भाईजान ने आईपॉड के दौर में रेडियो की तरफ़ रुख करने की कोशिश की. ईद पर सलमान खान की फिल्म रिलीज़ होती है. इस साल भी उनकी फिल्म रिलीज़ हुई. ट्यूबलाइट. ऐसी ट्यूबलाइट जो लुप-झुप करने के बाद भी जली नहीं. फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स को 50 करोड़ से भी ज़्यादा का नुकसान हुआ. रिपोर्ट्स आई थीं कि हो सकता है सलमान कुछ भरपाई करें. लेकिन ये रिपोर्ट पक्की नहीं हुई. सलमान के केस में हमें एलईडी की चमक पसंद आती है, यहां ट्यूबलाइट काम नहीं करेगी. सलमान की आने वाली ये तीन फिल्में- 'टाइगर ज़िंदा है', 'दबंग 3' और 'किक 2', उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का सीक्वल है. ऐसे में हम कह सकते हैं कि सलमान जल्दी फ्लॉप-प्रूफ़ मोड में आ गए. #2. आलिया का दौर शुरू हो चुका है
आलिया अब ऐसी जगह पहुंच चुकी हैं, जहां से वो बस आगे ही बढ़ेंगी. इन कुछ महीनों में वो और बड़ी स्टार बन गईं. उनकी एक्टिंग में भी कमाल के बदलाव आए. आलिया ने सही फिल्मों का चयन किया. चाहे वो डियर ज़िंदगी हो या बद्रीनाथ की दुल्हनिया. इसमें उनके रोल को जस्टिफ़िकेशन भी मिला और ये फ़िल्में पैसा कमाने में भी सफल हुईं. वो आगे भी इसी तरह की फिल्में चुन रही हैं. उनकी अगली फ़िल्म मेघना गुल्ज़ार की मल्टीप्लेक्स थ्रिलर, राज़ी है. जिसमें उनके साथ वरुण धवन और अर्जुन कपूर हैं. कई लोग कहते हैं कि उनका करियर ग्राफ़ इतना अच्छा सिर्फ़ इसलिए है क्योंकि वो फ़िल्म बैकग्राउंड से हैं. बल्कि फैक्ट ये है कि आलिया चुनौतियों को पार करते हुए आगे बढ़ रही हैं. #3. वीएफ़एक्स (VFX) आज के समय का उभरता हुआ सुपरस्टार
राजामौली ने इंडियन मेनस्ट्रीम सिनेमा को नया सुपरस्टार दिया है. पूरी दुनिया जहां माचोमैन प्रभास के पीछ पागल हुई पड़ी है, वहीं राजामौली की दो पार्ट्स में आई फिल्म बाहुबली का असली हीरो कोई और है. ये इस फ़िल्म के स्पेशल इफेक्ट्स हैं. चाहें इस फिल्म के युद्ध के सीन हों या झरने के, इसने सब चीज़ों में जान फूंक दी. बाहुबली-2 ने दुनिया भर में 2 हज़ार करोड़ से ऊपर की कमाई की. ज़्यादातर फिल्ममेकर्स को पता चल गया कि हिंदी को मिलाकर कई भाषाओं में आई ये फिल्म बड़े बदलाव लाएगी. ये बदलाव फिल्मों के प्रोडक्शन में किए जाएंगे. राजामौली अपनी अगली साइंस फिक्शन थ्रिलर 'साहो' में जुट गए हैं जिससे और बड़ी आशाएं रखी जा रही हैं. #4. शाहरुख का एंटी-हीरो रोल, अब भी तहलका मचा देता है
इस साल की शुरुआत में रईस के साथ शाहरुख वापस अपने एंटी-हीरो फॉर्म में आए. और छा गए. 50 साल से ऊपर की उम्र वाले शाहरुख अपनी लवरबॉए इमेज को छोड़कर नए एक्सपेरिमेंट करने की कोशिश कर रहे हैं. जैसा कि उन्होंने 'फैन' के साथ किया, लेकिन कामयाब नहीं हुए. 26 जनवरी को रिलीज़ हुई फ़िल्म 'रईस' के साथ जब शाहरुख ने वापसी करनी चाही तो उन्होंने उसमें रेट्रो का तड़का भी लगाया. शाहरुख ने 80 के दशक में नकली शराब का धंधा करने वाले का किरदार निभाया जिसने गुजरात में शराब पर रोक के बावजूद लाखों लोगों को चूना लगाकर और कानून को अभी अपनी उंगली पर नचाया. बाज़ीगर के 20 साल बाद भी लोग शाहरुख खान के नेगेटिव रोल को पसंद करते हैं. #5. अक्षय का नया अवतार सबको पसंद आ रहा है
बॉलीवुड में सबसे सफल बदलाव अक्षय कुमार के रहे हैं. पहले जहां लोग उन्हें ऐसा समझने लगे थे कि वो कैसी भी फ़िल्में कर लेते हैं. अब पिछले 12 महीनों में उनकी ये छवि खासी बदली है. उनमें ये बदलाव उस हीरो के रूप में हुआ है जो देशभक्ति की फ़िल्में करता है. 'एयरलिफ्ट' और 'बेबी' जैसी फ़िल्मों में शानदार अभिनय और 'रुस्तम' के लिए नेशनल अवॉर्ड, इन सबने अक्षय को एक लेवल और ऊपर चढ़ा दिया. अचानक से उनकी फ़िल्में ऐसी हो गईं जो मज़े दिलाने के साथ-साथ एक संदेश भी देती हैं. पहले 'जॉली एल एल बी-2' और अब उनकी आने वाली फ़िल्म है- 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा'. #6. हॉलीवुड में बॉलीवुड हीरोइन्स के कदम
इस साल दीपिका पादुकोण ने फिल्म 'XXX: द एज ऑफ़ ज़ेंडर केज' से हॉलीवुड में अपने कदम जमा लिए. वहीं प्रियंका चोपड़ा की 'बेवॉच' बेकार रही. जबकि प्रियंका ने टीवी सीरीज़ 'क्वॉन्टिको' के पहले सीज़न से हॉलीवुड में काफ़ी नाम कमाया था. इससे एक सीख मिलती है: वो हर चीज़ जो हॉलीवुड की चमक-दमक से चमके, ज़रूरी नहीं कि ही सोना हो. दोनों दीपिका और प्रियंका अपने आगे आने वाले हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में जुटृ गई हैं. ये तय हो गया है कि दीपिका XXX-4 में भी नज़र आएंगी. प्रियंका ने फ़िल्म 'अ किड लाइक जेक' साइन की है. इस फ़िल्म की शूटिंग भी शुरू हो गई है. वो जल्द ही क्वॉन्टिको के सीज़न 3 की शूटिंग शुरू करेंगी. #7. स्क्रीन पर लड़कियां ताकतवर हो रही हैं
पांच साल पहले तक फिल्ममेकर्स महिला-केंद्रित फ़िल्में बनाने को जरा रिस्की मानते थे. जब तक किसी बड़ी हीरोइन को न लिया जाए, फंड्स मिलने मुश्किल होते थे. अब सब बदल गया है, हिंदी फ़िल्मों में अचानक महिला शक्ति परम पर है. अब निर्माता ऐसी फ़िल्मों पर इनवेस्ट करने से हिचकिचाते नहीं हैं. न ही चाहते हैं कि फ़िल्म को हिट करने के लिए किसी बड़ी हीरोइन को रखा जाए. इस साल रिलीज़ हुई तापसी पन्नु स्टारर 'नाम शबाना' और स्वरा भास्कर स्टारर 'अनारकली ऑफ़ आरा' ने दिखा दिया कि 2016 में फिल्म 'पिंक' का हिट होना कोई अचरज की बात नहीं है. इस साल रिलीज़ हुई मॉम, फिलौरी और हाफ़ गर्लफ़्रेंड ऐसी ही महिला केंद्रित फ़िल्में हैं. #8. श्रीदेवी में एक्टिंग अभी बाकी है
53 की उम्र में श्रीदेवी नए उत्साह के साथ अपनी फिल्म 'मॉम' के साथ आई हैं. बांध के रखने वाले इस सस्पेंस ड्रामा में हमने श्रीदेवी को बिलकुल नए अवतार में देखा. अपनी बेटी के साथ रेप करने वालों से बदला लेती एक महिला. 80 के दशक में श्रीदेवी जो फ़िल्में करती थीं, उसमें ग्लैमर के साथ-साथ उनकी कॉमिक स्किल का भी तड़का रहता था. मॉम से पहले 2012 में उनकी फ़िल्म इंग्लिश विंग्लिश आई थी जिसमें उन्होंने एक मध्यम वर्गीय होममेकर का रोल किया था, जो अपनी पहचान ढूंढने बाहर निकलती है. मॉम में ये एक्ट्रेस अपनी आंखों से चुप-चाप आक्रोश बयां करती नज़र आ रही है. #9. छोटी फिल्मों के बड़े कमाल
बॉलीवुड में बड़ा आइडिया छोटे पैकेट में मिलता है. जहां सुपरस्टार इस लालसा में रहे कि उनकी फ़िल्में 100-करोड़ से ज्यादा कमा लें, वहीं छोटे एक्टर्स और फ़िल्ममेकर्स हिंदी सिनेमा को एक नई दिशा देने में लगे रहे. श्लोक शर्मा की फ़िल्म हरामखोर में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने अभिनय किया था. वहीं फ़िल्म 'मसान' से श्वेता त्रिपाठी ने अपना करियर शुरू किया जिसमें बाल कलाकार मोहम्मद समद भी थे. एक और ऐसी फ़िल्म है, विक्रमादित्य मोटवाणे की 'ट्रैप्ड' जिसमें राजकुमार राय ने अभिनय किया है. #10. फ़ंकी हमेशा फलदायी नहीं होता हाल ही में अनुराग बसु की फ़िल्म 'जग्गा जासूस' रिलीज़ हुई है जिसमें रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ़ हैं. ये एक म्यूज़िकल कॉमेडी है. बॉलीवुड में ऐसा स्टाइल फॉलो नहीं होता. इसलिए शायद ये फ़िल्म सबके बस की बात नहीं लग रही. रिलीज़ के बाद से ही जग्गा जासूस को अपनी ऑडियन्स ढूंढने में दिक्कत हो रही है. कभी-कभी ज्यादा फ़न मौजूद होने के कारण भी दर्शक फिल्म से कनेक्ट नहीं कर पाते हैं. ये आर्टिकल 'DailyO' के लिए विनायक चक्रवर्ती ने लिखा है, इसे रुचिका ट्रांसलेट किया है.
























