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योगी सरकार पर 'हिंदूगर्दी मचाने' का आरोप लगाने वाले रफीक अंसारी का क्या हाल हुआ?

क्या मेरठ में BJP रफीक अंसारी को टक्कर दे पाई?

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मेरठ सिटी सीट से सपा सुभासपा उम्मीदवार रफीक अंसारी, बीजेपी के कमल दत्त शर्मा, बसपा के दिलशाद शौकत और कांग्रेस के रंजन शर्मा (बाएं से दाएं)
मेरठ सिटी विधानसभा सीट से सपा के उम्मीदवार रफीक अंसारी को 26 हजार 65 वोटों से जीत हासिल हुई है. आपको इस सीट का चुनाव फाइनल परिणाम बता देते हैं- रफीक अंसारी (SP)- 1 लाख 6 हजार 395 वोटों के साथ जीते. कमल दत्त शर्मा (BJP)- 80 हजार 330 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे.  रंजन शर्मा (INC)- 5 हजार 333 वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे.  दिलशाद शौकत (BSP)- 4 हजार 939 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे.  क्यों बता रहे आपको मेरठ सिटी सीट का हाल? मेरठ सिटी से विधायक हैं समाजवादी पार्टी के रफीक अंसारी (Rafiq Ansari). समाजवादी पार्टी के पुराने नेता हैं. 2012 में पहली बार विधायकी लड़े थे, लेकिन बीजेपी के लक्ष्मीकांत वाजपेई से चार हजार वोटों से हार गए. हालांकि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और उन्हें हथकरघा एवं पर्यटन विभाग में दर्जा प्राप्त मंत्री का पोर्टफोलियो दिया गया. 2017 में समाजवादी पार्टी की तरफ से एक बार फिर रफीक अंसारी को टिकट दिया गया. इस बार फिर उनका सामना बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई से था. लेकिन इस बार बाजी पलट गई. बीजेपी की लहर के बावजूद रफीक अंसारी ने लक्ष्मीकांत वाजपेई को 28 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हरा दिया. वो मेरठ जिले की कुल सात विधानसभा सीटों में अकेले गैर बीजेपी विधायक थे. 2022 में एक बार फिर से समाजवादी पार्टी ने रफीक अंसारी को चुनाव मैदान में उतारा. इस बार चुनाव प्रचार के दौरान उनका एक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. उन्होंने कहा था,
“इस सरकार ने पिछले पांच सालों में पूरी हिंदूगर्दी मचाई है. हर थाने में हिंदूगर्दी है. अगर ये सरकार बन गई तो ये गुंडा, बदमाश हो जाएगा. मेरठ का मुसलमान कभी किसी से दबा नहीं है. लेकिन इस सरकार ने मुसलमानों को दबाने का काम किया है. कुचलने काम किया है. हालात बहुत खराब हैं.”
रफीक अंसारी के इस बयान पर काफी विवाद हुआ. बीजेपी ने उनके और समाजवादी पार्टी के ऊपर निशाना साधा. तुष्टिकरण और हिंदू विरोध के आरोप लगाए. इस बार कौन-कौन था मैदान में? चार बार के विधायक रहे लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने इस बार चुनाव लड़ने से मना कर दिया तो बीजेपी ने उनके करीबी कमल दत्त शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा. जबकि रालोद के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही सपा ने रफीक अंसारी को फिर से टिकट दिया. बसपा ने यहां से दिलशाद शौकत को जबकि कांग्रेस ने रंजन शर्मा को टिकट दिया था. 2017 में क्या हुआ था? रफीक अंसारी (SP) - 1,03,217 लक्ष्मीकांत बाजपेयी (BJP) - 74,448 पंकज जॉली (INC) - 12,636 क्या है मेरठ शहर सीट का इतिहास-भूगोल? बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई इस सीट से चार बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं. हालांकि, चार बार उन्हें हार का भी सामना करना पड़ा. 1989 में पहली बार लक्ष्मीकांत बाजपेयी बीजेपी से विधायक निर्वाचित हुए. 1993 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हाजी अखलाक ने उन्हें हरा दिया. 1996 और 2002 में बीजेपी के लक्ष्मीकांत बाजपेई लगातार दो चुनाव जीत विधानसभा पहुंचे. लेकिन 2007 में उन्हें UPUDF के हाजी याकूब के हाथों हार का सामना करना पड़ा. 2012 में लक्ष्मीकांत बाजपेई एक बार फिर से चुनाव जीत कर चौथी बार विधानसभा पहुंचे. लेकिन 2017 में उन्हें सपा के रफीक अंसारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

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