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शेखर कपूर ने आमिर खान को अपना असिस्टेंट नहीं रखा, आमिर की कार थी इसकी वजह

शेखर कपूर की 'मिस्टर इंडिया' से आमिर का पत्ता कट करने में सतीश कौशिक का हाथ था.

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साल 1987 में आमिर खान शेखर कपूर से असिस्टेंट का काम मांगने गए. मगर शेखर ने उन्हें अपना असिस्टेंट नहीं बनाया.

ये बात उस दौर की है, जब Aamir Khan फिल्मों में बतौर एक्टर नहीं, बल्कि असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे थे. वो जगह-जगह अपनी पूरी फाइल लिए काम मांगने जाते थे. उस दौरान वो Shekhar Kapur के पास भी गए. तब शेखर Anil Kapoor के साथ Mr. India बना रहे थे. आमिर ने उन्हें बताया कि वो क्या-क्या कर सकते हैं. शेखर ने उनकी पूरी बात सुनी. मगर शेखर ने उन्हें असिस्टेंट रखा नहीं. आमिर के हिस्से रिजेक्शन आया. आमिर ने The Lallantop को दिए लंबे इंटरव्यू में इस रिजेक्शन का ज़िक्र तो किया था. मगर इसकी वजह शायद उन्हें भी मालूम नहीं थी. बीते दिनों जब शेखर दी लल्लनटॉप के खास कार्यक्रम Guest in The Newsroom में आए, तो उन्होंने बताया कि इस सबके पीछे Satish Kaushik का हाथ था. 

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आखिर सतीश कौशिक ने ऐसा क्या किया, कि आमिर का पत्ता कट हो गया? इस बारे में शेखर ने कहा,

“आमिर शॉर्ट्स पहने गाड़ी में आया था मेरे पास. सतीश ने कहा मुझे कि सर नहीं. मैं फर्स्ट असिस्टेंट हूं आपका. सेकेंड असिस्टेंट के पास गाड़ी है. और मेरे पास गाड़ी नहीं है. तो आप इसको नहीं रख सकते हो. तो सतीश ने मना कर दिया था. मैंने मना नहीं किया था. कार होने की वजह से वो रिजेक्ट हुआ. मैंने नहीं, सतीश कौशिक ने मना कर दिया.”

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शेखर ने विनोद भाव से पूरी बात बताई और आमिर की तारीफ़ करते हुए कहा,

“अच्छा ही हुआ मना हो गया. वो असिस्टेंट डायरेक्टर होता तो कहां स्टार होता आज इतना बड़ा. क्या मालूम... वो डायरेक्टर तो है, अच्छा है. मगर कुछ वक्त बाद तो वो स्टार बन गया.”

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वहीं जब आमिर दी लल्लनटॉप के दफ्तर आए थे, तो उन्होंने कहा था,

“मैं शेखर कपूर से मिला था, कि मुझे असिस्टेंट बना लो. मैं पूरी फाइल लेकर गया था. मुझे याद है कि उस वक्त लोग पेपर वर्क ही नहीं करते थे. शेखर के पास जाने से पहले मैं नासिर साहब (आमिर के चाचा नासिर हुसैन) की फिल्म ‘ज़बरदस्त’ में असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुका था. तो जब मैं  ‘ज़बरदस्त’ के सेट पर आया, तो जो चीफ़ असिस्टेंट था, उनसे मैंने पूछा कि भई, आप ज़रा पेपर वर्क दिखाएंगे मुझे? वो कहता है कौन सा पेपर वर्क. मैंने कहा, भई प्रॉपर्टी रिक्वायरमेंट, कॉस्ट्यूम रिक्वायरमेंट, एक्टर ब्रेकडाउन, लोकेशन ब्रेकडाउन... ये सब आपने किया होगा. वो बोले नहीं. मैं हैरान, कि यहां तो पेपर वर्क ही नहीं हुआ है. मैं ये सब इसलिए जानता था क्योंकि इससे पहले मैं अपनी फर्स्ट फिल्म बना चुका था. अच्छा, जो पूरा ब्रेकडाउन मैंने नासिर साहब की फिल्म के लिए किया था, वो पूरी फाइल मैंने शेखर को दिखाई थी. शेखर ने पूछा- अच्छा ये सब तुमने किया है? फाइल देखी उन्होंने. मगर मुझे असिस्टेंट रखा नहीं.”

बहरहाल, शेखर कपूर के बॉडी ऑफ वर्क की बात करें, तो 1983 में उन्होंने ‘मासूम’ बनाई. भारतीय सिनेमा को मोगैम्बो जैसा अमिट खलनायक दिया. उनकी फिल्में कम हैं, मगर वो कम किसी लिहाज़ से नहीं हैं. उनकी ‘एलिज़ाबेथ’ (1998) को ऑस्कर के 7 नॉमिनेशंस मिले. एक कैटेगरी में इसने ऑस्कर जीता भी. उनकी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ (1994) ने तीन नेशनल अवॉर्ड जीते. 

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