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दिल्ली में AAP-कांग्रेस साथ तो केजरीवाल-राहुल साथ क्यों नहीं दिखे?

कांग्रेस-AAP गठबंधन पर कुछ सवाल भी उठे, कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इतने एकजुट हैं, तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता - राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या मल्लिकार्जुन खरगे - AAP के उम्मीदवारों के साथ या अरविंद केजरीवाल के साथ रैली क्यों नहीं कर रहे?

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राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल ने बहुत कम बार मंच साझा किया है. (फ़ोटो - ANI)

पूरे उत्तर भारत में बेइंतहा गर्मी पड़ रही है. ‘बढ़ती गर्मी के साथ दिल्ली में बढ़ रहा है चुनावी पारा’ टाइप हेडलाइनें भी बढ़ रही हैं. NDA हो या INDIA ब्लॉक, दोनों सात लोकसभा सीटों को साधने के लिए अपनी आख़िरी कील ठोक रहे हैं. ऐसे में जब जेल से छूटे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तर-पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी कन्हैया कुमार के साथ एक मंच पर दिखे, तो संदेश आया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) पूरी मज़बूती के साथ एकजुट है. लेकिन कुछ सवाल भी उठे, कि अगर कांग्रेस और AAP इतने एकजुट हैं, तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता- राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या मल्लिकार्जुन खरगे - AAP के उम्मीदवारों के साथ या अरविंद केजरीवाल के साथ रैली क्यों नहीं कर रहे?

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ऊपर लेवल पर क्या चल रहा?

गठबंधन की शर्तों के तहत कांग्रेस तीन सीटें लड़ रही है - 

  • चांदनी चौक (जेपी अग्रवाल), 
  • उत्तर-पूर्वी दिल्ली (कन्हैया कुमार),
  • और, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली (उदित राज).

वहीं, AAP ने चार सीटों पर अपने दावेदार उतारे हैं. 

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  • पूर्वी दिल्ली (कुलदीप कुमार), 
  • पश्चिमी दिल्ली (महाबल मिश्रा), 
  • दक्षिणी दिल्ली (सही राम पहलवान) 
  • और, नई दिल्ली (सोमनाथ भारती).

शनिवार, 18 मई. राहुल गांधी कांग्रेस उम्मीदवार जय प्रकाश अग्रवाल के लिए दिल्ली के चांदनी चौक में रैली करते हैं. कहते हैं कि AAP कार्यकर्ता, कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तरह ही 'बब्बर शेर' हैं. फिर ये भी कहा कि वो अपना वोट AAP उम्मीदवार को, और केजरीवाल अपना वोट कांग्रेस उम्मीदवार को देंगे. दरअसल, राहुल गांधी नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में हैं और वहां से आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि केजरीवाल का वोट चांदनी चौक लोकसभा के अंतर्गत आता है, और वहां से कांग्रेस के जेपी अग्रवाल उम्मीदवार हैं.

राहुल ने केजरीवाल का नाम लिया, दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं को साथ में काम करने की अपील भी की. मगर इस रैली में केजरीवाल दिखाई नहीं पड़ते. फिर बात चलती है. दो और दो पांच करने वाले कहते हैं कि दोनों पार्टियों में ‘सब चंगा सी’ तो नहीं है. मगर देखने वालों को दुराव के संकेत एकतरफ़ा दिखे.

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दिल्ली AAP के संयोजक गोपाल राय, कन्हैया कुमार सहित तीनों कांग्रेस उम्मीदवारों के नामांकन दाख़िल करने साथ गए. जब केजरीवाल जेल में थे, तो AAP का चुनावी कैम्पेन सुनीता केजरीवाल ने लीड किया. तब कन्हैया कुमार, जेपी अग्रवाल और उदित राज समर्थन मांगने के लिए CM आवास पर सुनीता केजरीवाल से मिले भी थे.

इंडिया टुडे के अमित भारद्वाज की रिपोर्ट के मुताबिक़, AAP ने कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश और तेलंगाना से अपने कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाया है. घर-घर अभियान के लिए. उद्देश्य है कि दिल्ली की कई विधानसभाओं में दक्षिणी राज्यों समेत अलग-अलग राज्यों के जो वोटर्स हैं, उन्हें अपने पाले में किया जाए. फिर जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अंतरिम ज़मानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आए, तो INDIA ब्लॉक के उम्मीदवारों के लिए दिल्ली में रोड शो किया, नुक्कड़ सभाएं कीं. हालांकि, कांग्रेस का आलाकमान ऐसा करता नहीं दिखा.

इन सब के बीच AAP ने दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों के लिए अपनी समन्वय समिति बना ली, जिसके अध्यक्ष दुर्गेश पाठक हैं. कांग्रेस ने भी समन्वय टीम बनाई. इसका नेतृत्व दिल्ली कांग्रेस के पूर्व प्रमुख सुभाष चोपड़ा कर रहे हैं. 

AAP समन्वय समिति के प्रभारी दुर्गेश पाठक ने इंडिया टुडे को बताया, 

"हमने कांग्रेस नेताओं से हमारे अभियान में शामिल होने का आग्रह किया है. हमें सचिन पायलट की ज़रूरत थी, और उन्होंने हमारे लिए (दक्षिणी दिल्ली में) पंचायतें कीं भी. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दूसरे राज्यों में अपने प्रचार में व्यस्त हैं."

इस बीच AAP के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी से संयुक्त रैलियों और रोड शो के लिए औपचारिक अनुरोध किया था. शीर्ष नेताओं को अनुरोध भेजे गए, लेकिन समय मैच नहीं हुआ.

दूसरी तरफ़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में दो रैलियां की हैं. गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रोड शो किए. फिर भाजपा ने अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बुलाया. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ से लेकर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत तक. सब दिल्ली में चुनाव प्रचार कर चुके हैं.

AAP भी समझती है कि उसका और कांग्रेस का ‘सेम पेज’ पर होना, या कम से कम दिखना, तो ज़रूरी है ही. संभवतः इसीलिए बुधवार, 22 मई की सुबह AAP के सोमनाथ भारती कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पहुंचे. उनसे मिले. मुलाक़ात के बाद भारती ने कहा,

"मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं, और मेरे निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता भी हैं. मैं उनसे INDIA अलायंस के उम्मीदवार के रूप में मिला था. हमने सभी संभावनाओं पर चर्चा की है. उम्मीद है, कल कुछ सकारात्मक होगा."

हालांकि, कल (23 मई) बीत गया. प्रचार ख़त्म हो गया. मगर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल की कोई संयुक्त रैली या रोड शो हुआ नहीं. बताया गया कारण वही कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और खरगे की के पास ‘समय नहीं है’.

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पूर्व आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष इस गठबंधन को दोनों पार्टियों की ज़रूरत मानते हैं. उन्होंने डिजिटल न्यूज़ पोर्टल Scroll को बताया,

"2019 के आम चुनावों में कांग्रेस का वोट-शेयर 2014 से बढ़ गया, और AAP के शेयर में गिरावट आई. इससे पता चलता है कि वोटर्स ने 2014 में AAP को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के विकल्प के रूप में देखा था, लेकिन 2019 तक वो बुलबुला फूट गया. लोकसभा में भाजपा को हराने के लिए AAP को निश्चित रूप से कांग्रेस के समर्थन की ज़रूरत है."

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने दिल्ली की सातों सीटें जीती थीं. उनका वोट प्रतिशत भी बढ़ा है. ऐसे में AAP की चुनौती बड़ी है. दिल्ली में छठवें चरण में वोट पड़ेंगे. 25 मई को. नतीजे आएंगे 4 जून को. तभी कांग्रेस और AAP के गठबंधन का असर दिख पाएगा.  

 ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे नवनीत के इनपुट्स के साथ लिखी गई है.

वीडियो: AAP पर अब विदेशी फंड लेने का आरोप

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