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बोरों और गत्तों में मिले रुपए, चुनाव आयोग ने इलेक्शन रद्द करने की सिफारिश की

कैंडिडेट के गोदाम में मिला ये सब.

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वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र से डीएमके के उम्मीदवार कातिर आनंद के घऱ और परिसरों से नकदी बरामद हुई थी. फाइल फोटो.
तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र का चुनाव रद्द होने के आसार हैं. चुनाव आयोग ने इलेक्शन रद्द करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की है. चुनाव में बड़े पैमाने पर धन के इस्तेमाल के मद्देनजर चुनाव आयोग ने ये फैसला लिया है. चुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति जारी करते हैं. ऐसे में रद्द करने का अधिकार भी राष्ट्रपति को ही है. तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर 18 अप्रैल को मतदान है. वेल्लोर संसदीय क्षेत्र से 23 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
क्यों आ गई चुनाव रद्द करने की नौबत? वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र से दिवंगत करुणानिधि की पार्टी डीएमके के उम्मीदवार कातिर आनंद चुनाव लड़ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कातिर के घर से 29 मार्च को भारी मात्रा में नकदी पकड़ी गई थी. इनकम टैक्स विभाग ने 1 अप्रैल को कातिर के एक सीमेंट गोदाम से 11.53 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की. यहां बड़ी तादाद में बोरों और गत्तों में नकदी मिली थी. आरोप है कि इस नकदी का इस्तेमाल वोट खरीदने के लिए होने वाला था. कातिर आनंद डीएमके के कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन के बेटे हैं. बाद में 10 अप्रैल को आयकर विभाग की रिपोर्ट पर तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई. एफआईआर में डीएमके उम्मीदवार कातिर आनंद, सीमेंट गोदाम के मालिक पूंजोलाई श्रीनिवासन और दामोदरन नाम के शख्स के नाम थे. आरोप हैं कि दामोदरन के घर से कुछ ऐसे कागज मिले, जिनमें उन वोटरों या मध्यस्थों के नाम, मोबाइल नंबर और वार्ड नंबर लिखे थे, जिनको वोट खरीदने के लिए पैसा दिए जाने थे. चुनाव आयोग ने क्या किया? इतने बड़े पैमाने पर नकदी बरामद होने के बाद चुनाव आयोग ने तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी से रिपोर्ट मंगवाई थी. इसके बाद वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र के लिए एक विशेष ऑब्जर्बर नियुक्त किया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इलाके में मुस्लिम वोटरों की तादाद बहुत ज्यादा है. और इंडियन मुस्लिम लीग की यहां तगड़ी पकड़ है. माना जा रहा है कि एआईएडीएमके यानी दिवंगत जयललिता की पार्टी को इस चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है. 2014 में वेल्लोर से एआईएडीएमके के बी. सेनगुट्टुवन 50,000 से ज्यादा वोटों से जीते थे. उन्होंने भाजपा के एसी षणमुगम को हराया था.
पहले और कब-कब रद्द हो चुके हैं चुनाव? इससे पहले साल 2017 में चुनाव आयोग ने तमिलनाडु में ही ऐसा फैसला लिया था. डॉक्टर राधा कृष्ण नगर विधानसभा सीट का उपचुनाव रद्द किया था. साल 2016 में तमिलनाडु विधानसभा की दो सीटों अरावाकुरुची और तंजावूर का चुनाव भी रद्द कर दिया गया था. इन चुनावों में भी मतदाताओं को बड़े पैमाने पर घूस देने के आरोप लगे थे. उस चुनाव में एआईएडीएमके से जुड़े लोगों के पास से पैसा बरामद हुआ था. साल 2012 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों का चुनाव भी रद्द कर दिया गया था. उस चुनाव में भी बड़े पैमाने पर धन के इस्तेमाल के आरोप लगे थे.
चुनाव के दौरान बरामद कैश. फाइल फोटो.
चुनाव के दौरान बरामद कैश. फाइल फोटो.

वेल्लोर का इतिहास क्या रहा है? तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से एक वेल्लोर का गठन 1951 में हुआ था. वेल्लोर दक्षिण भारत के प्राचीन शहरों में है. ये पलार नदी के किनारे और मंदिरों के शहर थिरुवन्नमलाई और तिरुपति के बीच बसा है. वेल्लोर लोकसभा सीट पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम DMK का दबदबा रहा है. साल 1971 में परिसीमन के बाद यहां 12 बार चुनाव हुए. इसमें 4 बार डीएमके जाती है. 2 बार पट्टाली मक्कल काची PMK 4 बार कांग्रेस और 2 बार ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम AIADMK ने ने जीत हासिल की है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में AIADMK के बी. सेनगुट्टुवन जीते थे. सेनगुट्टुवन को 3,83,719 वोट मिले थे. उनके प्रतिद्वंदी और बीजेपी नेता एसी षनमुगम को 3,24,326 वोट. कांग्रेस उम्मीदवार को 21,650 और निर्दलीय को 6,056 वोट मिले थे. नोटा के हिस्से में 7,100 वोट आए थे.
वेल्लोर का सामाजिक ताना-बाना कैसा है? वेल्लोर में अनुसूचित जाति की आबादी 22.97 फीसदी है. अनुसूचित जनजाति 1.53 फीसदी हैं. वेल्लोर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 6 विधानसभा सीटें आती हैं. जिसमें वेल्लोर, अनाई कट्टू, किलवाईथिनंकुप्पम, गुडियथम, वानीयंबादी और अंबूर शामिल हैं. इनमें से 2 सीटें डीएमके के खाते में हैं. 4 सीटों पर एआईएडीएमके का कब्जा है.


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