कॉन्फ्रेंस में मुलायम के साथ शिवपाल तो मौजूद थे, लेकिन अखिलेश यादव नदारद रहे. इस सवाल पर मुलायम ने कहा कि इस बारे में खुद मुख्यमंत्री से सवाल किया जाना चाहिए. मुलायम ने ये भी कहा कि बिना जनाधार वाले कुछ लोग पार्टी में साजिश रच रहे हैं. माना जा सकता है कि उनका निशाना राम गोपाल यादव की तरफ था, जिन्हें पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका है. राम गोपाल पर सीधा निशाना साधते हुए मुलायम ने ये भी कहा कि उनकी बात पर ध्यान मत दीजिए, पार्टी में कोई भी उनकी बात पर ध्यान नहीं देता है. साजिश कौन कर रहा है, इस सवाल पर मुलायम ने कहा कि उन्हें आप ढूंढिए.2017 में पार्टी किसके चेहरे पर चुनाव लड़ेगी, इस सवाल को भी मुलायम गोल कर गए. सीधे जवाब न देते हुए उन्होंने कहा, 'पिछला चुनाव (2012) तो मेरे नाम पर ही लड़ा गया था. ये बात सब जानते हैं. चुनाव में जब हमारा बहुमत साबित होगा, तब विधायक अपना नेता चुनेंगे. अभी तो हमें परफॉर्मेंस पर ध्यान देना है.' रोचक बात ये है कि चुनाव इतने नजदीक आने पर जब सारे नेता बहुमत के दावे करने लगते हैं, उस दौर में मुलायम को पार्टी की क्षमता पर भरोसा नहीं हो पा रहा है.
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवपाल के साथ वो नेता भी शामिल थे, जिन्हें अखिलेश मंत्रीपद से बर्खास्त कर चुके हैं. इन नेताओं को पार्टी में वापस लेने के सवाल पर मुलायम ने कहा कि इसका फैसला वो मुख्यमंत्री पर छोड़ते हैं. सोमवार को पार्टी की मीटिंग में मुलायम ने जो तेवर दिखाए थे, उसे देखते हुए ये बेहद अजीब लगा कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नेताओं को कैबिनेट में वापस लेने पर खुलकर कुछ बोल नहीं पा रहा है. जो अखिलेश उनके कहने पर इस्तीफा देने तक को तैयार हैं, उनसे वो नेताओं को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे हैं.अखिलेश के बारे में कई बार सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री हैं और अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इसके अलावा वो कोई भी विवादित बयान नहीं देंगे.
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