1. अरविंद केजरीवाल
क्योंकि आइडिया उनका है. इसलिए सबसे पहले उन्हें ही कंसीडर किया जाए. चुनाव आयोग आने वाले हर चुनाव में मतदाता को जागरुक करते वक़्त केजरीवाल का चेहरा सामने रखे. इससे जनता में संदेश जाएगा. अपना वोट सोच-समझकर दें. जोश-जोश में वोट देने का ऐसा परिणाम मिल सकता है. ये एक चेतावनी जैसा भी होगा, नेता चुनें तो अपनी जिम्मेदारी पर, क्योंकि उसे पांच साल आपको ही झेलना है. एक बात और जो केजरीवाल के ब्रांड एम्बेसडर बनते ही तय हो जाएगी वो ये कि लोग मुफ्त की चीजों के लिए वोट करने का सोचने के पहले सौ बार उनकी तस्वीर देखेंगे.
2. नरेंद्र मोदी
क्योंकि इनका चेहरा हर कोई इस्तेमाल कर लेता है. चुनाव आयोग अगर नरेंद्र मोदी को ब्रांड एम्बेसडर बनाए तो खर्चा भी कम आएगा, आखिरी बार जब जियो ने उनकी तस्वीर इस्तेमाल की थी तो बस 500 ही तो लगे थे. पीएम की फोटो यूज करने के बाद जनता में ये संदेश जाएगा कि अपना नेता बदलते वक़्त सावधान रहें, आप बदलकर जिसे ला रहे हैं, वो एक दिन में आपकी ज़िंदगी भी बदल सकता है.
3. राहुल गांधी
राहुल गांधी चुनाव आयोग के ब्रांड एम्बेसडर बनने के लिए सबसे बेहतर हैं. कांग्रेस के काम नहीं आ रहे चुनाव आयोग के ही काम आएंगे. साथ ही राहुल में ये भी अच्छा है कि उनके ब्रांड एम्बेसडर बनने पर कोई सवाल नही उठेगा. ये भी नहीं कहा जाएगा कि किसी पार्टी को इस वजह से फायदा हो रहा है. उनकी तस्वीर इस्तेमाल कर चुनाव आयोग जनता को संदेश देगा, किसी नेता को वोट देते वक़्त अच्छे से सोचिए. भले नेता ने, नेता बनने के पहले इतना न सोचा हो.
4. ममता बनर्जी
ममता बनर्जी को ब्रांड एम्बेसडर बनाने के बाद मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा. जनता को खुद इस बात का इलहाम होगा कि उनका वोट कितना जरुरी है. खुद दें नहीं तो पड़ोसी दे आएगा. पड़ोसी नहीं तो पड़ोसी देश का कोई दे आएगा. ममता बनर्जी को ब्रांड एम्बेसडर बना चुनाव से जुड़े कागजातों की महत्ता भी समझाई जा सकेगी. वोटर को पता होगा, वोटर आईडी और आधार कार्ड कितने जरूरी हैं, देखिए अब तो बांग्लादेशियों ने भी बनवा लिए हैं.
5. अखिलेश यादव
अखिलेश यादव एक सीख हैं. सीख ये कि वोटर अपने फैसले खुद ले. अपना वोट खुद दे, किसी के दबाव में नहीं. खासतौर पर घरवालों के दबाव में तो बिल्कुल नहीं. अखिलेश यादव ये सीख भी देंगे कि सीएम चुनें तो एक चुनें साढ़े पांच नहीं. अखिलेश यादव ब्रांड एम्बेसडर इसलिए भी बन जाने चाहिए कि जनता खुद चुन सके, उसे फ्री की चीजों, फ्री लैपटॉप या चैन की सांस में क्या ज्यादा पसंद है.
ये भी पढ़ें. 10 क्रिकेटर जिन्हें फ़िक्सिंग के अलावा किसी मामले में जेल जाना पड़ा दल बदलने से पहले नेता करें ये 5 काम, तब पक्का होगा टिकट और जीत











