गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) के डॉक्टर्स के साथ मीटिंग की. वीडियो कॉल पर. उनके काम की तारीफ की और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है. मंत्रियों ने ये भी कहा कि डॉक्टर्स और मेडिकल वर्कर्स को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाएगी. इसके अलावा 'सिम्बॉलिक प्रोटेस्ट' खत्म करने की भी अपील की.
अमित शाह ने डॉक्टर्स से मीटिंग में ऐसा क्या कहा कि उनका गुस्सा शांत हो गया
डॉक्टरों ने अपना प्रोटेस्ट वापस ले लिया है.

सफल रही मीटिंग
मीटिंग के बाद IMA ने प्रोटेस्ट वापस लेने का ऐलान कर दिया. ट्विटर पर एक लेटर डाला. जिसमें बताया कि गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने IMA और पूरी मेडिकल कम्युनिटी के कामकाज, उनके योगदान की तारीफ की. खासतौर पर अमित शाह इस मामले पर काफी जागरूक और चिंतित दिखे. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी. दोनों मंत्रियों ने सिम्बॉलिक प्रोटेस्ट वापस लेने की अपील की.
IMA की तरफ से जारी लेटर में आगे कहा गया,
'वैश्विक संकट का वक्त चल रहा है, यहां हममें से हर कोई फ्रंटलाइन पर इस संकट से लड़ रहा है, ऐसे में इस तरह के प्रोटेस्ट देश की एकता को लेकर गलत संदेश देंगे. इससे देश की छवि दुनियाभर में खराब होगी. सरकार के उच्च स्तर से हमें अच्छा रिस्पॉन्स मिला, जिसके बाद हमने 22 अप्रैल को होने वाले व्हाइट अलर्ट प्रोटेस्ट और 23 अप्रैल को होने वाले 'ब्लैक डे' प्रोटेस्ट को वापस लेने का फैसला किया है. देश की एकता और अखंडता बरकरार रखने के लिए.'
क्या है मामला?
दरअसल, कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच देश के कई हिस्सों से डॉक्टर्स और हेल्थ केयर वर्कर्स पर हमले की घटनाएं सामने आई थीं. इन हमलों के खिलाफ IMA ने सिम्बॉलिक प्रोटेस्ट का ऐलान किया था. सभी डॉक्टर्स और अस्पतालों से अपील की थी कि वो 22 अप्रैल को रात 9 बजे, सफेद कोर्ट पहनकर मोमबत्ती जलाएं. इस प्रोटेस्ट को 'व्हाइट अलर्ट' नाम दिया था. 23 अप्रैल को 'ब्लैक डे' प्रोटेस्ट करने की घोषणा की थी. इसी पर 22 अप्रैल की सुबह अमित शाह और डॉ हर्षवर्धन ने मीटिंग की और मसले का हल निकाला.
वीडियो देखें: कोरोना के संदिग्धों को ले जाने आए डॉक्टर्स और हेल्थ केयर वर्कर्स पर हमला हुआ













