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वो फ़िल्म जिसने बताया कि कोई प्रेग्नेंसी गलत हो सकती है, पाप नहीं

प्रीति जिंटा के वो किरदार जो अपने टाइम से आगे की बात करते हैं.

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प्रीति जिंटा ने अपनी फिल्मों में किरदार के जरिए कई ज़रूरी सवाल उठाए हैं.
17 साल पहले एक फिल्म आई थी 'क्या कहना'. इसमें प्रीति जिंटा ने अपनी डिंपल वाली स्माइल से न जाने कितनों का दिल चुराया. ये फिल्म कम उम्र लड़कियों के प्रेग्नेंट हो जाने के मुद्दे पर थी. फिर एक ऐसा दौर आया जब रेप और टीनएज प्रेग्नेंसी जैसी चीज़ें रोज़ अखबारों की सुर्खियां बनाने लगीं. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि साल 2000 में आई ये फिल्म अपने समय से आगे की फिल्म थी. फिल्म ने लोगों को उस वक़्त वो चीज़ दिखाई, जिसे देखने के लिए शायद वो तैयार नहीं थे.
फिल्म 'क्या कहना' का पोस्टर.
फिल्म 'क्या कहना' का पोस्टर.

आज 17 साल बाद भी हम जहां थे वहीं हैं क्योंकि कोई भी लड़कियों से जुड़े मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता है और न सुनना चाहता है. लोग 'ऑकवर्ड' फील करते हैं, हमारे वक़्त की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पर बात करने पर. हम इन मुद्दों को डिस्कस करेंगे.
#1. गर्ल्स स्कूल में सेक्सुअल मोलेस्टेशन
इस फिल्म में हालांकि लड़कियों के सेक्सुअल मोलेस्टेशन को थोड़े अजीब तरीके से दिखाया गया है. ये उन जगहों के बारे में है जहां सबको लड़कियों के सेफ होने का भरोसा होता है. फिल्म में प्रीति के स्कूल का वाइस प्रिंसिपल लड़कियों को गलत तरीके से छूता है और उनकी कम जानकारी और अपने प्रभाव के दम पर बच भी निकलता है. लेकिन जब वो यही हरकत प्रीति के साथ करता है, तो वो उसे स्कूल के एनुअल फंक्शन के दिन सबके सामने ही थप्पड़ मारकर एक्सपोज़ कर देती है.
फिल्म के थप्पड़ मारने वाले सीन में प्रीति जिंटा.
फिल्म के थप्पड़ मारने वाले सीन में प्रीति जिंटा.

#2. प्रीति ने कई बार निभाया है प्रेग्नेंट औरत का किरदार
प्रीति अपने समय की सबसे खुले विचारों वाली मेनस्ट्रीम हीरोइन थीं. तभी उन्होंने अपने दौर की सबसे हिट एक्ट्रेस होने के बावजूद कई बार गर्भवती महिला का किरदार परदे पर जिया है. उन्होंने 'क्या कहना', 'चोरी-चोरी चुपके-चुपके', और 'सलाम नमस्ते' जैसी फिल्मों में ये किरदार निभाए हैं. हर फिल्म में उनका रोल किसी ऐसे सामाजिक मुद्दे पर बेस्ड था, जिसके बारे में हमारी फ़िल्मों या सोसाइटी में कभी बात नहीं की गई. उनकी फिल्म 'क्या कहना' अनवांटेड प्रेग्नेंसी, 'चोरी-चोरी चुपके-चुपके' सरोगेसी और 'सलाम नमस्ते' लिव इन रिलेशनशिप के बारे में बात करती है. ये वही मुद्दे हैं जिन्हें हमारे यहां पर्दे में रखा जाता है.
फिल्म 'सलाम नमस्ते' के एक सीन में सैफ अली खान के साथ प्रीति जिंटा.
फिल्म 'सलाम नमस्ते' के एक सीन में सैफ अली खान के साथ प्रीति जिंटा.

उस वक़्त सेक्स एजुकेशन तो क्या बायोलॉजी का रिप्रोडक्शन चैप्टर तक स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाता था. टीचर्स बोल देते थे कि 'ये तो आपको पता ही होगा' और एक्साइटेड बच्चे मन मारकर चुप रह जाते. उनकी एक्साइटमेंट कम करने का और उन्हें समझाने का वही तो मौका था जो आपने शर्म के मारे गंवा दिया. 'क्या कहना' ने हमें बताया कि सेक्स महज़ एक रिप्रोडक्शन की प्रक्रिया नहीं है बल्कि इससे लोगों के इमोशन भी जुड़े होते हैं. फिल्म में प्रीति का एक स्पीच है जिसमें वो बताती हैं कि उनकी प्रेग्नेंसी गलती हो सकती है लेकिन पाप नहीं.
#3. अपनी पसंद का जीवन साथी
फिल्म में जब सैफ वापस प्रीति की जिंदगी में आते हैं तब प्रीति उनसे सिर्फ इसलिए शादी नहीं करना चाहती कि वो उनके बच्चे का असली बाप है, उनके दिमाग में चीज़ों को ठीक करने का ख्याल एक मिनट के लिए आता है. फिर जल्द ही उन्हें ये एहसास हो जाता है कि वो इस आदमी की इज़्ज़त नहीं करती क्योंकि ये वही आदमी है जिसने उनकी प्रेग्नेंसी के वक़्त उसका साथ नहीं दिया था और बच्चे को अबोर्ट करने की बात कही थी.
'क्या कहना' के एक सीन में प्रेग्नेंट प्रीति के साथ चंद्रचूड़ सिंह.
'क्या कहना' के एक सीन में प्रेग्नेंट प्रीति के साथ चंद्रचूड़ सिंह.

सैफ के बदले उन्होंने उस आदमी को चुना जो उस वक़्त उनके बच्चा पैदा करने के फैसले की इज़्ज़त करते हुए उनके साथ था. उन्होंने उस सीन में एक बड़ी अच्छी और ज़रूरी बात कही थी कि 'शादी में प्यार के साथ एक दूसरे का सम्मान भी बहुत जरूरी है'.
#4. अनचाही प्रेग्नेंसी की स्वीकार्यता
फिल्म में पहले तो बिलकुल टिपिकल तरीके से 'बिन ब्याही मां' का तमगा देकर प्रीति को उनके मां-बाप घर से निकाल देते हैं, लेकिन फिर वही परिवार 'बेटी मां बनने वाली है' की समझदारी के साथ उनको वापस लेकर भी आता है. किसी भी छोटे शहर के मिडिल क्लास परिवार के लिए अपनी बिन ब्याही बेटी की शादी बहुत ही बड़ी बात होती है. ये उनके उनके इज़्ज़त पर धब्बे जैसा होता है.
फिल्म 'क्या कहना' के एक सीन में अपनी बेटी प्रीति को समझाते अनुपम खेर.
फिल्म 'क्या कहना' के एक सीन में अपनी बेटी प्रीति को समझाते अनुपम खेर.

लेकिन स्थिति को समझकर बेटी का साथ देना और बच्चा पैदा करने के उसके फैसले को सम्मान देना सच में बहुत ही अच्छी चीज़ थी. लेकिन ये फिल्म उन पैरेंट्स के दुख और गुस्से से लेकर प्यार और सपोर्ट तक की जर्नी का लेखा-जोखा है. अपनी शादी से बाहर या उसके पहले बच्चा पैदा करना इंडिया में किसी का व्यक्तिगत विचार या फैसला नहीं हो सकता. इसमें लड़की और लड़की का परिवार फंस जाता है और लड़का बिना किसी फ़िक्र के खुला घूमता रहता है.
ऐसा नहीं है कि 'क्या कहना' बिलकुल सही फिल्म थी और इसमें कोई गलतियां नहीं थी. लेकिन हमें ये भी मानना पड़ेगा कि सेक्स, प्रेग्नेंसी और उनके शोषण जैसे मुद्दों पर बात करने वाली ये फिल्म एक बोल्ड फिल्म थी. इस फिल्म ने एक ऐसे दौर की शुरुआत की जिसे लगातार आगे बढ़ाया जाना चाहिए. और ऐसा हो रहा है.
 


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