चुनाव में जनता की चलती है डेमोक्रेसी भी अजीब चीज़ है.हर पांच साल में एक बार कइयों को सिर के बल नचा देती है.इस बार नाचते पाई गई हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर. जो जेल से वापस आने के बाद वीलचेयर पर ही दिखाई देती हैं.

नॉमिनेशन के वक्त भोपाल में कलेक्ट्रेट ऑफिस जाती हुईं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
लोकतंत्र में वोट ख़ुदा तो नहीं, पर ख़ुदा से कम भी नहीं. और वोटर है कि मान के ही नहीं देता. मन करे नाचो, मन करे गाओ.
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ना वीलचेयर रही, ना कोई सहारा लिया जब प्रज्ञा ठाकुर थिरकीं, तो ना वीलचेयर का लिहाज रखा, ना किसी का सहारा लिया. अपने दोनों पांवों पर पूरी की पूरी खड़ी हुईं और लगीं नाचने.
इसमें ध्यान देने वाली बात यही है, कि चलने फ़िरने में बिल्कुल लाचार दिखने वाली साध्वी वीलचेयर से उठ पड़ीं. खैर जब प्रज्ञा ठाकुर का कैंसर तक गोबर-गोमूत्र से ठीक हो सकता है, तो इत्ती एनर्जी भी आ ही सकती है.












