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होर्मुज बना साख का सवाल, ट्रंप मिडिल-ईस्ट भेजेंगे अमेरिका की सबसे खतरनाक मरीन फोर्स!

अमेरिकी सेना के तीन अधिकारियों ने बताया कि इस जंग में 2500 Marines (अमेरिका की स्पेशल फोर्स), USS Boxer और इसके साथ चलने वाले अन्य जंगी खाड़ी में तैनात किए जाएंगे.

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अमेरिका की मरीन फोर्स ईरान जंग में तैनात होगी. (फोटो-U.S. Marines/X)

ईरान के खिलाफ जंग जीतना अमेरिका के लिए साख की बात हो गई है. यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चारों ओर हाथ-पैर मारते नजर आ रहे हैं. होर्मुज का गतिरोध दूर करने के लिए सेना न भेजने पर नाटो देशों को ‘कायर’ बताने के बाद खबर है कि ट्रंप मिडिल ईस्ट में हजारों की संख्या में मरीन सैनिक (अमेरिका की स्पेशल फोर्स) भेजने वाले हैं. NATO( North Atlantic Treaty Organization) ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने के लिए अपनी सेना को भेजने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी, जिसके बाद अमेरिकी सेना ये कदम उठाने वाली है.

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मरीन फोर्स में अमेरिका के सबसे Highly Trained सैनिक होते हैं, जो समुद्र, जमीन और हवा में भी लड़ने की क्षमता रखते हैं.

बता दें कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव है. यहां से जहाजों का आना-जाना तकरीबन बंद है. इसकी वजह से दुनिया भर के कई देश तेल और गैस की संकट से जूझ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप ने NATO से होर्मुज को खोलने के लिए सैन्य मदद की मांग की थी, लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी. इसके बाद ट्रंप ने NATO से जुड़े देशों को ‘कायर’ बता दिया.

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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के तीन अधिकारियों ने बताया कि इस जंग में 2500 Marines (अमेरिका की स्पेशल फोर्स), USS Boxer और इसके साथ चलने वाले अन्य जंगी जहाजों को खाड़ी में तैनात किया जाएगा. हालांकि, अधिकारियों ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि इस जंग में इनकी क्या भूमिका होने वाली है?

USS Boxer
अमेरिकी जंगी जहाज USS Boxer. (Credit: SanDiego WebCam)

अमेरिका के दो अन्य सैनिकों ने जंग के बारे में रॉयटर्स को जानकारी दी कि इस बात पर अभी कोई मुहर नहीं लगी है कि सैनिकों को सीधे ईरान के अंदर भेजा जाएगा या नहीं. हालांकि, कुछ सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया था कि ऐसी ‘संभावना’ है कि अमेरिकी सैनिकों को ईरान के तटीय क्षेत्र या खार्ग द्वीप पर हमले के लिए भेजा जा सकता है.

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अमेरिका इस जंग में अपने लक्ष्यों को पूरा करने के बेहद करीब पहुंच गया है. इन लक्ष्यों में ईरानी सेना को कमजोर करना और उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना शामिल है. ट्रंप अपने बयानों से यह संकेत दे रहे हैं कि वो ईरान पर अपनी सैन्य कार्रवाई को कम कर सकते हैं. 

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यह भी पढ़ें: खाड़ी की तरफ बढ़ रहा USS Tripoli, क्या मकसद होर्मुज है?

बता दें कि बीती 28 फरवरी 2026 को अमेरिका- इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया था. जिसके बाद से ही पूरे वेस्ट एशिया में तनाव बना हुआ है. होर्मुज में ट्रैफिक बाधित होने की वजह से दुनियाभर के कई देशों में गैस और तेल का संकट बना हुआ.

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