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185 उम्मीदवार हैं, बैलट से होता चुनाव, फिर चुनाव आयोग ने कहा - वो वाली EVM लाना

चुनाव आयोग ने तैयारी कर ली है कि ज्यादा कैंडिडेट होने पर EVM से कैसे कराएं वोटिंग.

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तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर 185 उम्मीदवार मैदान में हैं.
तेलंगाना की निजामाबाद लोकसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है. राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता यहां से सांसद हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में वह एक बार फिर यहां से अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं. लेकिन इस बार निजामाबाद सीट किन्हीं और कारणों से चर्चा में है. इस सीट पर 185 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें से 170 किसान हैं. उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण यहां बैलट पेपर से चुनाव कराने की नौबत आ गई थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. चुनाव आयोग ने इसका हल निकाल लिया है और यहां भी ईवीएम से ही चुनाव होंगे. इसके लिए थर्ड जनरेशन ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा.
थर्ड जनरेशन ईवीएम से वोटिंग चुनाव आयोग ने थर्ड जनरेशन ईवीएम के 26,820 बैलट यूनिट्स, 2240 कंट्रोल यूनिट्स, 2600 VVPAT के तत्काल ऑर्डर के आदेश दिए हैं. M2 ईवीएम यूनिट्स पर अधिकतम 64 उम्मीदवारों के नाम ही आते हैं. यानी उम्मीदवारों की संख्या 64 से ज्यादा हुई तो इस ईवीएम से चुनाव नहीं कराए जा सकते. चुनाव आयोग की मजबूरी थी कि वह यहां बैलट पेपर से चुनाव कराए, लेकिन थर्ड जनरेशन की ईवीएम से आयोग की चिंता दूर हो गई है. नई M3 ईवीएम से 24 बैलट यूनिट कनेक्ट हो सकता है यानी 384 उम्मीदवारों तक के वोट कराए जा सकते हैं
179 निर्दलीय उम्मीदवार निजामाबाद लोकसभा सीट पर टीआरएस की ओर से के कविता, कांग्रेस की ओर से मधु गौड़ याशकी और बीजेपी की ओर से धरमपुरी अरविंद मैदान में हैं. 179 किसान निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा बीएसपी समर्थक एक उम्मीदवार और दो अन्य निर्दलीय उम्मीदवार अपना दावा पेश कर रहे हैं. किसी चुनाव में एक ही सीट से सबसे ज्यादा कैंडिडेट्स के उतरने का रिकॉर्ड भी तेलंगाना के पास ही है. (हालांकि उस समय तेलंगाना आंध्रप्रेदश में ही था) 1996 के लोकसभा चुनाव में नालगोंडा सीट से 480 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी इनमें से 477 की जमानत जब्त हो गई थी. यहां 50 पेज के बैलट पेपर का इस्तेमाल किया गया था. उसी साल तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में मोडाकुरुची सीट पर 1026 किसानों ने चुनाव लड़ा था.
कौन हैं ये किसान निजामाबाद लोकसभा सीट से जिन किसानों ने नामांकन दाखिल किया है. उनके एफिडेविट के अनुसार इन किसानों के पास 2 से 5 एकड़ जमीन है. उनका बैंक बैलंस 4 लाख से कम है, वहीं 5 से 6 लाख की अन्य संपत्ति है. के कविता का आरोप है कि कांग्रेस और बीजेपी इन किसानों का समर्थन कर रही हैं. उनका कहना है कि जनता इन्हें सबक सिखाएगी. तेलंगाना बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर के लक्ष्मण का कहना है कि पार्टी किसी भी किसान का समर्थन नहीं कर रही है. अपनी उम्मदवारी पेश कर ये किसान टीआरएस सरकार की नाकामियों की पोल खोल रहे हैं. किसानों के लोकसभा चुनाव में उतरने से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है.
चुनाव लड़ रहे किसान हल्दी की एमएसपी बढ़ाने के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं.
चुनाव लड़ रहे किसान हल्दी की एमएसपी बढ़ाने के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं.

क्या था 2014 का गणित तेलंगाना कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट एम भाटी का कहना है कि किसानों की मांग का समर्थन करते हैं, लेकिन हम किसानों के चुनाव लड़ने का समर्थन क्यों करेंगे जब हमारा खुद का उम्मीदवार मैदान में है. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से 9 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी. जीत हासिल करने वाली कविता को 42.49 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार को 26.32 और बीजेपी के उम्मीदवार को 21.79 प्रतिशत वोट मिले थे.
टीआरएस की के कविता ने 2014 में जीत हासिल की थी. वह एक बार फिर मैदान मे हैं.
टीआरएस की के कविता ने 2014 में जीत हासिल की थी. वह एक बार फिर मैदान मे हैं.

किसानों के चुनाव लड़ने की वजह क्या है पिछले कुछ महीनों से ये किसान निजामाबाद जिला कलेक्टर ऑफिस के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांग थी कि हल्दी की एमएसपी कम से कम 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल की जाए. इस समय हल्दी की एमएसपी 4500 रुपए है. किसान हल्दी बोर्ड बनाने की मांग भी कर रहे थे, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया. किसानों का कहना है कि हम टीआरएस, कांग्रेस और बीजेपी को हराना चाहते हैं. किसी भी पार्टी या नेता ने हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया. ज्यादातर किसान कर्ज में डूबे हैं. हम चाहते हैं कि हल्दी बोर्ड का गठन हो जिससे कीमतों को रेग्युलेट किया जा सके.


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