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लॉकडाउन में 'लक्ष्मण रेखा' नहीं लांघनी है, पर रामायण में ऐसी कोई रेखा है क्या?

PM मोदी ने दी थी 'लक्ष्मण रेखा' पार न करने की हिदायत.

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सांकेतिक फोटो
24 मार्च की रात ठीक आठ बजे. कोरोना के खौफ के बीच हर कोई ये जानना चाहता था कि अबकी क्या बोलेंगे पीएम नरेंद्र मोदी. पीएम ने जो कहा, उसका सार ये था कि देश में अगले 21 दिन तक कोई अपने घर से न निकले. देहरी के बाहर खिंची 'लक्ष्मण रेखा' पार न करे. उन्होंने लोगों को आगाह करने के लिए जिस 'लक्ष्मण रेखा' का जिक्र किया, आखिर वो क्या है? कहानी तो सबने सुनी है, लेकिन क्या रामायण या किसी ग्रंथ में ऐसी रेखा का जिक्र है? टॉपिक पर आने से पहले 'रामायण' के पन्ने पलटने से पहले कुछ चकल्लस, लेकिन कायदे की बात. टीवी पर एक ऐड आता है. लिखने में इस्तेमाल होने वाले सफेद चौक जैसा एक प्रोडक्ट.. 'लाइन कर गई ऐसा काम, कॉकरोचों का हुआ काम तमाम.' प्रॉडक्ट का असर बताने के लिए उसका नाम रख दिया 'लक्ष्मण रेखा'. दावा है कि इसे पार करने वाले कॉकरोच और चींटियां तुरंत दम तोड़ देते हैं. लेकिन आज इंसानों के घर के आगे जो 'लक्ष्मण रेखा' खिंची है, उसे लांघना कहीं ज्यादा मारक हो सकता है. देखिए कैसे. अगर एक चींटी या एक कॉकरोच लाइन पार करता है, तो केवल उसी की जान पर बनती है. लेकिन अगर आज एक आदमी अपने घर के बाहर कदम रखता है, तो वो अपने साथ-साथ कई लोगों की जान के लिए खतरा पैदा कर सकता है. 10, 20, 100, हजार, कितनों के लिए, पक्के तौर पर कोई नहीं जानता. वाल्मीकि 'रामायण' में क्या है अब बात रामकथा की. क्या महर्षि वाल्मीकि ने अपनी 'रामायण' में लक्ष्मण की खींची किसी रेखा का जिक्र किया है? जवाब है- नहीं. पहले पूरा प्रसंग देखते हैं. सीता के कहने पर राम स्वर्णमृग लाने चले गए, लक्ष्मण ने सीता को समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वो मानीं नहीं. आखिर लक्ष्मण को लाचार होकर सीता को कुटिया में अकेले छोड़कर जाना पड़ा. मौक पाकर रावण सीता के पास आया. दोनों के बीच विस्तार से बातें हुईं. सीता के न मानने पर रावण उन्हें हरकर ले गया. वाल्मीकि 'रामायण' में इस प्रसंग को बहुत ही विस्तार से बताया गया है, लेकिन किसी 'लक्ष्मण रेखा' का वर्णन नहीं है. Valmiki Ramayanगीताप्रेस, गोरखपुर से छपी वाल्मीकि 'रामायण' में ये प्रसंग देखा जा सकता है वाल्मीकि 'रामायण' के मुताबिक, रावण को ब्राह्मण के वेष में आया देखकर सीता ने उसका स्वागत-सत्कार किया. भद्र मालूम पड़ रहे अतिथि को सीता ने आसन दिया. पैर धोने के लिए पानी दिया. फिर उन्होंने खाने को फल भी दिए. इस प्रसंग से ये पता चलता है कि अगर लक्ष्मण ने कोई रेखा खींची होती, तो रावण कुटिया के भीतर इस तरह जाकर सीता का आतिथ्य स्वीकार नहीं कर पाता. आगे रावण सीता को तरह-तरह के प्रलोभन देता है. जब वो नहीं डिगती हैं, वो सीता को जबरन लंका ले जाता है.  'महाभारत' में भी नहीं है रेखा महर्षि वेद व्यास ने 'महाभारत' की रचना की है. इसके 'वनपर्व' में राम की कथा आती है. सीताहरण का भी प्रसंग है. लेकिन लक्ष्मण की रेखा का वर्णन इसमें भी नहीं है. क्या तुलसीदास के मानस में है ये रेखा? जवाब है- हां. पर कहां? 'जहां उम्मीद हो इसकी, वहां नहीं मिलता' टाइप. मतलब सीता-हरण का प्रसंग 'अरण्यकांड' यानी जंगल से जुड़ा है. लेकिन वहां तुलसीदास ऐसी कोई रेखा खींचे जाने का तनिक भी जिक्र नहीं करते हैं. इस रेखा का जिक्र आता है 'लंकाकांड' में.
कंत समुझि मन तजहु कुमतिही । सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही ॥ रामानुज लघु रेख खचाई । सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई ॥
रावण की पटरानी मंदोदरी रावण को खूब समझाती है. कहती है,
'हे स्वामी, जरा विचार कीजिए. कुबुद्धि त्याग दीजिए. श्रीराम और आपके बीच युद्ध शोभा नहीं देता. राम के छोटे भाई (लक्ष्मण) ने एक छोटी-सी रेखा खींच दी थी आपके आगे. उसको आप लांघ नहीं पाए थे. यही तो आपका पुरुषार्थ है!'
मतलब, तुलसीदास जी ने जो 'नानापुराणनिगमागमसम्मत' रामचरितमानस रचा है, उसमें ये रेखा है. वे शुरुआत में ही कह देते हैं कि उन्होंने वही लिखा है, जो पुराणों में है. वही लिखा, जो अपने गुरुओं से सीखा है. जो मान्यताएं पहले से चल रही हैं, उन्हें भी जगह दी है. तर्क-वितर्क-कुतर्क कुछ लोग ऐसा तर्क देते हैं कि जब मंदोदरी सीताहरण के समय मौजूद ही नहीं थीं, तो उन्हें रेखा खींचे जाने की बात कैसे पता? ये तर्क बेदम मालूम पड़ता है. पहली बात तो ये कि मंदोदरी रावण की पटरानी थीं. रावण ने उन्हें अपनी सैकड़ों गौरव-गाथाएं सुनाई होंगी. दूसरी बात ये कि रामायण आस्था का ग्रंथ है, जो पारलौकिक बातें भरी पड़ी हैं. 'रामायण' सीरियल में सबने देखी रेखा रामानंद सागर ने जो टीवी सीरियल बनाया, उसमें अच्छे तरीके से लक्ष्मण रेखा वाला प्रसंग दिखाया गया है. आप उसे यूट्यूब पर आसानी से खोजकर देख सकते हैं. बाकी आज के वक्त की जरूरत है. कोरोनासुर से देश को बचाना है, तो 'लक्ष्मण रेखा' पार मत कीजिए.
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