1. क्राइस्ट द रिडीमर
वैसे तो इस स्टेचू को पॉल लैंडोस्की ने बनाया था. पर इसके भी पहले ऑस्वल्ड नाम के एक भाई साहब ने इसका डिजाईन तैयार किया था जिसमें क्राइस्ट के एक हाथ में ग्लोब होना था. पर आईडिया रिजेक्ट हो गया.

वैसे तो इस स्टेचू को पॉल लैंडोस्की ने बनाया था. पर इसके भी पहले ऑस्वल्ड नाम के एक भाई साहब ने इसका डिजाईन तैयार किया था जिसमें क्राइस्ट के एक हाथ में ग्लोब होना था. पर आईडिया रिजेक्ट हो गया.

जब इस दीवार को बनाया गया, तो जिस गारे यानी मिक्सचर से पत्थरों को जोड़ा गया वो चावल के आटे से बना था.
माचू पीछू को इस तरह बनाया गया है कि सालों साल ये भूकंप से बच सके. जब भी पेरू में भूकंप आता है, माचू पीछू के पत्थर नाचते हैं, और झटकों के खत्म होते ही अपनी जगह पर वापस आ जाते हैं.
जॉर्डन में बना पेट्रा लगभग 500 सालों के लिए खो गया था. लोगों को पता नहीं चला कि ऐसी कोई चीज भी है. फिर 1812 में स्विट्जरलैंड के जोहान लुडविग बर्कहार्ट नाम के एक खोजी आदमी ने इसे फिर से खोज निकाला.
चिचेन इत्जा के पिरामिड्स में 'एल कास्तिलो' नाम का एक ऐसा स्ट्रक्चर है, जो इक्विनॉक्स के दिन, यानी साल के उस खास दिन जब दिन और रात बराबर होते हैं, सूरज की रौशनी से उसका एक हिस्सा एक सांप के शेप में जगमगा उठता है.
कहते हैं रोमन कोलोसियम जब बना था, शुरूआती 100 दिनों में ही इसमें लगभग 2000 तलवारबाजों को मौत के घाट उतारा जा चुका था, और लगभग 5000 जानवर मारे जा चुके थे. मजे की बात ये है कि मौत के इस महल को आज मौत की सजा यानी कैपिटल पनिशमेंट के खिलाफ चलाये जाने वाली एक मुहिम में यूज किया जा रहा है.
हमारी शान ताज महल असल में कुतुब मीनार से लंबा है. देखने में नहीं लगता न? कुतुब मीनार की हाइट ताज महल से लगभग 5 फुट कम है.