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चुनाव आयोग को चाहिए इन सबको ब्रांड एम्बेसडर बना ले

नेताओं को ब्रांड एम्बेसडर बनाना चाहिए. जैसे धूम्रपान निषेध वाले विज्ञापन में कैंसर पेशेंट को चुना जाता है

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फोटो - thelallantop
केजरीवाल ने मांग की कि उन्हें चुनाव आयोग अपना ब्रांड एम्बेसडर बना ले. ये मांग तब की जब चुनाव आयोग ने उनके एक बयान पर रोक लगा दी. ये ऐसा है कि जैसा मास्टर किसी बच्चे को शैतानी पर फटकारने बुलाए और बच्चा खुद को मॉनीटर बनाने की जिद करने लग जाए. लेकिन चुनाव आयोग को इस बारे में सोचना चाहिए, चुनाव आयोग को नेताओं के बीच से ही अपने ब्रांड एम्बेसडर चुनने चाहिए. ठीक वैसे ही जैसे धूम्रपान निषेध वाले विज्ञापन में किसी कैंसर पेशेंट को चुना जाता है. 15 दिन में मोटा करने वाले दवाई के लिए किसी दुबले आदमी को चुना जाता है. चुनाव आयोग को इन विकल्पों पर भी गौर करना चाहिए.

1. अरविंद केजरीवाल

क्योंकि आइडिया उनका है. इसलिए सबसे पहले उन्हें ही कंसीडर किया जाए. चुनाव आयोग आने वाले हर चुनाव में मतदाता को जागरुक करते वक़्त केजरीवाल का चेहरा सामने रखे. इससे जनता में संदेश जाएगा. अपना वोट सोच-समझकर दें. जोश-जोश में वोट देने का ऐसा परिणाम मिल सकता है. ये एक चेतावनी जैसा भी होगा, नेता चुनें तो अपनी जिम्मेदारी पर, क्योंकि उसे पांच साल आपको ही झेलना है. एक बात और जो केजरीवाल के ब्रांड एम्बेसडर बनते ही तय हो जाएगी वो ये कि लोग मुफ्त की चीजों के लिए वोट करने का सोचने के पहले सौ बार उनकी तस्वीर देखेंगे. Kejriwal e c

2. नरेंद्र मोदी

क्योंकि इनका चेहरा हर कोई इस्तेमाल कर लेता है. चुनाव आयोग अगर नरेंद्र मोदी को ब्रांड एम्बेसडर बनाए तो खर्चा भी कम आएगा, आखिरी बार जब जियो ने उनकी तस्वीर इस्तेमाल की थी तो बस 500 ही तो लगे थे. पीएम की फोटो यूज करने के बाद जनता में ये संदेश जाएगा कि अपना नेता बदलते वक़्त सावधान रहें, आप बदलकर जिसे ला रहे हैं, वो एक दिन में आपकी ज़िंदगी भी बदल सकता है. modi ec

3. राहुल गांधी

राहुल गांधी चुनाव आयोग के ब्रांड एम्बेसडर बनने के लिए सबसे बेहतर हैं. कांग्रेस के काम नहीं आ रहे चुनाव आयोग के ही काम आएंगे. साथ ही राहुल में ये भी अच्छा है कि उनके ब्रांड एम्बेसडर बनने पर कोई सवाल नही उठेगा. ये भी नहीं कहा जाएगा कि किसी पार्टी को इस वजह से फायदा हो रहा है. उनकी तस्वीर इस्तेमाल कर चुनाव आयोग जनता को संदेश देगा, किसी नेता को वोट देते वक़्त अच्छे से सोचिए. भले नेता ने, नेता बनने के पहले इतना न सोचा हो. rahul ec

4. ममता बनर्जी

ममता बनर्जी को ब्रांड एम्बेसडर बनाने के बाद मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा. जनता को खुद इस बात का इलहाम होगा कि उनका वोट कितना जरुरी है. खुद दें नहीं तो पड़ोसी दे आएगा. पड़ोसी नहीं तो पड़ोसी देश का कोई दे आएगा. ममता बनर्जी को ब्रांड एम्बेसडर बना चुनाव से जुड़े कागजातों की महत्ता भी समझाई जा सकेगी. वोटर को पता होगा, वोटर आईडी और आधार कार्ड कितने जरूरी हैं, देखिए अब तो बांग्लादेशियों ने भी बनवा लिए हैं. mamta ec

5. अखिलेश यादव

अखिलेश यादव एक सीख हैं. सीख ये कि वोटर अपने फैसले खुद ले. अपना वोट खुद दे, किसी के दबाव में नहीं. खासतौर पर घरवालों के दबाव में तो बिल्कुल नहीं. अखिलेश यादव ये सीख भी देंगे कि सीएम चुनें तो एक चुनें साढ़े पांच नहीं. अखिलेश यादव ब्रांड एम्बेसडर इसलिए भी बन जाने चाहिए कि जनता खुद चुन सके, उसे फ्री की चीजों, फ्री लैपटॉप या चैन की सांस में क्या ज्यादा पसंद है. akhilesh ec
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