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शेफाली शाह के साथ तलाक पर बोले हर्ष छाया, "साथ रह कर एक-दूसरे का खून चूसने का क्या मतलब है..."

हर्ष छाया ने कहा, "जिस वक्त हमसे कहा गया कि अब और तुम्हारे साथ नहीं रह सकते हैं, हमको उसके आठ-नौ महीने पहले से मालूम था कि ये कहां जा रहा है."

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शेफ़ाली शाह और हर्ष छाया ने ज़ी टीवी के सीरियल 'हसरतें' में साथ काम किया था.

Harsh Chhaya... हिंदी सिनेमा के समृद्ध कलाकारों में ये भी नाम भी बड़े अदब से लिया जाता है. और इससे जुड़ी सबसे ताज़ा तस्वीर उस नशेड़ी, पशुवत माफ़िया की है, जो बात-बेबात गालियां देता है. ये वो किरदार है जो हर्ष छाया ने वेब सीरीज़ Undekhi में निभाया. पापाजी को वो जी गए. मगर उनकी असल शख्सियत इस किरदार से बिल्कुल अलग है. वो संजीदा भी हैं और स्पष्टवादी भी. लाग-लपेट कर कुछ नहीं कहते. चाहे फिर सवाल जीवन के नितांत निजी पहलू से ही क्यों न जुड़ा हो. जवाब सीधा-साफ़ ही आएगा. हाल ही में जब हर्ष छाया दी लल्लनटॉप के ख़ास कार्यक्रम ‘गेस्ट इन द न्यूज़रूम’ में आए, तो ज़िंदगी की किताब का हर सफ़्हा खुला. वो हिस्सा भी पढ़ा गया जो उनकी एक्स वाइफ़ और एक्टर Shefali Shah से जुड़ा है. शेफ़ाली के साथ अपने रिश्ते और अलगाव से जुड़ी हर बात हर्ष ने साफ़दिली से रखी. और ये भी स्वीकार किया कि उनके लिए ये आसान नहीं था. इससे बाहर आने में कई महीने बीत गए. अलगाव से जुड़ा ये सवाल कुछ संकोच के साथ पूछा गया. मगर हर्ष ने जवाब नि:संकोच दिया. उन्होंने कहा,

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“अब इसमें से कितना ही बच-बचाकर निकलना चाहें, पर जहां तक हमारा केस है, बड़ा सीधा-साफ़ था. हमको तो दिख ही रहा था कि ये रिश्ता ख़त्म होने वाला है. जिस वक्त हमसे कहा गया कि अब और तुम्हारे साथ नहीं रह सकते हैं, हमको उसके आठ-नौ महीने पहले से मालूम था कि ये कहां जा रहा है. तो हम तो पहले से ही तैयार थे.”

निजी जीवन की ऊहापोह के बीच काम प्रभावित हुआ या नहीं, इस बारे में हर्ष ने कहा,

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“हमारा बड़ा सीधा हिसाब था कि ठीक है, हमको मालूम होगा कि क्या हो रहा है. लेकिन हम उसमें अपना दिमाग नहीं ख़राब करना चाहते. यानी मैं अपने काम पर ध्यान दूंगा. मैं अपने आप पर ध्यान दूंगा. मैं उससे नहीं भटकने वाला. क्योंकि... मैं सब छोड़कर दिल्ली... क्या बुरे थे दिल्ली में, अपने मां-बाप के घर पर रहते थे! हम तो काम भी कर रहे थे. सब तो चल ही रहा था. तो छोड़कर बम्बई क्यों आए थे? काम के लिए. तो वो नहीं छूटेगा. सौभाग्य से मैं ऐसे स्पेस से आता हूं, जहां इतनी आसानी से आप हमको हिला नहीं सकते.”

# अलगाव के बाद डेट्स पर जाना फॉर्मूला बना लिया 

हर्ष ने बताया कि तलाक के बाद का दौर आसान नहीं था. इस दौरान उन्होंने नए दोस्त बनाए. उनसे दुख बांटा. डेट्स पर भी गए. पूरी बात बताते हुए हर्ष ने कहा, 

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“आप मेरी इसे मेरी फ़ितरत कह लें, मेरा स्वभाव कह लें. मगर मेरा मानना है कि जहां तक हो सके, आपको ये कोशिश करनी है कि आप बौरा न जाएं. और अगर आपको परेशानी हो रही है, तो उस परेशानी को जिएं. ज़बरदस्ती ख़ां बनने की ज़रूरत नहीं है. मतलब जैसे मुझे दिक्कत थी , तो मैं छह महीने उस दिक्कत में खुलकर रह चुका हूं. मैं उसका अफ़सोस मना चुका हूं. उस पर झल्ला चुका हूं. चिल्ला चुका हूं. ऐसा कुछ पांच-महीने चला होगा. फिर ए‍क दिन मैंने देखा कि यार आप परेशान हैं और हर आदमी आपकी वो कहानी सुनने के लिए तैयार है. तो मैंने एक जगह देखा कि आज यहां बैठे थे, और कुछ आधे घंटे हमारी बात हुई. उन्होंने मेरा दु:ख बांटा. और उसके बाद हम डेट पर चले गए. एक बार हुआ, दो बार हुआ. फिर मैंने उसका फॉर्मूला बना लिया. अब आप कह लें कि ये तरीक़ा था उससे डील करने का, या बदमाशी थी. जो भी मानें. हां, पर वैसा भी नहीं था कि बहुत प्यार में पड़ गए किसी के. हमको लगा आज यहां बैठे हैं, इसने कुछ सहानुभूति दिखाई. डेट पर चले गए. कल उधर बैठे हैं. उसके साथ चले गए. इतना कहते हुए होठ कुछ सूख से गए थे उनके. फिर एक पॉज़ लिया और बोले ऐसा दो-तीन महीने चला.”

हर्ष का मानना है कि जो हो रहा है, उससे भागना नहीं, बल्कि उससे जज़्ब करना ही सही है. उन्होंने कहा,

“मेरे एक दोस्त हैं. उन्होंने एक दिन मुझसे कहा कि ये बहुत हो गया यार. कितना बार एक ही एक बात करोगे. और मुझे भी लगा कि हो गया अब. छह-सात महीने सब निचोड़ लिया ना. और कितना निचोड़ेंगे? ठीक है ख़त्म करो... वक्त लगता है. वो होता है ना कि मैं कितना बहादुर हूं. मुझे कुछ नहीं होता है. इसकी ज़रूरत नहीं है. आप जो भी महसूस कर रहे हैं, उससे गुज़र लें. उसको होने दें.”

शेफ़ाली से तलाक़ की बात पर हर्ष ने ये भी बताया कि वो रिश्तों में आए सन्नाटे और अलगाव पर क्या राय रखते हैं. उन्होंने कहा,

“कोई भी दो लोग 24 घंटे रोज़ साथ रहें, ये नामुमकिन ही है. मैं अपने क्लोन के साथ भी 24 घंटे 365 दिन नहीं रह पाऊंगा. ये बहुत मुश्किल है. मेरे लिए तलाक कोई बड़ी बात नहीं है. बल्कि तलाक होना है तो जल्दी हो जाए. बजाय बिना मतलब खिंचने के. जैसे हम लोगों ने तय किया तो वो बैक डेट हो गया. जैसे वो रहता है ना कानून कि इतने महीने अलग रहना पड़ेगा. जब तय हो गया तो हमने एप्लिकेशन बैक डेट करवा ली. कि हम छह महीने से अलग रह ही रहे हैं. और उसको जल्दी निपटा दिया गया. और मैं तो यही मानता हूं कि इस तरह से साथ रहना, लगभग नामुमकिन ही है. साथ रह कर एक-दूसरे का खून चूसने का क्या मतलब है.”

हर्ष छाया और शेफ़ाली की शादी साल 1994 में हुई. छह साल बाद साल 2000 में दोनों अलग हो गए. अब हर्ष की जीवनसंगिनी कोलकाता की मशहूर एक्टर सुनीता सेनगुप्ता हैं. और शेफाली बीते दो दशक से डायरेक्टर विपुल शाह के साथ वैवाह‍िक बंधन में हैं. हर्ष और शेफ़ाली ने ज़ी टीवी के शो ‘हसरतें’ में साथ काम किया था. हर्ष के बॉडी ऑफ वर्क की बात करें, तो साल 2000 में आई ‘दिल प मत ले यार’ उनकी पहली फिल्म थी. फिर ‘कंपनी’, ‘भेजा फ्राय’, ‘फैशन’, और ‘जॉली LLB’ में भी उन्होंने छोटे मगर असरदार किरदार निभाए. लक्ष्य लालवानी की ‘किल’ में भी हर्ष थे, मगर उसमें उनका ख़ास इस्तेमाल नहीं किया गया. ‘अनदेखी’ से उन्होंने वो मक़बूलियत हासिल हुई, जिसके वो असल हक़दार थे. हाल ही में इस शो का चौथा सीज़न आया है, जिसे आप सोनी लिव पर स्ट्रीम कर सकते हैं. 

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