आने वाले दिनों में हवाई सफर करना जेब पर भारी पड़ सकता है. एयरलाइंस कंपनियां को विमान में पड़ने वाला ईंधन एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) जितना चाहिए उतना ठीक से नहीं मिल पा रहा है.
हवाई यात्रियों के बुरे दिन आने वाले हैं? जेट फ्यूल जेब 'जला' देगा
गर्मी के सीजन में जेट ईंधन की मांग बढ़ने की आशंका है, क्योंकि स्टॉक कम हो गया है. खाड़ी देशों और एशिया के प्रमुख जेट फ्यूल के निर्यातकों द्वारा रिफाइनरी उत्पादन में कमी से इसकी सप्लाई सीमित हो गई है. खाड़ी देशों की जेट फ्यूल सप्लाई में करीब 40 परसेंट हिस्सेदारी है.


इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में दुनिया की जानी-मानी मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मैकिन्से की एक रिपोर्ट (McKinsey report) के हवाले से बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बने रहने और रिफाइनरी में आ रही दिक्कतों से विमान में पड़ने वाले ईंधन यानी जेट फ्यूल ईंधन की सप्लाई पर असर पड़ रहा है. इससे क्रैक स्प्रेड बढ़ सकता है. इसकी वजह से आने वाले समय में हवाई सफर महंगा हो सकता है.
सप्लाई घटने से क्रैक स्प्रेड बढ़ेगासप्लाई में कमी से जेट फ्यूल महंगा होता है और उसका क्रैक स्प्रेड (Crack Spread) बढ़ जाता है. क्रैक स्प्रेड से इस बात का पता चलता है कि कच्चे तेल को रिफाइन करके बने उत्पाद जैसे कि पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल की कीमत और क्रूड ऑयल की कीमत में कितना फर्क है.
उदाहण के लिए अगर एक बैरल कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर है और उससे बने जेट फ्यूल की कीमत 130 डॉलर है तो क्रैक स्प्रेड 50 डॉलर प्रति बैरल होगा. यह जितना ज्यादा होगा, जेट फ्यूल उतना महंगा होता जाएगा.
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पुरानी कीमतों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि जेट फ्यूल का क्रैक स्प्रेड आमतौर पर 20 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल या उससे कम के आसपास रहता है, लेकिन साल 2026 में यह औसतन 50 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो सकता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि गर्मी के सीजन में जेट ईंधन की मांग बढ़ने की आशंका है, क्योंकि स्टॉक कम हो गया है. खाड़ी देशों और एशिया के प्रमुख जेट फ्यूल के निर्यातकों द्वारा रिफाइनरी उत्पादन में कमी से इसकी सप्लाई सीमित हो गई है. खाड़ी देशों की जेट फ्यूल सप्लाई में करीब 40 परसेंट हिस्सेदारी है.
हालांकि, मैकिन्से की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुल जाता है और जेट फ्यूल की सप्लाई पटरी पर लौटती है तो जेट फ्यूल की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है. आगे कहा गया है कि हवाई टिकट की कीमत का लगभग 30 परसेंट हिस्सा आमतौर पर जेट फ्यूल की लागत में जाता है. ऐसे में जेट फ्यूल की लागत में बढ़ने से हवाई किराये में 20 से 25 परसेंट का इजाफा हो सकता है.
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