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'लापता लेडीज़' ऑस्कर्स से बाहर हुई, तो उससे चुनने वाली FFI ज्यूरी हेड ने क्या सफाई दी?

Kiran Rao की फिल्म Laapataa Ladies Oscars 2025 की रेस से बाहर निकली तो उसे चुनने वाली FFI ज्यूरी हेड ने All We Imagine As Light की बुराई करने लगे.

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'लापता लेडीज़' को इंडिया की तरफ से इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए ऑस्कर्स भेजा गया था.

Aamir Khan और Kiran Rao की फिल्म Laapataa Ladies Oscars 2025 की रेस से बाहर निकल चुकी है. जिसके बाद से ही हंसल मेहता समेत कई लोगों ने Film Federation of India पर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया.   अब FFI ज्यूरी के हेड ने 'लापता लेडीज़' के ऑस्कर्स से बाहर जाने और लोगों का FFI के प्रति गुस्सा ज़ाहिर करने को लेकर बात की है.

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97वें एकेडमी अवॉर्ड्स ने पिछले दिनों इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की शॉर्टलिस्ट की हुई 15 फिल्मों के नाम की लिस्ट जारी की. जिसमें कहीं भी 'लापता लेडीज़' का नाम नहीं था. इसी के बाद से FFI के इस फिल्म को इंडिया की तरफ से ऑस्कर्स के लिए भेजने के उनके फैसले को लेकर लोगों ने नाराज़गी ज़ाहिर करनी शुरू कर दी. लोगों का कहना था कि 'लापता लेडीज़' की जगह पायल कपाड़िया की फिल्म 'ऑल वी इमैजिन एज़ लाइट' ऑस्कर्स में भेजे जाने के ज़्यादा काबिल थी. लोगों के इसी गुस्से पर बोलते हुए FFI के ब्यूरो चीफ Jahnu Baruaa ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा,

''ये बिल्कुल भी उचित नहीं है. लोग ऐसा क्यों बोल रहे हैं. ये बहुत दुर्भाग्य की बात है. लोगों को ज्यूरी के निर्णय को मानना चाहिए. मेरी खुद की फिल्में बहुत से अवॉर्ड्स शोज़ में जाती हैं. कई जगह उन्हें अवॉर्ड मिलता है. कई जगह नहीं मिलता. मगर इसका ये मतलब नहीं कि मैं उस पूरे प्रॉसेस को नेगेटिव तरीके से देखूं. हमें उस प्रोसेस के लिए रिस्पेक्टफुल होना चाहिए.''

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बरुआ ने इस चीज़ पर तो कमेंट नहीं किया कि 'लापता लेडीज़' ऑस्कर्स की रेस में आगे क्यों नहीं जा पाई. मगर उन्होंने ये ज़रूर बताया कि इस फिल्म को इंडिया की तरफ से ऑस्कर्स के लिए क्यों भेजा गया था. उन्होंने कहा,

''लोगों को ये समझना होगा कि ये सेलेक्शन बिल्कुल डेमोग्रैटिक था. लोगों को ये फैसला स्वीकार करना चाहिए. हमारी ज्यूरी को लग रहा था कि पिछले सालों में जो फिल्में इंडिया की तरफ से ऑस्कर्स में गई हैं उनमें देसी पन कहीं ना कहीं मिसिंग था. फिल्म ऐसी होनी चाहिए जो आपके देश को रिप्रेजेंट कर सके. हमें लगा था कि 'लापता लेडीज़' में वो सारे एलिमेंट्स थे. इस फिल्म में सारे सोशल मुद्दों को बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया था.''

पायल कपाड़िया की 'ऑल वी इमैजिन एज़ लाइट' को लेकर भी बरुआ ने बात की और उस फिल्म को टेक्निकली खराब बताया. कहा,

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''ज्यूरी को ये लगा कि वो फिल्म टेक्निकली खराब थी. इसलिए उसका सेलेक्शन नहीं किया गया.''

वैसे 'ऑल वी इमैजिन एज़ लाइट' को गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड 2025 में दो नॉमिनेशन्स मिले हैं. बेस्ट नॉन इंग्लिश फिल्म कैटेगरी में. साथ ही पायल कपाड़िया को बेस्ट डायरेक्टर की कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया है. ये फिल्म बहुत सारे फिल्म फेस्टिवल में घूम चुकी है. इसकी पूरी टीम को उसके काम के लिए सराहा जा चुका है. 

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