टिपिकल लाउड इमेज को कैटर करने की जगह उन्हें एक शांतचित्त शख्स की तरह पेश करते, तो शायद इस कहानी का असर थोड़ा ज्यादा पड़ता.
हालांकि अभी केवल ट्रेलर आया है. फिल्म सही मायनों में कैसी है, ये रिलीज़ के बाद ही पता चलेगा. मूवी 14 अगस्त यानी पार्टीशन डे पर सिनेमाघरों में आएगी. वहां इसकी टक्कर इमरान हाशमी की 'आवारापन 2' से है. अब तक के रुझानों की बात करें तो 'बंटवारा 1947' की कुछ खास हाइप नजर नहीं आ रही. ऐसे में आमिर और सनी को दर्शक लाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है.
वीडियो: क्या आमिर और सनी देओल की फिल्म इस वजह से अटक जाएगी?












