बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को घोषित कर दिए जाएंगे. ये चुनाव परिणाम तय करेगा कि नबन्ना यानी राज्य के सचिवालय में कौन बैठेगा. ये चुनाव न सिर्फ बंगाल बल्कि नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल को भी डिफाइन करेगा. इससे इसकी झलक भी मिलेगी कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत 'मोदी मैजिक' अब भी बरकरार है, या समय के साथ इसका असर घट रहा है. बंगाल में 2 चरणों में वोटिंग हुई है.
ममता बनर्जी जीतें या BJP, बंगाल का फैसला दिल्ली तक गूंजेगा
बंगाल में फिलहाल BJP का किसी भी नगर पालिका या नगर निगम पर कोई नियंत्रण नहीं है. इसलिए बंगाल में भाजपा के संगठन में वो मजबूती नहीं है जो टीएमसी में है. इसलिए, यहां जीत हासिल करना एक बड़ा बदलाव होगा. बंगाल सिर्एफक और बड़ा राज्य नहीं है बल्कि यह पूर्वी भारत में BJP के वर्चस्व के खिलाफ सबसे बड़ा गढ़ है. इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत है.


294 सीटों पर वोटिंग के लिए इस बार पैरामिलिट्री की 2100 कंपनियां लगाई गईं जो अपने आप में ऐतिहासिक है. इसमें भी फलता विधानसभा पर गड़बड़ी के आरोप लगे. इसलिए उस पर दोबारा वोटिंग का आदेश दिया गया है. चुनाव काफी हद तक शांतिपूर्ण भी रहा. इस चुनाव में कई मुद्दे रहे जिन्होंने पूरी वोटिंग के दौरान अहम भूमिका निभाई. SIR, बॉर्डर सिक्योरिटी, बिना किसी कागजात के पलायन, महिला सुरक्षा जैसी बातों पर खूब वाद-विवाद हुआ. खासकर RG Kar वाले केस के बाद महिला सुरक्षा बंगाल में बहुत बड़ा मुद्दा बन गया.
अब नतीजे चाहे जो भी हों, उन्हें सिर्फ ममता बनर्जी की सरकार पर आए फैसले के तौर पर ही नहीं देखा जाएगा. उनकी पड़ताल इस रूप में की जाएगी कि क्या BJP की जंग के स्तर की चुनावी रणनीति वैसी कारगर है? ये भी पता चलेगा कि पहचान पर आधारित राजनीतिक गोलबंदी कितनी टिकाऊ है. द टेलीग्राफ ने इस मुद्दे पर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है. टेलीग्राफ ने दो सिनैरियो पेश किए हैं. इनमें भाजपा और टीएमसी के जीतने पर क्या स्थिति बनेगी, ये एनालिसिस किया गया है. एक-एक कर के दोनों कंडीशंस को समझते हैं.
बंगाल में BJP की बढ़त केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बढ़त से जुड़ी है. 2014 के लोकसभा चुनावों में BJP ने देश के बड़े हिस्सों में शानदार जीत हासिल की, लेकिन बंगाल में उसे सिर्फ दो सीटें मिलीं. ये इस बात को दिखाता है कि पूरे देश में जब मोदी लहर थी, तब भी बंगाल ने भाजपा को नहीं चुना. हालांकि 2009 के बाद से भाजपा ने यहां अपने वोट शेयर में काफी सुधार किया है. 2019 तक पार्टी ने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर कब्जा कर लिया था और 40.25 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया. 2021 में TMC ने 294 में से 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी. साल 2024 के आम चुनावों में BJP को 12 सीटें और 39.10 प्रतिशत वोट शेयर मिला था.
बंगाल में फिलहाल BJP का किसी भी नगर पालिका या नगर निगम पर भी कंट्रोल नहीं है. इसलिए बंगाल में भाजपा के संगठन में वो मजबूती नहीं है जो टीएमसी में है. इसलिए, यहां जीत हासिल करना एक बड़ा बदलाव होगा. बंगाल सिर्फ एक और बड़ा राज्य नहीं है बल्कि यह पूर्वी भारत में BJP के वर्चस्व के खिलाफ सबसे बड़ा गढ़ है. इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत है. यहां जीत हासिल करने से उत्तर प्रदेश के पूर्व में पार्टी का भगवा नक्शा असरदार तरीके से पूरा हो जाएगा. साथ ही इससे ममता की हालत भी कमजोर होगी.
71 साल की ममता बनर्जी लंबे समय से विपक्ष के सबसे विश्वसनीय चेहरों में से एक रही हैं. वो जुझारू नेता हैं. चुनावी रूप से वो कई बार अपनी काबिलियत साबित कर चुकी हैं और जब तक उनकी अपनी शर्तें पूरी न हों, तब तक कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'INDIA' गठबंधन में भी शामिल होने को तैयार नहीं हैं. बंगाल में हार से उनका राजनीतिक करियर भले ही खत्म न हो, लेकिन यह उन्हें BJP विरोधी गठबंधन के निर्माता के बजाय सिर्फ एक संघर्ष करके बचे रहने वाले नेता तक सीमित कर देगा. इससे INDIA गठबंधन में उनकी बारगेनिंग पावर घटेगी.
बंगाल फतह करने के लिए BJP ने कुछ खास मुद्दों का रास्ता चुना है. CAA, सीमा-पार घुसपैठ को रोकना और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था को मजबूत करना और कुछ खास क्षेत्रों में हिंदुओं को एकजुट करना भाजपा के कुछ मुख्य मुद्दे हैं. यहां जीत मिलने से यह रणनीति सही साबित हो जाएगी, जिससे भविष्य के विधानसभा चुनावों में भी इसे दोहराने का प्रोत्साहन मिलेगा. खासकर उन राज्यों में जहां अल्पसंख्यक आबादी काफी ज्यादा है और बॉर्डर्स भी खुले हुए हैं.
अगर TMC ने Bengal Elections जीता?तृणमूल के लिए बंगाल की जीत काफी मायने रखती है. भले ही वह कम सीटों वाली हो, मार्जिन कम हो, लेकिन अपने आप में यह बहुत मायने रखेगी. इससे यह साबित हो जाएगा कि जिन क्षेत्रीय पार्टियों के पास लोगों तक मदद पहुंचाने का मजबूत नेटवर्क और अपनी एक मजबूत पहचान है, वे BJP की संगठनात्मक और आर्थिक ताकत का मुक़ाबला कर सकती हैं. इससे यह बात भी साबित हो जाएगी कि 2024 लोकसभा चुनाव, जिनमें BJP अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गई थी, कोई अचानक हुई घटना नहीं थी. बल्कि यह उसके विस्तार की एक सीमा थी. अब उसका विस्तार जितना हो सकता था, हो चुका है.
दूसरी तरफ TMC की जीत से ममता की अपनी साख भी और बढ़ेगी. BJP ने बंगाल में अपने सबसे बड़े नेताओं को मैदान में उतारा था. प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कम से कम 16 मुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री प्रचार के लिए उतर गए थे. ममता न सिर्फ अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ, बल्कि उन कथित साजिशों के खिलाफ भी अपनी जीत का दावा करेंगी, जिसका आरोप उन्होंने चुनाव आयोग समेत कई संस्थाओं पर लगाया है.
अधिकतर एग्जिट पोल्स BJP को बढ़त मिलने का अनुमान है. लेकिन कम से कम दो एग्जिट पोल्स ने तृणमूल को साफ बहुमत मिलने की भविष्यवाणी की है. हालांकि, एग्जिट पोल के आंकड़े अक्सर गलत भी साबित होते हैं. जैसा 2021 और 2024 में हुआ था. नतीजे चाहे जैसे भी हों, कुछ जानकारों का मानना है कि ममता का वोट बैंक सिकुड़ता दिख रहा है. युवा, जिनके लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है, उनसे दूर हो गए हैं. यहां तक कि ग्रामीण हिंदू महिलाएं, जिनका वोट उन्हें लंबे समय से मिलता रहा था, अब उनसे दूर होती दिख रही हैं. इसकी वजह है बदलाव की चाहत, राज्य में मौकों की कमी और हिंदू वोटरों का एक साथ आना.
टीएमसी की बड़ी जीत क्यों जरूरी?TMC की बहुत कम सीटों से जीत भी विपक्ष के गठबंधन और राज्य के लिए सबसे बुरा नतीजा साबित हो सकती है. इससे ममता सत्ता में तो बनी रहेंगी, लेकिन कमजोर पड़ जाएंगी. इसकेे साथ ही उनके विधायकों के टूटने और दल-बदल का खतरा भी बढ़ जाएगा. साथ ही केंद्र के मुकाबले उनकी हैसियत कम हो जाएगी, जिससे राज्य के लिए रियायतें हासिल करने की उनकी ताकत भी घट जाएगी. इसके अलावा इससे उस राष्ट्रीय विपक्ष की साख को दोबारा मजबूत करने में भी कोई खास मदद नहीं मिलेगी, जो 2024 के चुनावों के बाद से ही एकजुट होने के लिए संघर्ष कर रहा है. नतीजा ये हो सकता है कि भाजपा का कॉन्फिडेंस 2029 के लिए बढ़ेगा.
टेलीग्राफ की रिपोर्ट और कुछ नहीं बल्कि बंगाल का राजनीतिक मूड दिखाती है. बंगाल की एक आदत है कि वह राष्ट्रीय रुझानों में देर से शामिल होता है. वामपंथ के 34 साल के शासन से लेकर ममता की अपनी जोरदार एंट्री तक, 4 मई को जो कुछ भी होगा, वह शायद राज्य के राजनीतिक इतिहास का सिर्फ एक अध्याय ही बंद न करे. नतीजों को 'नबन्ना' में पढ़ा जाएगा लेकिन उसकी गूंज दिल्ली तक महसूस की जाएगी.
वीडियो: TMC की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?



















