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आखिर वो रिपोर्ट है क्या, जिसके कारण तीन बड़े IRS अधिकारियों पर गाज गिर गई

रिपोर्ट में कोरोना के वक्त टैक्स बढ़ाने की बात भी कही गई थी.

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इनकम टैक्स विभाग ने तीन IRS अधिकारियों के खिलाफ बिना अथॉरिटी के FORCE रिपोर्ट बनाने और पब्लिक करने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की. (फोटो क्रेडिट- इंडिया टुडे/ वो रिपोर्ट जिसकी वजह से बवाल हुआ (IRS एसोसिएशन का ट्विटर अकाउंट)

एक और खबर को लेकर खूब तहलका मच रहा है. देश के 50 IRS अफसरों ने मिलकर एक रिपोर्ट सरकार को भेजी थी कि कोरोना संकट से निपटने के लिए क्या फैसले लिए जाने चाहिए. इसके बाद सरकार ने इन IRS अफसरों के खिलाफ ही जांच शुरू कर दी. तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट भी फाइल कर दी. तीनों के ऊपर बिना किसी अथॉरिटी के कोविड-19 टैक्स की रिपोर्ट को तैयार करने और पब्लिक करने के आरोप लगे हैं.

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इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों का कहना है, 'कोरोना की वजह से पहले से ही तनाव पसरा हुआ है. ऐसे में इस रिपोर्ट ने और भी ज्यादा तनाव बढ़ा दिया. साथ ही टैक्स पॉलिसी की अनिश्चिचता का माहौल बना दिया.'

कौन हैं ये तीन अधिकारी?

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प्रशांत भूषण- 1988 बैच के IRS हैं. IRS एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी हैं. प्रकाश दुबे- 2001 बैच के हैं. डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के डायरेक्टर हैं. IRS एसोसिएशन के जॉइंट सेक्रेटरी हैं. संजय बहादुर- 1989 बैच के अधिकारी हैं.

फिलहाल के लिए इन तीनों अधिकारी से इनके मौजूदा काम वापस ले लिए गए हैं. तीनों को नोटिस भजकर 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया है.

क्यों ऐसा किया? पूरी क्रोनोलॉजी समझिए.

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देश के IRS अफसरों का एक संगठन है, नाम है IRS एसोसिएशन. इसके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से 25 अप्रैल को एक रिपोर्ट सरकार को भेजने की जानकारी दी गई. रिपोर्ट का नाम -Fiscal Options & Response to Covid-19 Epidemic (फिस्कल ऑप्शन्स एंड रिस्पांस टू कोविड-19 एपिडेमिक) , शॉर्ट में फोर्स. रिपोर्ट पर तारीख है 23 अप्रैल की. और ये तैयार की देश के 50 युवा IRS अफसरों ने. रिपोर्ट सौंपी गई सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस यानी CBDT. वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू विभाग के तहत CBDT आता है, इनकम टैक्स वाला विभाग समझिए. रिपोर्ट पीएमओ को भी भेजी गई. ये भी खबरें हैं.

IRS एसोसिएशन ने रिपोर्ट CBDT को भेजी, एक कवर लेटर के साथ. इस लेटर की पहली लाइन है-

CBDT ने इकॉनमी रिवाइव करने के लिए हमसे सुझाव मांगे थे.

दूसरी लाइन में लिखा है-

सबके संयुक्त सुझाव तो अभी तैयार नहीं हुए, लेकिन 50 IRS अफसरों ने एक फोर्स नाम से रिपोर्ट तैयार की है.

इसके बाद IRS अफसरों और फोर्स रिपोर्ट की तारीफ है. रिपोर्ट हाथों-हाथ मीडिया में आ गई. ये बात कब की है? शनिवार की. 25 अप्रैल की.

अब आते हैं 26 अप्रैल को. रविवार शाम को उसी IRS एसोसिएशन के ट्विटर हैंडल से एक क्लेरिफिकेशन आया. इसमें लिखा था,

'फोर्स रिपोर्ट सिर्फ 50 IRS अफसरों ने तैयार की है, उसमें हमारी सबकी राय नहीं है'.

आप पूछ सकते हैं ये बात तो कवर लेटर में भी साफ थी, फिर दोबारा क्यों कहना पड़ा? क्योंकि IRS एसोसिएशन के ट्वीट के करीब 2 घंटे बाद इनकम टैक्स ने ट्विटर पर लिखा गया,

'इन अफसरों को रिपोर्ट देने के लिए CBDT या वित्त मंत्रालय ने नहीं कहा था. हमने IRS एसोसिएशन से भी सुझाव नहीं मांगे थे. रिपोर्ट पब्लिक में लीक हुई है, अफसरों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है.'

आप पूछेंगे कि भैया लल्लनटॉप, रिपोर्ट में ऐसा क्या था कि सरकार सुझावों से ही घबरा गई. तो कुछ सुझाव –

पहला- जिनकी सालाना इनकम एक करोड़ से ज्यादा है उन पर 40 परसेंट टैक्स लगाना चाहिए. अभी कितना टैक्स लगाया जाता है? 30 परसेंट. 10 पर्सेंट और बढ़ाने का सुझाव है.

दूसरा- जिनकी सालाना इनकम 5 करोड़ से ज्यादा है उन पर वेल्थ टैक्स भी लगाना चाहिए. वेल्थ टैक्स क्या होता है? अमीरों पर लगने वाला टैक्स. 2015 में सरकार ने इसका प्रावधान हटा दिया था. FORCE वाली रिपोर्ट में इसका सुझाव दिया है.

तीसरा- जिनकी टैक्सेबल इनकम 10 लाख से ज्यादा है, उन पर वनटाइम 4 फीसदी का कोविड रिलीफ सेस लगाना चाहिए.

चौथा- गरीबों को 5-5 हज़ार रुपए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर से दिया जाना चाहिए.

सरकार ने रिपोर्ट खारिज कर दी है. लेकिन सोशल मीडिया वाली बहस सरकार के खारिज करने से नहीं होगी. रिपोर्ट के पक्ष और विपक्ष में खेमे बंटे हुए हैं. आप भी अपने विवेक से तय कर लीजिए कि किसी तरफ हैं. बहरहाल सरकार को ये सुझाव पसंद नहीं आए.


वीडियो देखें: Covid19 पर लगाम लगाने के लिए सरकार को बदलनी होगी रणनीति

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