
आधार का नंबर मिल गया तो गुरु, वारे-न्यारे हो जाएंगे. फोटो - ट्रेलर
# Aadhaar का ट्रेलर कैसा है? ‘आधार’ अपने आप को लेकर पूरी तरह जागरूक है. अपनी मेसेजिंग की सेंसिटिविटी को भली-भांति समझती है. इसलिए किसी भी सीरियस सीन के साथ एक तंज पिरोया हुआ मिलेगा. जैसे एक सीन है. जहां परशुआ आधार बनवाने जाता है. ऑफिसर बायोमेट्रिक के लिए फिंगरप्रिंट लेता है. पर परशुआ की हाथ की लकीरें धुंधली पड़ चुकी है. स्कैन नहीं हो पाती. इसपर वो जवाब देता है,
"किस्मत का लकीर तो अमीर लोगों के हाथ में होता है ना, गरीब आदमी का लकीर तो उसका काम ही साफ कर देता है".

इसके हाथ में तो लकीर ही नहीं हैं. फोटो - ट्रेलर
कुछ पल के लिए ये डायलॉग शायद सोचने पर मजबूर कर दे. आप अपने हाथ पर उभरती गाढ़ी लकीरें देखने लगें. पर तभी सामने से आता है डायलॉग, जो आपको इस वास्तविकता से खींचकर फिर से अपने कम्फर्ट ज़ोन में ले आएगा. ऑफिसर जवाब देता है, पिक्चर बहुत देखते हो बेटा, दबादब डायलॉग पेल रहे हो.
फिल्म एक और फ़र्क पर बात करती है. जिसपर कितने ही कवि बात कर-कर थक गए. इंडिया और भारत का फ़र्क. जैसे जब सरकारी अफसर आधार की जानकारी देने आते हैं. बताते हैं कि इस मूवमेंट से भारत अब इंडिया बनने जा रहा है. परशुआ हैरान होकर बगल वाले से पूछता है. भारत और इंडिया एक ही देश हैं कि अलग-अलग हैं? यहां भी परशुआ का भोलापन एक बात का सूचक है. कि कैसे एक बड़ी जनसंख्या के लिए अभी भी इंडिया एक सपना ही है. फिल्म ने भारत और इंडिया के भेद को सटल नहीं रखा. पूरी तरह उजागर किया है. जैसे एक और सीन है. जहां परशुआ शहर में किसी दुकान के सामने सो रहा है. पुलिसवाले पहुंचते हैं. हाथ में डंडा लिए. परशुआ पूछता है. हम भारत से इंडिया में आए हैं, डंडा क्यूं दिखा रहे हैं साहब?

आधार मतलब नए इंडिया की गारंटी. भारत का देखा जाएगा. फोटो - ट्रेलर
ऐसे ही गांव का एक और किरदार पूछता है,
इतने बरस हो गए आज़ादी मिले, अब तक हमारा गांव इंडिया में ही नहीं घुस पाया क्या?ट्रेलर में जिस भी किरदार ने आधार के गुणगान गाए, उसे इंडिया से जोड़ा. भारत से नहीं. # Aadhaar में कौन-कौन हैं? फिल्म में परशुआ का किरदार निभाया है विनीत कुमार सिंह ने. जिन्हें इससे पहले आप ‘मुक्काबाज़’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘अग्ली’ जैसी फिल्मों में देख चुके हैं. फिल्म में उनके अलावा आपको सौरभ शुक्ला, रघुबीर यादव और संजय मिश्रा जैसे मंझे हुए कलाकार भी दिखेंगे.

गुरुवर संजय मिश्रा गांव के पंडित बने हैं. फोटो - ट्रेलर
# Aadhaar बना कौन रहा है? बना रहे हैं बंगाली फिल्ममेकर सुमन घोष. इससे पहले ‘पोदोखेप’, ‘नोबेल चोर’ और ‘बसु पोरिबार’ जैसी क्रिटिकली अकलेम्ड फिल्में बना चुके हैं. ‘पोदोखेप’ को बेस्ट फीचर फिल्म का नैशनल अवॉर्ड भी मिला था. दृश्यम फिल्म्स ने जियो स्टुडियोज़ के साथ मिलकर इसे प्रोडयूस किया है. दृश्यम फिल्म्स इससे पहले भी कमाल की फिल्में प्रोडयूस कर चुका है. ‘मसान’, ‘न्यूटन’, ‘कामयाब’, ‘रामप्रसाद की तेरहवी’, उन्हीं में से कुछ नाम हैं.

लंबे समय तक फिल्म फेस्टिवल्स में घूमने के बाद अब थिएटर्स पर आ रही है. फोटो - ट्रेलर
# Aadhaar आ कब रही है? जवाब है 5 फरवरी. वो भी थिएटर्स पर. फिल्म का टीज़र 2019 में रिलीज़ किया गया था. जिसके बाद ये फिल्म फेस्टिवल्स की सैर पर निकल पड़ी. वेट थोड़ा लंबा हुआ, पर फाइनली अब फिल्म आ रही है.
अगर आपने ‘आधार’ का ट्रेलर नहीं देखा, तो नीचे देख सकते हैं –






















