कहा जाए कि कुमार विश्वास में भाजपाई होने की अपार संभावनाएं हैं तो ठीक है. आम आदमी पार्टी (AAP) के बड़े चेहरों में राष्ट्रवाद के सबसे नजदीक वही नजर आते हैं. लेकिन फिर भी मीडिया उनके भाजपाई होने की भविष्यवाणियां कुछ ज्यादा ही करता है. 2013 के दिल्ली चुनावों में ये भविष्यवाणी की गई. गलत निकली. 2015 के दिल्ली चुनावों में कहा गया कि कुमार को मनोज तिवारी मना रहे हैं और भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री जैसा पद दे सकती है. लेकिन एक बार भी 'सूत्रों के हवाले' से आने वाली ये खबरें सार्थक न हो सकीं. अब तो आलम ये हो गया है कि वो चुनाव ही क्या, जो कुमार के भाजपा में जाने की खबरों के बिना बीत जाए. इस बार यूपी इलेक्शन से पहले नया शगूफा उछला है. 'इकोनॉमिक टाइम्स' ने छाप दिया कि कुमार कमल के निशान पर साहिबाबाद सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. बीजेपी ने पहले चरण की 9 सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं. इनमें साहिबाबाद सीट भी है. मार्केट में ये हल्ला भी है कि राजनाथ सिंह अपने बेटे पंकज सिंह के लिए नोएडा की सीट मांग रहे हैं. अगर नोएडा की सीट नहीं मिली तो वो साहिबाबाद से लड़ सकते हैं. इसीलिए बीजेपी ने इस सीट पर नाम अभी रोक रखा है. इस बीच पता किसी ने ये खबर उड़ा दी कि कुमार विश्वास को AAP में साइडलाइन किया जा रहा है, पंजाब और गोवा में उनकी मौजूदगी प्रबल नहीं है, इसलिए वो पार्टी बदलकर साहिबाबाद से लड़ने को इच्छुक हैं. ये खबर सुबह ट्विटर पर पसरी तो कुमार विश्वास ने इस पर अपने स्टाइल में मजा ले लिया. NDTV के रिपोर्टर अखिलेश शर्मा ने उन्हें मेंशन करते हुए उनका पक्ष पूछा था. इस पर कुमार विश्वास ने जवाब दिया,
'हां. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री TDP जॉइन कर रहे हैं. इसे खबर की तरह चलाइए. अरे मैं मजाक ही कर रहा हूं, जैसे आप लोग कर रहे हैं.'

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इस खबर का मखौल उड़ाते हुए लिखा, 'मेरे पास खबर है कि यूपी चुनाव के बाद प्रधानमंत्री कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं. उनकी राहुल गांधी से मुलाकात भी हो चुकी है.'

कुमार और टीम कुमार व्यंग्य के तौर-तरीकों में माहिर है. उन्हें पता है कि अपनी ओर आते तीरों को कहां हल्का सा छूकर डायवर्ट कर देना है कि वे लोक कल्याण मार्ग तक चले जाएं.
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