भारत की राजनीति में अक्सर एक ही परिवार के लोग एक ही पार्टी से जुड़े दिखते हैं. लेकिन इस बार कहानी अलग है. एक ही परिवार, तीन अलग-अलग पार्टियां और तीनों ने जीत का झंडा गाड़ दिया. ये कहानी है भारत के ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन (Santiago Martin) के उस परिवार की, जिसने दक्षिण भारत की राजनीति में ऐसा दांव चला कि अलग-अलग पार्टियों से मैदान में उतरकर भी जीत की हैट्रिक लगा दी.
पत्नी-बेटा-दामाद तीनों अलग-अलग पार्टियां से लड़े चुनाव, सब जीते, लॉटरी किंग फिर चर्चा में
Tamil Nadu Lottery King: परिवार के तीनों लोगों ने जीत का झंडा गाड़ दिया. ये कहानी है भारत के ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन (Santiago Martin) के उस परिवार की, जिसने दक्षिण भारत की राजनीति में ऐसा दांव चला कि अलग-अलग पार्टियों से मैदान में उतरकर भी जीत की हैट्रिक लगा दी.


सबसे बड़ी और चर्चित जीत रही आधव अरजुना रेड्डी की. वे थलपति विजय की पार्टी TVK के अहम चेहरे माने जाते हैं. अरजुना रेड्डी ने तमिलनाडु की विल्लीवक्कम सीट से चुनाव लड़ा और 17,302 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. वे सैंटियागो मार्टिन की बेटी डेज़ी मार्टिन के पति हैं और पार्टी में General Secretary (Election Campaign Management) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
दूसरी जीत आई सैंटियागो मार्टिन की पत्नी लीमा रोज़ मार्टिन के खाते में. उन्होंने तमिलनाडु की ललगुड़ी सीट से AIADMK के टिकट पर चुनाव लड़ा. मुकाबला कड़ा था, लेकिन लीमा रोज़ मार्टिन ने करीब 2,739 वोटों से जीत हासिल कर ली और TVK के उम्मीदवार को हराया.
चुनाव के नतीजे जानने के लिए इस लिंक पर जा सकते हैं.
परिवार की तीसरी जीत दर्ज की जोस चार्ल्स मार्टिन ने, जो सैंटियागो मार्टिन के बेटे हैं. उन्होंने पुडुचेरी की कामराज नगर सीट से 10,205 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. खास बात ये है कि उन्होंने हाल ही में अपनी पार्टी Latchiya Jananayaka Katchi (LJK) बनाई थी. जोस ने पहले ही चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी. कुल मिलाकर, ये नतीजे सिर्फ तीन जीत की कहानी नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक प्रभाव की झलक हैं, जहां एक ही परिवार अलग-अलग विचारधाराओं के साथ मैदान में उतरकर भी जीत हासिल कर रहा है. दक्षिण भारत की राजनीति में Santiago Martin परिवार की ये ‘तीन-तीन चालें’ अब चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी हैं.
Santiago martin विवादों में क्यों?मार्टिन ने 1980-90 के दशक में लॉटरी बिज़नेस से शुरुआत की थी और धीरे-धीरे इसे देश के कई राज्यों तक फैलाया. उनकी कंपनी Future Gaming and Hotel Services आज देश की सबसे बड़ी लॉटरी कंपनियों में गिनी जाती है.
इलेक्टोरल बॉन्ड्स के खुलासे के बाद Martin की कंपनी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक चंदा देने वाली कंपनी के रूप में सामने आई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कंपनी ने 2019 से 2024 के बीच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के बॉन्ड खरीदे. ये रकम अलग-अलग राजनीतिक दलों तक पहुंची, जिससे मार्टिन की राजनीतिक पहुंच को लेकर बहस तेज हो गई.
मार्टिन और उनकी कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं. ED ने पिछले कुछ सालों में कई बार छापेमारी की कार्रवाई की और करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच करने का दावा किया. सिक्किम लॉटरी से जुड़े एक मामले में भी ED ने बड़े स्तर पर जांच की है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच की बात सामने आई.
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जांच से जुड़े कुछ पहलू सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए. कोर्ट ने एक मामले में ED को मार्टिन के इलेक्ट्रॉनिक डेटा तक एक्सेस देने पर रोक लगाई थी. कई राज्यों में ये आरोप भी लगे कि मार्टिन की कंपनियां उन जगहों पर भी लॉटरी कारोबार चला रही थीं, जहां इस पर प्रतिबंध है. केंद्र सरकार ने भी राज्यों को इस संबंध में सतर्क रहने के निर्देश दिए थे.
वीडियो: तमिलनाडु चुनाव में बाज़ी पलटी, TVK कैसे बना सबसे बड़ा गेम चेंजर?


















