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मिलिए भाजपा के गब्बर नेता से जो मां की गाली बोलकर हाथ काट लेगा!

लेकिन उनकी कुछ बातें जानकर आप उनकी दयालुता के फैन हो जाएंगे.

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एक काली पहाड़ी वाला गब्बर था, एक ये हिमाचल वाले गब्बर हैं. दोनों का ही भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है.
'शोले' फिल्म का एक सीन है. गब्बर का काली पहाड़ी वाला अड्डा है. ठाकुर के दोनों हाथ खंभे से बंधे हैं. गब्बर के दोनों हाथों में तलवार है, गब्बर ठाकुर से कहता है, 'बहुत जान है न इन हाथों में. ये हाथ हमको दे दे ठाकुर.' और फिर ठाकुर के दोनों हाथ काट देता है. कुछ लोगों की नजर में ये गब्बर सिंह की क्रूरता है और कुछ लोग इसे उसकी दयालुता कहते हैं. वो चाहता तो ठाकुर को जान से भी मार सकता था. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. खैर, ये तो हो गई फिल्मी बात. गब्बर ठहरा पेशेवर डाकू, कोई चुनाव जीतकर तो आया नहीं था. असल जिंदगी में आते हैं. और आपका परिचय एक 'दयालु', 'अनुशासित' और बहुत ही 'शालीन' हथकटवा नेता से कराते हैं.
हिमाचल प्रदेश के बीजेपी प्रेजिडेंट हैं, सतपाल सिंह सत्ती. देश में लोकसभा चुनाव का माहौल है. सत्ती जी भी प्रचार में लगे हैं. 24 अप्रैल को मंडी में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. इस संबोधन में मोदी विरोधियों को एक प्यार भरी धमकी भी दे गए. बोले -
"मोदी जी की तरफ कोई उंगली उठाएगा तो हम लोग उसकी बाजू काट कर के हाथ में पकड़ा देंगे."
सत्ती साहब का इतना कहना था कि लोग शुरू हो गए. सत्ती जी टीवी पर चमकने लगे. लोग उनकी 'कड़ी निंदा' करने लगे. भला-बुरा कहने लगे. मानो लोग इस बात के इंतजार में बैठे हों कि कब सत्ती जी बोलें तो उनमें कमियां खोजी जाए. लेकिन कमियां खोजने वाले लोगों ने सतपाल सत्ती की दयालुता को नजरअंदाज कर दिया. आप सोच रहे होंगे कि इस बयान में दयालुता कहां है तो हम बता रहे हैं. सतपाल सत्ती चाहते तो दोनों हाथ काटने की धमकी दे सकते थे. गब्बर की तरह. वो चाहते तो गर्दन धड़ से अलग करने की धमकी भी दे सकते थे. लेकिन उनके ममतापूर्ण और करुणामय हृदय ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. उन्होंने एक ही हाथ काटने की धमकी दी. उनकी सहृदयता देखिए कि दूसरे हाथ में कटा हाथ पकड़ा देने की बात भी कही. ताकि जिसका हाथ कटे वो उसे अपने साथ ले जा सके. और आज के मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि वो कटे हाथों को दोबारा जोड़ सकती है. मतलब सत्ती जी हाथ काटने के बाद उसे दोबारा जोड़ने का पूरा मौका दे रहे हैं. लेकिन इस बेरहम दुनिया को ये सब कहां दिखेगा.
शालीन प्रवृत्ति के इंसान सतपाल सत्ती अत्यंत शालीन प्रवृत्ति के इंसान हैं. गाली गलौज में बिल्कुल यकीन नहीं करते. राजनीति के गिरते स्तर पर चिंतित भी रहते हैं. 15 अप्रैल को सोलन में एक रैली कर रहे थे. बोले -
"एक आदमी ने फेसबुक पर लिखा है जो मैं मंच से नहीं बोल सकता. राहुल जी के बारे में हम भी नहीं बोल सकते क्योंकि एक पार्टी के राष्ट्रीय नेता हैं और तीन बार के सांसद हैं. मैंने रणधीर शर्मा (प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता) से पूछा कि क्या लिखा है तो उन्होंने कहा कि मैं बता नहीं सकता. आप फेसबुक पर पढ़ो, लोगों में हमसे भी ज़्यादा ग़ुस्सा है. मैं भारी मन से बोल रहा हूं. उसने लिखा है- इस देश का चौकीदार चोर है, अगर तू बोलता है तो तू ***** है. उसने सीधा लिखा है फ़ेसबुक पर."
सत्ती ने मंच से जिस शब्द का इस्तेमाल किया था, उसमें मां की गाली थी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए. लेकिन ये शब्द उनका नहीं था. वे तो बस किसी कट्टर समर्थक के शब्दों को मंच से अभिव्यक्त कर रहे थे. और कितने भारी मन से उन्होंने ये बात कही, उसे भी देखा जा सकता है. डिस्क्लेमर भी पहले ही दे दिया था. बाद में इसके लिए सफाई भी दी. बीबीसी हिंदी
 से बातचीत करते हुए बोले, "मैंने तो खुद ही कहा कि जो भी ऐसा लिखता है गलत है. लेकिन जब एक देश के प्रधानमंत्री को कोई एक पार्टी का लीडर मंच से जोर-जोर से कहेगा - 'चौकीदार' और मंच के नीचे से लोग कहेंगे - 'चोर है'. तो उन्हें भी सुनना पड़ेगा. कोई हमारे प्रधानमंत्री को चोर कहे और हम कुछ भी न कहें?"
शायद ही कोई ऐसा कार्यकर्ता होगा जो अपने नेता के बारे में अपशब्द सुनकर चुप बैठेगा
शायद ही कोई ऐसा कार्यकर्ता होगा जो अपने नेता के बारे में अपशब्द सुनकर चुप बैठेगा, फिर मोदी जी तो देश के नेता हैं.

बताइए भला कौन सा ऐसा कार्यकर्ता होगा जो अपने नेता को चोर सुनना पसंद करेगा. बड़े से बड़े भ्रष्टाचारी नेता के समर्थकों के लिए भी यह नागवार है. फिर तो सत्ती साहब के नेता देश के प्रधानमंत्री भी हैं. उनके खिलाफ कोई बात वे कैसे सहन कर सकते हैं.
बेहद अनुशासनप्रिय सतपाल सत्ती अनुशासनप्रिय नेता हैं. चुनाव आयोग ने उन पर 48 घंटे का बैन लगा दिया. इस बैन के कारण सत्ती 19-20 अप्रैल को चुनाव प्रचार नहीं कर पाए. इन 48 घंटों में सत्ती जी ने कुछ नहीं किया. कुछ नहीं का मतलब कुछ नहीं. घर पर बैठे रहे. वरना बैन तो योगी जी पर भी लगा था. कभी अयोध्या तो कभी बनारस घूमते नजर आए थे. सत्ती साहब ने चुनाव आयोग के प्रति अपने अगाध समर्पण का परिचय दिया. जो सजा मिली कबूल लिया, उसका पालन किया. चूं से चां तक नहीं किया. इसके बावजूद सत्ती जी लोगों के निशाने पर हैं. खैर, क्या करिएगा सत्ती जी. राजेश खन्ना पहले ही कह गए हैं, 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना. छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना.'
(*खबर में व्यंग्यात्मक आलोचना अंतर्निहित.)



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