आज कल Pathaan नाम की अलाव जल रही है. इसमें सबको हाथ सेंकना है. अब बारी आई है मुकेश खन्ना की. इन्हें Shaktimaan नाम के टीवी शो में सुपरहीरो किरदार निभाने के लिए याद किया जाता है. अब टीवी फिल्मों से दूर यूट्यूब पर वीडियोज़ बनाते हैं. इनके चैनल का नाम है 'भीष्म इंटरनेशनल'. इन्होंने Shahrukh Khan की फिल्म 'पठान' के गाने Besharam Rang की आलोचना करते हुए एक वीडियो बनाया है. वीडियो के थंबनेल पर लिखा है- 'अगर आपको ये अश्लील नहीं लगता, तो कल आप पोर्न फिल्म बनाओगे!!' साथ में बेशरम रंग के कुछ स्क्रीनशॉट्स हैं. साथ में मुकेश खन्ना की फोटो लगी है. और अंदर हुई है भयंकर क्रांति!
'बेशरम रंग' पर मुकेश खन्ना का एक्सपर्ट कमेंट- 'जानकर ऐसा करते हैं, ताकि करोड़ों की पब्लिसिटी मिले'
मुकेश खन्ना ने सेंसर बोर्ड को भी झाड़ दिया- 'हिंदू धर्म के बारे में नहीं पता, उन्हें वहां बैठने का हक़ नहीं.'


इस वीडियो में मुकेश खन्ना हिंदी फिल्मों में अश्लीलता पर बात कर रहे हैं. वो कहते हैं कि पहले 'पीके' में भगवान शिव का मज़ाक उड़ाया. फिर 'काली' नाम की डॉक्यूमेंट्री में देवी को सिगरेट पीते दिखाया गया. 'आदिपुरुष' में रावण को खिलजी बना दिया गया. इसके बाद वो 'पठान' पर आते हैं. मुकेश खन्ना कहते हैं-
''अब 'पठान' फिल्म में 'बेशरम रंग' के टाइटल लेती हुई एक ऐसे गाने की पिक्चराइजेशन, जिसमें अश्लीलता हद से बाहर हो गई है. लोगों को बिकिनी में डांस करते हुए दिखाया गया है. पहला तो मेरा ऑब्जेक्शन ये है. और उससे बड़ा ऑब्जेक्शन ये है कि भगवा रंग की बिकिनी पहनकर वही डांस करते दिखाया गया है. ये सब क्या है? क्या ये कंट्रोवर्सी क्रिएट करने का तरीका नहीं है? लोग समझते हैं कि कंट्रोवर्सी क्रिएट करो, फिर हमारे-आपके जैसे लोग डिस्कस करेंगे. बहस करेंगे. चिल्लाएंगे. चुप हो जाएंगे. करोड़ों की पब्लिसिटी मिल जाएगी. लोग फिल्म देखने जाएंगे.
इनकी यही मंशा है मैं जानता हूं. ये जितने भी बनाने वाले मेकर हैं वो हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं हैं. सभी ने सिर्फ हिंदू धर्म को सॉफ्ट टारगेट बना रखा है. उनकी इस गुस्ताख़ी को तोड़ने की आवश्यकता है. बेशर्म रंग को लेकर पठान को बायकॉट करने की एक बहुत बड़ी मुहिम शुरू हुई है. मैं इसका समर्थन करता हूं. इस गाने को तो बायकॉट करना ही चाहिए.''
वो आगे कहते हैं कि उनके सुनने में आया है कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म से उन शब्दों को हटाने की बात कही है. जिनसे से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं. वो सेंसर बोर्ड को सलाह देते हुए कहते हैं-
''मैं सेंसर बोर्ड से कहूंगा कि आप ज़्यादा जागरूक होइए. मुझसे कहा गया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पास कर दिया है, तो आपको क्या ऑब्जेक्शन है. क्यों भई? सेंसर बोर्ड कोई सुप्रीम कोर्ट है? अगर उसे हिंदू धर्म का ज्ञान नहीं है, तो सेंसर बोर्ड में बैठने का उनका कोई हक़ नहीं है. हम विरोध करेंगे. हिंदू धर्म के लोग विरोध करेंगे. ये किसी और धर्म के साथ नहीं होता है. इसको रोकिए. सेंसर बोर्ड अगर इस गाने को रोकती है या शब्द बदलने को कहती है, उससे कुछ नहीं होगा. पूरी ड्रेस को चेंज करना पड़ेगा. तब आगे जाकर कोई भी प्रोड्यूसर इस तरह की गुस्ताख़ी करने की कोशिश नहीं करेगा. इनको लॉस होगा, तो आगे कोई प्रोड्यूसर नहीं करेगा.''
सबसे पहली बात तो ये कि मुकेश खन्ना इज़ लेट टु द पार्टी. क्योंकि ये सारी बातें पहले ही हो चुकी हैं. फिर भी ये उनकी राय है. और उसे एक्सप्रेस करने के लिए फ्री हैं. सारी लड़ाई इसी बात की है. जैसे उन्हें अपनी बात कहने का हक़ है, वैसे ही वो हक़ अन्य लोगों को भी हैं. इसलिए आप अपनी बात कहिए. दूसरों की बात को गलत करार दिए बिना. और जब कपड़े की बात है, तो फिर से वही कहा जाएगा कि वो कपड़ा आपको अश्लील लग रहा है, तो नज़र आपकी खराब है. कोई भी कपड़ा पहनना है या नहीं, इसका फैसला खुद दीपिका पादुकोण कर सकती हैं. वो कोई 'छोटी बच्ची हैं क्या?'
वीडियो: पठान के बेशरम रंग में दीपिका के भगवा कपड़ों को धर्म से जोड़ना फ़र्ज़ी बात
















