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अंग्रेज़ी की कविता का अनुवाद कर अपने नाम से छापने के आरोपों पर मनोज मुंतशिर ने क्या सफाई दी

मनोज की कविता 'मुझे कॉल करना' पर चोरी के आरोप लगे थे. सोशल मीडिया पर लिखा गया कि मनोज ने रॉबर्ट लेवरी की कविता 'कॉल मी' का अनुवाद कर के छाप दिया है.

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मनोज ने बताया कि उनकी कविता 'मुझे कॉल करना' साल 2018 में छपी थी.

साल 2021 में जब X ट्विटर हुआ करता था तब किसी ने मनोज मुंतशिर की एक कविता की फोटो शेयर की. ये कविता कविताओं के संग्रह ‘मेरी फितरत है मस्ताना’ में थी. इसका शीर्षक था ‘मुझे कॉल करना’. मनोज पर आरोप लगा कि उन्होंने साल 2007 में छपी एक अंग्रेज़ी कविता को उठाकर उसका अनुवाद किया और अपने नाम से छाप दिया. हाल ही में मनोज ‘द लल्लनटॉप’ की बैठकी में बतौर गेस्ट आए थे. वहां उनसे कविता वाले पूरे मामले पर सवाल किया गया. सौरभ द्विवेदी ने पूछा कि क्या ये रॉबर्ट लेवरी की कविता का अनुवाद है. इस पर मनोज का कहना था,

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100 फीसदी. ये जो कविता संग्रह है इसमें तकरीबन 300 के आसपास कविताएं होंगी. 299 कविताओं पर कभी कोई आपेक्ष नहीं लगा कि वो कहीं से कॉपी की गई हैं. ये किताब 2018 में आई थी. इसमें जो नज़्में हैं, जो रचनाएं हैं उन्होंने 1996 से लेकर 2018 तक का सफर तय किया है. उतने साल जो भी लिखता रहा और जो ठीक लगा वो इसमें छपवा दिया. अब ये पक्का ऐसे ही पल पर लिखी गई कविता है जब मैंने अनुवाद ही किया होगा. मैं ये भूल चुका था. मुझे बिल्कुल भी याद नहीं था कि ये किसी तरह का अनुवाद है वरना मैं ये बेवकूफी क्यों करूंगा.  

मनोज का जवाब पढ़ने के बाद आप उनकी कविता भी पढ़ लीजिए -   

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तुम कभी उदास हो, रोने का दिल करे, तो  मुझे कॉल करना. शायद मैं तुम्हारे आंसू न रोक पाऊं, पर तुम्हारे साथ रोऊंगा ज़रूर... 
कभी अकेलेपन से घबरा जाओ, तो मुझे कॉल करना. शायद मैं तुम्हारी घबराहट न मिटा पाऊं, पर अकेलापन बांटूंगा ज़रूर... 
कभी दुनियां बदरंग लगे तो मुझे कॉल करना, शायद मैं पूरी दुनिया में रंग न भर पाऊं, पर ये दुआ ज़रूर करूंगा कि तुम्हारी जिन्दगी खूबसूरत हो... 
और कभी ऐसा हो कि तुम कॉल करो और मेरी तरफ से जवाब ना आए, तो भाग के मेरे पास आ जाना, शायद मुझे तुम्हारी ज़रूरत हो. 

नीचे रॉबर्ट लेवरी की साल 2007 में छपी कविता ‘कॉल मी’ है - 

If one day you feel like crying...call me. I don't promise that I will make you laugh, But I can cry with you. If one day you want to run away, Don't be afraid to call me. I don't promise to ask you to stop, But I can run with you. If one day you don't want to listen to anyone call me, I promise to be there for you but I also promise to remain quiet. But...If one day you call and there is no answer...come fast to see me..Perhaps I need you. 

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मनोज शुरुआत में खुद को डिफेंड करते थे. हालांकि अब उन्होंने इस बात को मान लिया है कि उनकी कविता एक अनुवाद ही थी.

 

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