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चुनावी ग्राउंड रिपोर्ट: चिराग तले अंधेरा वाली कहावत इसी गांव के लिए बनी होगी

लोकसभा चुनाव 2019: बिहार में जमुई के एक गांव की कहानी

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जमुई से ग्राउंड रिपोर्ट
हिंदी में एक कहावत है चिराग तले अंधेरा. मतलब ये कि दीपक अपने आस-पास तो रोशनी कर देता है, लेकिन उसके ठीक नीचे अंधेरे की भी जगह होती है. ये बात जमुई लोकसभा क्षेत्र पर भी पूरी तरह से लागू है. जमुई से सांसद हैं लोक जन शक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान. उनका एक परिचय ये भी है कि वो केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के बेटे हैं. उनका दूसरा परिचय ये है कि वो एक ऐक्टर रहे हैं. उनका तीसरा परिचय ये है कि वो एक बार फिर से जमुई से चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन उनके ही लोकसभा क्षेत्र में एक गांव है जहां विकास की रोशनी अब तक नहीं पहुंच पाई है.
खैरा मुसहड़ा गांव की एक तस्वीर
खैरा मुसहड़ा गांव की एक तस्वीर

जमुई से करीब 10 किलोमीटर दूर ब्लॉक है खैरा. ये इतना तो विकसित हो चुका है कि इसे कस्बे का नाम दे दिया जाए, लेकिन इस क्षेत्र में अब भी नक्सल का प्रभाव दिख जाता है. खैरा ब्लॉक से दाएं तरफ एक सड़क मुड़ती है, जो एक गांव में ले जाती है. गांव का नाम है खैरा मुसहड़ा. दलितों की बस्ती है. सड़क किनारे घर बने हुए हैं. दोपहर में लोग काम पर गए हैं और महिलाएं घर पर हैं. और जब बात शुरू होती है, तो ये महिलाएं बताती हैं कि विकास का मतलब क्या है. टूटी हुई झोपड़ी, पानी के लिए दूर लगा एक चापाकल, घर के बाहर पड़ी एक खाट और रसोई में रखे कुछ बर्तन. ये किसी एक आदमी की नहीं, बल्कि पूरे गांव की मिली-जुली संपत्ति है. गांव की पिट्टी देवी बताती हैं कि उनका घर खपरैल का बना है. इंदिरा आवास क्या होता है, उन्हें पता है, लेकिन कुछ लोग हैं जो उनसे कहते हैं कि इस ज़मीन पर घर नहीं बन सकता है.
समस्याएं बताती महिला
समस्याएं बताती महिला

गांव की ही शांति कहती हैं कि सरकारी मुलाजिम कहते हैं कि जिस जगह पर वो लोग रहती हैं, वो सरकारी ज़मीन है. लिहाजा उन्हें घर नहीं मिल सकता. शांति के पास अपनी कोई ज़मीन नहीं है और जिस ज़मीन पर खड़ी होकर वो बात कर रही हैं, उस ज़मीन पर वो पिछले 40 साल से रह रही हैं. गांव में सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर दिए हैं, सौभाग्य योजना के तहत बिजली दे दी है, लेकिन जब बात घर की आती है, तो सरकार के पास इन गरीबों के लिए कोई ज़मीन ही नहीं है.
लेकिन गांव की पिट्टी देवी के पास न तो उज्ज्वला का सिलिंडर है और न ही सौभाग्य की बिजली. वो अब भी लकड़ी पर खाना बनाती हैं और रोशनी के लिए केरोसिन तेल का इस्तेमाल करती हैं. पिट्टी देवी और उनकी तरह की तमाम महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम तो जानती हैं, लेकिन ये नहीं जानतीं कि वो देश के प्रधानमंत्री हैं. उनके जेहन में मोदी का जो नाम है, वो इस वजह से है कि जब वो जमुई में आए थे, तो तीन ज़हाज से आए थे और ये महिलाएं उन्हें देखने के लिए गई थीं. गांव की ही सन्मतिया देवी कहती हैं कि इस गांव की कोई सुनने वाला नहीं है. वोट किसे देंगी के सवाल पर वो कहती हैं कि जो भी उन्हें वृद्धा पेंशन देगा, उसे वो वोट दे देंगी. गांव की एक महिला सौभाग्य योजना पर भी सवाल उठाती हैं, वो कहती हैं कि जब सरकार को बिजली का बिल लेना था, तो फिर बिजली दी ही क्यों? उनका कहना था कि जब देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तभी इस गांव में बिजली आ गई थी. इंदिरा सरकार बिजली का बिल नहीं लेती थी, जबकि मोदी सरकार तो बिजली के लिए पैसे मांग रही है.
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इसी गांव में रहती हैं चिंता देवी. वो कहती हैं कि जब वोट मांगना होता है तो नेता घर-घर घूमते हैं, दादी-चाची कहते हैं और जब जीत जाते हैं तो फिर कभी झांकने भी नहीं आते. चिंता देवी की चिंता सिर्फ एक बात की है और वो है पानी. वो कहती हैं कि जो भी उनके लिए एक चापाकल लगा देगा, वो उसे वोट दे देंगी. और सिर्फ अपना ही क्यों घर के और भी लोगों के वोट उसी को जाएंगे, जो उनकी पानी की कमी दूर करेगा. चिंता देवी गांव के उन चुनिंदा लोगों में हैं, जिन्हें आवास योजना का लाभ मिला है. आवास बनाने के लिए उन्हें 45,000 रुपए मिले थे, लेकिन इनमें से भी 20,000 रुपए घूस देने पड़े. बचे हुए 25,000 रुपए में ही उन्हें अपना घर बनवाना था. और 25,000 रुपए में तो घर बनता नहीं है. चिंता देवी कहती हैं कि उन्हें पता है कि अगर घर नहीं बनवाया, तो सरकार उन्हें गिरफ्तार कर लेगी. लेकिन चिंता देवी कहती हैं कि उन्हें गिरफ्तारी का डर नहीं है. अगर पुलिस या कोई भी सरकारी कारिंदा उन्हें गिरफ्तार करने आता है, तो वो बताएंगी कि उन्होंने 20,000 रुपये की घूस दी है, इसलिए घर नहीं बन पा रहा है. केरोसिन और राशन की बात पर भी चिंता देवी कहती हैं कि उनका डीलर उनसे पूरे पैसे लेता है, लेकिन तेल भी कम देता है और राशन भी.
चिंता देवी और उनके गांव के लोग दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. खुद जमुई लोकसभा एक सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र है और चिराग पासवान यहां से सांसद हैं. अपनी ही जाति का सांसद होने पर चिंता देवी कहती हैं कि जाति को तो जाति ही काटती है. लेकिन इन तमाम नाकामियों और सरकार की उपेक्षा के बीच चिंता देवी लोकतंत्र को ज़िंदा रखी हुई हैं. वो कहती हैं कि कोई भी जीते-कोई भी हारे, मैं हर हाल में अपना वोट दूंगी. मेरा काम हो, न हो, घर बने न बने, लेकिन मैं वोट ज़रूर दूंगी.


वीडियो- जमुई के खैरा मुसहड़ा गांव का हाल, जहां घर तो दूर पीने के लिए पानी तक नहीं है

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