Ranbir Kapoor की फिल्म Animal का ट्रेलर आया है. आग है आग. पिछले 5-10 सालों में शायद ही ऐसी कोई फिल्म आई हो, जिसका ट्रेलर इतना धुआंधार कटा हो. एकदम रॉ, ऑथेंटिक, पागलपन और अंधे एक्शन से भरा हुआ. इंडियन सिनेमा में शायद ही ऐसा कोई डायरेक्टर रहा है, जिसने साधारण फैमिली बेस्ड कहानी को इतने सिनेमैटिक और हिंसक तरीके से बरता हो. Sandeep Reddy Vanga उस कमी को पूरा करते हैं.
रणबीर कपूर की 'एनिमल' का ट्रेलर, ट्रेलर नहीं आग है आग
Animal Trailer को जिस सीन से खोला और बंद किया गया है, वो फिल्म का मूड साफ कर देता है. अब आपको ये पता है कि इस फिल्म से क्या एक्सपेक्ट करना चाहिए.
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'एनिमल' की कहानी एक बाप-बेटे के बारे में है. काम-धंधे में बिज़ी रहने की वजह से पिता बलबीर सिंह अपने बेटे से दूर रहता है. ये चीज़ बेटे को नेगेटिव तरीके से प्रभावित करती है. मगर वो अपने पिता से नाराज़ होने की बजाय उससे अत्यधिक प्रेम करने लगता है. आसक्त किस्म का प्रेम. ट्रेलर के एक सीन में उस लड़के की पत्नी उससे कहती है- 'पापा के लिए प्यार जोग नहीं, रोग है'. क्योंकि उस लड़के के जीवन का हर फैसला अपने पिता से जुड़ा हुआ है. बलबीर सिंह की भी अपनी हिस्ट्री रही है. उसका अतीत लौटकर आता है. बलबीर सिंह पर हमला होता है. इस घटना के बाद उनका बेटा एक डार्क ज़ोन में चला जाता है. गैंगस्टर तो वो था ही. मगर ये हमला उसके भीतर के जानवर को जगा देता है. वो अपने पिता का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है. उसका ये वहशीपन कहां जाकर रुकता है, ये फिल्म में पता चलेगा.
इंडिया में बाप और बेटे के बीच एक किस्म की दूरी रहती है. 'एनिमल' सिनेमाई ढंग से इस चीज़ को एक्सप्लॉइट करती है. ‘एनिमल’ में रणबीर ने जो किरदार निभाया है, वो एंटी-हीरो है. मगर आप इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते कि वो मानसिक रूप से बीमार कैरेक्टर है. संदीप रेड्डी वांगा ने इतना काम नहीं किया है कि उन्हें जज किया जा सके. मगर उनकी फिल्मों पर उनकी छाप दिखती है. उनका सिनेमा वो नहीं कहता, जो कहा जाना चाहिए. जो आइडियल सिचुएशन है. उनका सिनेमा हमेशा वो कहता है, जो है. मगर सामाजिक बंदिशों की वजह से कहा नहीं जा रहा. या जो संदीप को लगता है कि कहा जाना चाहिए. 'एनिमल' उसका एग्ज़ैजरेटेड वर्ज़न है. 'अर्जुन रेड्डी' और 'कबीर सिंह' के बाद उनकी जो आलोचना हुई, उसे उन्होंने सुना तो, मगर स्वीकार नहीं किया. उलट धमकी दे डाली कि 'वॉयलेंस क्या होता है, मैं अपनी अगली फिल्म में बताऊंगा'. हालांकि उसके बाद उन्होंने अपने सोचने-विचारने के तरीके में कितना बदलाव किया है, ये आपको 'एनिमल' देखने के बाद पता चलेगा.
'एनिमल' खालिस मेनस्ट्रीम सिनेमा है. उस पिक्चर में इमोशंस के अलावा कुछ भी रियल नहीं लगता. मगर संदीप ने एक्टर्स से जो काम निकलवाया है, इसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए. ट्रेलर जिस सीन से खुलता है, वो कमाल है. उस सीन में अनिल कपूर को सिर्फ एक शब्द कहना था- 'पापा'. उसे दोहराना था. मगर वो काफी है ये बताने के लिए कि उस आदमी की रेंज क्या है. रणबीर कपूर के टैलेंट पर कभी किसी को शक नहीं रहा. मगर इस फिल्म में उन्हें एक ऐसा डायरेक्टर भी मिला, जो उनके क्राफ्ट को निखारकर बाहर लाया. ट्रेलर के आखिरी हिस्से में बॉबी देओल नज़र आते हैं. उनका जो पहला शॉट है, वो बहुत इम्पैक्ट पैदा करता है. इस ट्रेलर को जिस सीन से बंद किया गया है, वो फिल्म का मूड साफ कर देता है. अब आपको ये पता है कि 'एनिमल' से क्या एक्सपेक्ट करना चाहिए.
'एनिमल' का ट्रेलर तो शानदार है. बहुत तेज रफ्तार और हॉन्टिंग बैकग्राउंड म्यूज़िक से लैस. मगर इस फिल्म की लंबाई 3 घंटे 21 मिनट है. ऐसे में मेकर्स के लिए ये चुनौती होगी कि पूरे रन टाइम में इस फिल्म को इतनी ही एंगेजिंग और फास्ट पेस्ड बनाए रख पाते हैं या नहीं.
'एनिमल' में रणबीर कपूर, अनिल कपूर, बॉबी देओल, रश्मिका मंदन्ना, अंशुल चौहान, शक्ति कपूर, तृप्ति डिमरी, प्रेम चोपड़ा और सुरेश ओबेरॉय जैसे एक्टर्स नज़र आते हैं. संदीप रेड्डी वांगा ने ये फिल्म डायरेक्ट की है. 'एनिमल' 1 दिसंबर को सिनेमाघरों में उतर रही है. इसी दिन विकी कौशल की मेघना गुलज़ार डायरेक्टेड 'सैम बहादुर' भी रिलीज़ होनी है.






















