तमिलनाडु चुनाव में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए लगभग सत्ता हथिया ली है. सत्ताधारी डीएमके को करारी शिकस्त देकर हासिल की गई इस जीत में सबसे बड़े ‘हीरो’ थलापति विजय तो हैं ही, लेकिन वीएस बाबू ने जो काम कर दिया है, वो भी लंबे समय तक याद रखा जाएगा. वीएस बाबू वो उम्मीदवार हैं, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को चुनौती देते हुए चुनाव में खड़े हुए थे. वही स्टालिन, जिनका कभी वो चुनाव प्रचार देखते थे. आज वीएस बाबू ने उन्हीं स्टालिन को उन्हीं के गढ़ में 8 हजार 795 वोटों से हरा दिया.
कभी एमके स्टालिन का प्रचार किया, अब उन्हीं को हरा दिया, कौन हैं वीएस बाबू?
वीएस बाबू का चुनावी हलफनामा बताता है कि वह सिर्फ 8वीं तक पढ़ें हैं. लगभग 3.7 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं और उन पर कोई कर्ज या आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.


तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में वीएस बाबू कोई नया नाम नहीं हैं. वह प्रदेश के पुराने और अनुभवी नेता हैं और विधायक भी रह चुके हैं. बाबू साल 2006 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके उम्मीदवार के तौर पर पुरासवाल्कम सीट से लड़े थे. उन्होंने एआईएडीएमके के अपने प्रतिद्वंद्वी को 90 हजार वोटों से करारी शिकस्त दी थी.
वीएस बाबू का चुनावी हलफनामा बताता है कि वह सिर्फ 8वीं तक पढ़ें हैं. लगभग 3.7 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं और उन पर कोई कर्ज या आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 के इलेक्शन में डीएमके ने उन्हें कोलाथुर विधानसभा सीट का चुनाव प्रभारी बनाया गया था. डीएमके का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट से एमके स्टालिन चुनाव लड़ रहे थे. जब चुनाव के नतीजे आए तो स्टालिन इस चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके के एसएस दुरईसामी को मुश्किल से हरा पाए थे. मार्जिन सिर्फ 3 हजार वोटों का था.
कहा जाता है कि इसके बाद विधानसभा प्रभारी वीएस बाबू को तलब किया गया. करीबी मुकाबले पर उनसे सवाल-जवाब हुए. इसके कुछ समय बाद बाबू ने डीएमके छोड़ दी. वह एआईएडीएमके में शामिल हो गए. तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में इसके बाद से वीएस बाबू ओझल से हो गए थे.
फिर आती है फरवरी 2026. अभिनेता थलापति विजय ने ऐलान किया कि उनकी नई पार्टी TVK विधानसभा चुनाव लड़ेगी. 7 फरवरी 2026 को वीएस बाबू उनके साथ हो लिए. विजय की मौजूदगी में उन्होंने TVK का दामन थाम लिया. पहली बार चुनाव लड़ी TVK ने उन्हें अपना संयुक्त महासचिव बनाया और प्रदेश की सबसे कठिन सीट लड़ने के लिए दी. वही कोलाथुर सीट, जहां वो पहले कभी स्टालिन के लिए चुनावी रणनीतियां बनाते थे, अब उसी सीट पर उन्हीं स्टालिन के खिलाफ प्रतिद्वंद्वी बनकर खड़े थे.
सोमवार, 4 मई को जब चुनावी नतीजे आए तो लंबे समय से हाशिये पर रहे 75 साल के वीएस बाबू अचानक हीरो बन गए. एक तरफ उनकी पार्टी चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने की हालत में आई. दूसरी ओर उन्होंने सिटिंग सीएम को हराकर पार्टी को बड़ा तोहफा दे दिया. उन्हें अब तमिलनाडु चुनाव का ‘जायंट किलर’ कहा जा रहा है.
चुनाव आयोग के मुताबिक, कोलाथुर चुनाव में वीएस बाबू को 82 हजार 997 वोट मिले. वहीं एमके स्टालिन उनसे 8 हजार 795 वोट पीछे रहकर 74 हजार 202 वोट पा सके.
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